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इस जन्म में भुगतना पड़ता है पिछले कर्मों का फल, Premanand Maharaj ने दिया जवाब
धर्म: ऐसा बोला जाता है कि पिछले जन्मों का फल इस जन्म में भुगतना पड़ता है पर इस बात में कितनी सच्चाई है। यह कोई नहीं जानता। अब प्रेमानंद महाराज ने इस पर जवाब दिया है। महाराज के अनुसार, कर्म का सिद्धांत ही ईश्वर की सबसे पहली न्याय व्यवस्था है। उनका यह कहना है कि इन दुनिया में जब कोई भी अपराध कर दे तो उसी दिन उसको सजा नहीं मिलती वैसे ही भगवान की अदालत में भी तुरंत कर्मों का फल नहीं मिलता। -

Himachal News: राजकीय महाविद्यालय ऊना में विश्व एड्स दिवस मनाया
ऊना/सुशील पंडित: आज राजकीय महाविद्यालय ऊना में विश्व एड्स दिवस मनाया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कॉलेज के कार्यवाहक प्राचार्य प्रो॰ पुनीत कंवर रहे ।उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए उनके प्रयासों एवं रचनात्मक पहल की सराहना की।कार्यक्रम के अंतर्गत
छात्रों को “Prevention is Better Than Cure” शीर्षक वाली एनिमेटेड फ़िल्म दिखाई गई।इसी क्रम में बी.एससी. द्वितीय वर्ष के छात्रों द्वारा बनाई गई एड्स जागरूकता पर वीडियो भी प्रदर्शित की गई।बी.एससी. तृतीय वर्ष (मेडिकल) के छात्रों ने मंच पर एक प्रभावशाली नाटक प्रस्तुत किया, जिसमें एड्स के प्रति जागरूकता फैलाने और समाज में व्याप्त भेदभाव को समाप्त करने का संदेश दिया गया।
इस वर्ष विश्व एड्स दिवस 25 की थीम “Overcoming Disruption and Transforming the AIDS Response” रही।आरआरसी की नोडल अधिकारी, प्रोफेसर शशि कंवर ने सभी का धन्यवाद करते हुए इस क्लब के सदस्यों जिसमें डॉ. प्रमिला, डॉ. सुनील दत्त, प्रो. करण , प्रो. अलका एवं प्रो. निकिता के सहयोग एवं सक्रिय सहभागिता की सराहना की । इस मौक़े पर वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. सुरेश कुमार, डॉ. संजय वर्मा, डॉ. रूचि, डॉ. श्वेता, प्रो. संजय शर्मा एवं डॉ. विपुल उपस्थिति रहे।
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Punjab News: सोशल मीडिया के जरिए सीमा पार से हो रही थी हथियारों की तस्करी, 2 आरोपी गिरफ्तार, देखें वीडियो
अमृतसरः सीमा पार हथियारों की तस्करी करने के मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 2 तस्करों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 7 आधुनिक पिस्तौल बरामद किए है। मामले की जानकारी देते हुए पुलिस कमिशनर गुरप्रीत सिंह भुल्लर ने बताया कि कमिशनरेट पुलिस ने खुफिया जानकारी के आधार पर कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान से जुड़े हथियार तस्करी के मॉड्यूल का खुलासा किया है। पुलिस ने 2 व्यक्तियों को गिरफ्तार करते हुए सात आधुनिक पिस्तौल बरामद किए है, जिनमें तीन PX5 और चार .30 बोर शामिल हैं। ये गिरफ्तारीयां सीमा पार से हो रही गैरकानूनी गतिविधि पर बड़ा झटका मानी जा रही हैं।
प्राथमिक जांच के दौरान यह महत्वपूर्ण खुलासा सामने आया है कि आरोपी लंबे समय से पाकिस्तान में बैठे हैंडलर के निर्देशों पर काम कर रहे थे। उन्हें हथियारों की डिलीवरी और पिकअप प्वाइंट निर्धारित करने के लिए व्हाट्सएप के जरिए संदेश भेजे जाते थे, जिसके माध्यम से यह पूरा नेटवर्क चलाया जा रहा था। तस्करों को विशेष लोकेशन पर पहुँचकर हथियार इकट्ठे करने की हिदायत दी जाती थी, जिससे यह साबित होता है कि पूरा मामला एक बड़ी साज़िश का हिस्सा था। जगराज सिंह और बलविंदर सिंह इन दोनों को काबू किया गया है। जगराज सिंह के खिलाफ पहले भी हत्या का केस दर्ज है।
पुलिस के अनुसार, पाकिस्तान से हथियार भेजने के लिए यह गैंग ड्रोन, नेटवर्क कैरियर और स्थानीय सहायकों की मदद लेता था। गिरफ्तार आरोपियों के फोन डेटा, व्हाट्सएप चैट और अन्य डिजिटल सबूतों की गहनता से जांच की जा रही है, ताकि पूरे कनेक्शन और बैक-एंड सप्लाई चेन को ट्रैक किया जा सके। पंजाब पुलिस ने कहा है कि प्रदेश की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है और सीमा पार से चल रहे तस्करी माफिया को ज़रूर काबू किया जाएगा। उच्च अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस तरह के मॉड्यूल्स को तोड़ने के लिए विशेष ऑपरेशन लगातार चलाए जा रहे हैं और भविष्य में भी इस पर और सख्ती से कार्रवाई की जाएगी।
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अवैध खनन के पूरे इको सिस्टम पर ऊना प्रशासन का निर्णायक प्रहार
बहुस्तरीय रणनीति बनी कारगर, प्रदेश में ‘ऊना मॉडल’ की गूंज
ऊना/सुशील पंडित: ऊना जिले में अवैध खनन और उससे पोषित पूरे इको सिस्टम को ध्वस्त करने को जिला प्रशासन की बहुस्तरीय रणनीति कारगर साबित हो रही है।डीसी जतिन लाल ने जिले में रात्रिकालीन उत्खनन नेटवर्क, अवैध ढुलाई, शराब-आधारित नाइट एक्टिविटी, असामाजिक तंत्र और हथियारों के दुरुपयोग पर जिस तरह बहुस्तरीय और समग्र रणनीति से प्रहार किया है, वह अब पूरे प्रदेश में ‘ऊना मॉडल’ के नाम से पहचानी जाने लगी है। इस रणनीति ने बेहद कम समय में ठोस परिणाम दिए हैं और अवैध खनन के पूरे ढांचे को लगभग जड़ों से हिला दिया है।
डीसी जतिन लाल का कहना है कि अवैध खनन सिर्फ उत्खनन का मुद्दा नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था, पर्यावरण, राजस्व, परिवहन अव्यवस्था और अपराध चक्र से जुड़ा एक व्यापक संकट है। इसलिए ऊना में एक बहुस्तरीय, वैज्ञानिक और कड़े प्रवर्तन वाला मॉडल लागू किया गया। पिछले एक पखवाड़े में प्रशासन द्वारा उठाए गए कड़े कदमों ने अवैध खनन के हर घटक, माल, मशीनरी, गतिविधि, ढुलाई और सहयोगी आपराधिक तत्वों पर नकेल कसते हुए पूरे आपराधिक ढांचे को कड़ी चोट पहुंचाई है।
ऊना प्रशासन की यह रणनीति अवैध खनन की जड़ों को काटने वाली एक वैज्ञानिक, बहुस्तरीय और समन्वित कार्ययोजना है। आज यह संपूर्ण रणनीति प्रदेश भर में ‘ऊना मॉडल’ के नाम से पहचानी जा रही है और अवैध खनन और उसके पूरे इको सिस्टम के खात्मे का मजबूत उदाहरण बनी है।
रात में खनन पर रोक, टूटी अवैध नेटवर्क की सबसे बड़ी ढाल
अवैध खनन का पूरा ढांचा रात के अंधेरे पर आधारित था। इस पर निर्णायक प्रहार करते हुए जिला प्रशासन ने
शाम 5 बजे से सुबह 6 बजे तक खनन और माल ढुलाई पर पूर्ण प्रतिबंध लागू किया। अब वैध खनन केवल सुबह 6 से शाम 5 बजे तक अनुमति के साथ ही संभव है। इस एक फैसले से अवैध उत्खनन, टिपर मूवमेंट और रात्रिकालीन ढुलाई का तंत्र लगभग ठप हो गया।शराब बिक्री पर नियंत्रण,रात के अपराध तंत्र की कड़ी टूटी
अवैध खनन से जुड़ी गतिविधियों में देर रात शराब खपत और भीड़ महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थी। इस चक्र को तोड़ने के लिए सभी शराब वेंड्स, अहाते, बार, पब, क्लब और शराब परोसने वाले रेस्टोरेंट को रात 10 बजे तक बंद करना अनिवार्य किया गया। यह कदम नशा नियंत्रण के साथ-साथ रात्रि अपराध गतिविधियों पर रोक का महत्वपूर्ण औजार सिद्ध हुआ है।
परिवहन व्यवस्था पर सख़्ती,अवैध ढुलाई नेटवर्क निष्क्रिय
अवैध खनन की ताकत इसकी ढुलाई चेन से जुड़ी थी। इस चेन को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने परिवहन व्यवस्था को पूरी तरह पुनर्गठित किया। सभी टिप्पर/मॉल ढुलाई वाले भारी वाहन केवल सुबह 10 से शाम 5 बजे तक ही चलने के निर्देश दिए गए। खनन वाहनों के लिए समर्पित कॉरिडोर अधिसूचित किए गए। डीसी चौक से मैहतपुर बॉर्डर तक टिप्परों की आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया। वहीं इस मार्ग पर व्यवसायिक भारी वाहनों की आवाजाही और लोडिंग-अनलोडिंग पर सुबह 8 बजे से रात 9 बजे तक रोक लगाई है। प्रतिबंध अवधि में वाहनों को झलेड़ा-डीसी चौक-संतोषगढ़-अजौली मोड़ मार्ग पर डायवर्ट किया है।
इन कठोर उपायों ने अवैध ढुलाई नेटवर्क को कमजोर कर दिया।स्वां नदी किनारे वाहनों का अनाधिकृत प्रवेश प्रतिबंधित, बिना अनुमति खनन पर पूर्ण रोक
स्वां नदी को अवैध उत्खनन से सबसे बड़ा खतरा था। इस संवेदनशील क्षेत्र को बचाने के लिए प्रशासन ने नदी किनारे वाहनों का अनाधिकृत प्रवेश प्रतिबंधित किया गया है। इस क्षेत्र में बिना अनुमति के खनन पर रोक लगाई गई है। उल्लंघन पर वाहन जब्त करने और एफआईआर की करवाई
ने प्रतिबंध को अधिक धारदार बना दिया है। यह कदम नदी की संरचना और पर्यावरण संरक्षण के लिए बड़ा परिवर्तनकारी कदम माना जा रहा है।प्रशासन-पुलिस-माइनिंग विभाग का संयुक्त निगरानी मैकेनिज्म, रात्रिकालीन पेट्रोलिंग बढ़ाई
अवैध खनन से निपटने में निगरानी सबसे बड़ी चुनौती थी। इसे मजबूत करने के लिए जिले में प्रशासन, पुलिस और माइनिंग विभाग की संयुक्त निगरानी तंत्र को सक्रिय किया गया। रात्रिकालीन पेट्रोलिंग बढ़ाई गई। वहीं, संवेदनशील इलाकों, रूटों और चेक-पोस्टों पर चौबीसों घंटे सक्रिय निगरानी सुनिश्चित की गई। संयुक्त निगरानी ने जवाबदेही बढ़ाई है और मौके पर कार्रवाई की क्षमता को दोगुना किया है।हथियार लाइसेंसों की समीक्षा
अवैध खनन से जुड़े कुछ मामलों में हथियारों के दुरुपयोग की शिकायतें आने पर जिला प्रशासन ने सभी लाइसेंसधारकों को हथियार थानों में जमा कराने के निर्देश जारी किए और प्रत्येक लाइसेंस की संभावित खतरे के आधार पर समीक्षा शुरू की है। विवादित या जोखिमपूर्ण मामलों में लाइसेंस निलंबित या रद्द किए जा रहे हैं।
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विश्व एड्स दिवस के उपलक्ष्य पर जागरूकता कार्यशाला का आयोजन
ऊना/ सुशील पंडित: हिमोत्कर्ष महिला मंच एवं रेड रिबन क्लब संयुक्ता चौधरी हिमोत्कर्ष महिला प्रशिक्षण संस्थान ऊना के संयुक्त तत्वावधान में विश्व एड्स दिवस के उपलक्ष्य पर संस्थान परिसर में जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जिला आयुष अधिकारी डॉ. किरण शर्मा मुख्यातिथि के रूप में उपस्थित हुई। कार्यशाला में राजकीय आयुष चिकित्सालय तलमेहड़ा से आयुष अधिकारी डॉ. जागृति दत्ता ने मुख्य वक्ता के रूप में विद्यार्थियों को संबोधित किया।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्यातिथि डॉ. किरण शर्मा ने अपने शरीर को मन, विचारों और सोच से स्वच्छ बनाने के लिए कहा। उन्होंने बताया कि हमारे मस्तिष्क के तीन भाग हैं। समझ वाला भाग, संवेदनाओं का भाग और कार्य करने वाला भाग। जब हमारे समझ वाले भाग की अपेक्षा संवेदना वाला भाग अधिक कार्य करता है तो मनुष्य से कई प्रकार की गलतियां होती है। इसलिए हमें अपना समझ वाला भाग बढ़ाना चाहिए। अच्छा पढ़े, अच्छा सोचें और अच्छी बात करें।
उन्होंने कहा कि अपने शरीर और अपने साथ कुछ समय बिताएं। उन्होंने कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थितजनों से मैडीटेशन का अभ्यास करवाया। कार्यशाला की मुख्य वक्ता डॉ. जागृति दत्ता ने संस्थान की छात्राओं को संबोधित करते हुए उन्हें एड्स के कारण, एड्स से होने वाले शरीर पर प्रभाव, एड्स की रोकथाम के उपाय तथा एड्स से जुड़ी भ्रांतियों के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम में हिमोत्कर्ष महिला मंच की वरिष्ठ उपाध्यक्ष अनूपा ठाकुर ने सबका स्वागत करते हुए कार्यक्रम के उद्देश्यों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि एड्स एक जानलेवा बीमारी तो है ही, इसके साथ ही यह एक सामाजिक अभिशाप के रूप में भी रोगी को शारीरिक, मानसिक व सामाजिक आघात पहुंचाती है। कार्यक्रम में संस्थान की छात्राओं कंचन, दीक्षा और किरण ने भी एड्स के बारे में अपने विचार व्यक्त किए।
जबकि संस्थान की छात्राओं वृंदा व नैना ने पोस्टर के माध्यम से एड्स रोग के प्रति जागरूकता फैलाई। मुख्यातिथि डॉ. किरन शर्मा ने कार्यक्रम में भाषण व पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता में भाग लेने वाली छात्राओं वृदा, नैना, किरण, दीक्षा, कंचन को पुरस्कार देकर सम्मानित किया। हिमोत्कर्ष महिला मंच की सदस्य रमा कंवर ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। इस अवसर पर महिला मंच सदस्य अनूपा ठाकुर, रमा कंवर, अनीती सूद, कविता गोयल, मनीषी ठाकुर, रंजू देवी, मीना ठाकुर, निशा, कमला व 40 से अधिक छात्राएं उपस्थित थी।
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कांग्रेस सरकार के 3 साल: व्यवस्था पतन, कर्ज और जनहित की अनदेखी के तीन वर्ष : डॉ. राजीव बिंदल
4 दिसंबर को धर्मशाला में विशाल भाजपा प्रदर्शन, झूठी गारंटियों का होगा पर्दाफाश
ऊना/सुशील पंडित: भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने ऊना में आयोजित एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार के 3 वर्ष 11 दिसंबर को पूर्ण हो रहे हैं और मीडिया के माध्यम से यह जानकारी मिली है कि कांग्रेस पार्टी इस अवसर पर मंडी में जश्न मनाने की तैयारी कर रही है। डॉ. बिंदल ने कहा कि वास्तव में यह तीन साल “जश्न” के नहीं, बल्कि व्यवस्था पतन के तीन साल हैं। इन तीन वर्षों में हिमाचल प्रदेश की संपूर्ण व्यवस्थाएं तार-तार हो चुकी हैं।
उन्होंने कहा कि यह कानून व्यवस्था के पतन के तीन साल हैं, जहां आए दिन लूट, चोरी, फिरौती, डकैती और गोलीकांड की घटनाएं आम हो गई हैं। ऊना के लोग इसके प्रत्यक्ष गवाह हैं, लेकिन यह समस्या केवल ऊना तक सीमित नहीं रही, बल्कि चंबा से सिरमौर और कांगड़ा से किन्नौर तक गोलीकांड और अपराध की घटनाएं आम बात बन गई हैं। यह सरकार कानून व्यवस्था बनाए रखने में पूरी तरह विफल रही है।
डॉ. बिंदल ने कहा कि यह भारी कर्ज के तीन साल हैं। प्रदेश सरकार ने भारीभरकम कर्ज तो लिया, लेकिन उस कर्ज को जनता के हित में लगाने में पूरी तरह असफल रही। यह सरकार बेरोजगारों के साथ किए गए भद्दे मजाक के तीन साल साबित हुई है। उन्होंने कहा कि नौकरियां देने के वादे तो किए गए, लेकिन डेढ़ लाख से अधिक सरकारी पदों को समाप्त कर दिया गया। यह बेरोजगार युवाओं के साथ घोर अन्याय है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि यह शिक्षा व्यवस्था के पतन के तीन साल हैं। आए दिन नए फरमान जारी किए जा रहे हैं। पहली से पांचवीं कक्षा तक अंग्रेजी माध्यम लागू कर दिया गया, जबकि शिक्षकों को इसकी न तो समुचित ट्रेनिंग दी गई और न ही आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए गए। बच्चे पांचवीं कक्षा में पहुंच जाते हैं और उन्हें बिना तैयारी के ऊँचे स्तर की अंग्रेजी पढ़ाई जाती है। हिमाचल प्रदेश शिक्षा बोर्ड की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हुए हैं, जिसके कारण कुछ स्कूलों को सीबीएसई में बदल दिया गया और करीब 2000 स्कूल बंद कर दिए गए। अध्यापक व्यवस्था को भी पूरी तरह से छिन्न-भिन्न कर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि यह स्वास्थ्य सेवाओं के पतन के तीन साल भी हैं। गरीब व्यक्ति पहले हिमकेयर और आयुष्मान भारत योजनाओं के माध्यम से इलाज करवा रहा था, लेकिन आज वह इलाज के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है। हिमकेयर बंद, आयुष्मान बंद, अस्पतालों में दवाइयों की कमी और अव्यवस्थाएं चरम पर हैं। यह सरकार स्वास्थ्य सेवाएं देने में पूरी तरह विफल सिद्ध हुई है।
डॉ. बिंदल ने आरोप लगाया कि यह भाई-भतीजावाद, मित्रों की सरकार और माफिया राज के तीन साल भी हैं। शासन-प्रशासन में पारदर्शिता समाप्त हो गई है और मित्रवाद हावी हो गया है। उन्होंने कहा कि मंडी, जहां आज भी हजारों लोग आपदा के जख्म झेल रहे हैं, अपने घरों की जगह स्कूलों, धर्मशालाओं और रिश्तेदारों के घरों में शरण लेने को मजबूर हैं, वहीं कांग्रेस सरकार वहां जश्न मनाने की तैयारी कर रही है। यह जश्न नहीं, बल्कि बर्बादी का उत्सव है।
डॉ. बिंदल ने स्पष्ट किया कि इसी व्यवस्था पतन और जनविरोधी नीतियों के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी 4 दिसंबर को धर्मशाला के जोरावर स्टेडियम में एक विशाल प्रदर्शन करने जा रही है। इस प्रदर्शन के माध्यम से सरकार को उसकी विफलताओं का आईना दिखाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह वही सरकार है जो झूठी गारंटियों के दम पर सत्ता में आई थी। 28 लाख बहनों को ₹1500 रुपये प्रतिमाह देने की गारंटी, 58 साल की उम्र तक पक्की नौकरी देने की बातें, पहली ही कैबिनेट में फैसले लेने के वादे – सब आज हवा-हवाई साबित हो चुके हैं। मित्र, रोगी मित्र, वन मित्र जैसे नामों पर युवाओं के साथ हजारों रुपये मानदेय में अन्याय किया गया है।
डॉ. बिंदल ने कहा कि मुख्यमंत्री बार-बार भाजपा पर गुटबाजी का आरोप लगाते हैं, जबकि सच्चाई यह है कि कांग्रेस सरकार अपनी विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए तीन साल से भाजपा का नाम जप रही है। मुख्यमंत्री से आग्रह है कि यदि उन्हें वास्तव में लगता है कि भाजपा गुटों में बंटी है, तो वे कल ही चुनाव करा लें, जनता स्वयं बता देगी कि कांग्रेस कहां खड़ी है और भाजपा कहां।
उन्होंने कहा कि सरकार का दायित्व है कि वह आपदा प्रबंधन, समय पर वेतन और पेंशन भुगतान, कानून-व्यवस्था की मजबूती, नशा कारोबार पर रोक और जनसुरक्षा को सुनिश्चित करे, लेकिन कांग्रेस सरकार इन सभी जिम्मेदारियों से भाग रही है। हिमाचल की जनता आज इस सरकार से पूरी तरह त्रस्त है। डॉ. बिंदल ने कहा कि ना भूतों ऐसी सरकार देखी गई और ना भविष्य में ऐसी सरकार देखने को मिलेगी। अंत में डॉ. बिंदल ने प्रदेश की जनता से 4 दिसंबर के विशाल प्रदर्शन में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर प्रदेश सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद करने का आह्वान किया।
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वित्त मंत्री सीतारमण ने सेस लगाने वाले 2 बिल किए पेश, सिगरेट समेत तंबाकू प्रोडक्ट्स होंगे महंगे !
नई दिल्लीः संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत हो गई है। कार्यवाही शुरू होते ही सबसे पहले दिवंगत सांसदों को श्रद्धांजलि दी गई। जिसके बाद संसद के शीतकालीन सत्र की हंगामेदार शुरुआत हुई है। एसआईआर के मुद्दे पर विपक्ष हंगामा कर रहा है। इस सत्र में सरकार का फोकस 14 अहम विधेयकों को पास कराने पर है, जिनमें दिवाला कानून, बीमा कानून, सिक्योरिटीज मार्केट, कॉर्पोरेट कानून, राष्ट्रीय राजमार्ग, उच्च शिक्षा आयोग, एटॉमिक एनर्जी, जीएसटी और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े बिल शामिल हैं। शीतकालीन सत्र 19 दिसंबर तक चलेगा। 19 दिनों में संसद की 15 बैठकें होनी हैं। यह 18वीं लोकसभा का छठा सत्र है। इस दौरान कांग्रेस सांसद गुरजीत सिंह औजला ने कहा, ‘शीतकालीन सत्र में सबसे बड़ा वोट का मुद्दा है, जिस तरीके से वोटों की हेरा फेरी करके सरकार बनाई जाती है, उसपर लगातार चर्चा जारी रहेगी। उसपर चुनाव आयोग जवाबदेह नहीं है, जवाब उन्हें (सरकार) देना हैं लेकिन वो जवाब हमसे मांग रहे हैं, यह दुख की बात है।’
ਪੰਜਾਬੀ ਵਿੱਚ ਪੜ੍ਹੋ:
https://encounternewspaper.com/top-news/finance-minister-introduces-two-important-bills-on-the-first-day-of-the-winter-session-proposes-to-implement-new-cess-on-tobacco-products/वहीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में 2 अहम बिल पेश किया। दोनों बिल उन उत्पादों पर नई कर व्यवस्था से जुड़े हैं, जिन पर अभी जीएसटी क्षतिपूर्ति सेस लगता है- जैसे सिगरेट, तंबाकू और पान मसाला। इसके जरिए केंद्रीय उत्पाद शुल्क एक्ट, 1944 में संशोधन कर सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर क्षतिपूर्ति सेस खत्म होने के बाद एक्साइज ड्यूटी के जरिए राजस्व संग्रह जारी रखा जाएगा। इसे केंद्रीय उत्पाद शुल्क (संशोधन) विधेयक, 2025 नाम दिया गया है। वित्त मंत्री ने स्वास्थ्य सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा सेस विधेयक, 2025 भी पेश किया। नया सेस उन उत्पादों पर लगेगा जिनसे राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा जोखिम माना जाता है। पान मसाला जैसे उत्पादों पर यह सेस लगाया जाएगा।
तंबाकू और पान मसाला जैसी हानिकारक उत्पादों पर अभी 28% जीएसटी लगता है। क्षतिपूर्ति सेस खत्म होने के बाद, तंबाकू और संबंधित उत्पादों की बिक्री पर 40% GST और उत्पाद शुल्क लगेगा, जबकि पान मसाला पर 40% GST और स्वास्थ्य सुरक्षा एवं राष्ट्रीय सुरक्षा सेस भी लगेगा। केंद्रीय उत्पाद शुल्क संशोधन बिल में सिगार/चुरूट/सिगरेट पर 5,000 रुपए से लेकर 1,000 स्टिक पर 11,000 रुपए तक उत्पाद शुल्क लगाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा, इसमें कच्चा तंबाकू पर 60-70% और निकोटीन और सूंघने वाले उत्पादों पर 100% टैक्स लगाने का प्रस्ताव है। अभी सिगरेट पर कीमत के अनुसार 5% क्षतिपूर्ति सेस और 1,000 स्टिक पर 2,076-3,668 रुपए का सेस लगता है।
बता दें कि सरकार के इस विधेयक का उद्देश्य “जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर समाप्त होने के बाद, टैक्स को संरक्षित करने के लिए सरकार को तंबाकू और तंबाकू उत्पादों पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क की दर बढ़ाने के लिए राजकोषीय गुंजाइश प्रदान करना है।” स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर विधेयक, 2025, पान मसाला जैसी विशिष्ट वस्तुओं के उत्पादन पर उपकर लगाने का प्रावधान करता है। तंबाकू और पान मसाला जैसी हानिकारक वस्तुओं पर वर्तमान में 28 प्रतिशत जीएसटी लगता है, साथ ही विभिन्न दरों पर क्षतिपूर्ति उपकर भी लगता है। केंद्रीय उत्पाद शुल्क संशोधन विधेयक, 2025 और स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर विधेयक, 2025 यह सुनिश्चित करेंगे कि क्षतिपूर्ति उपकर समाप्त होने के बाद भी तंबाकू और पान मसाला जैसी हानिकारक वस्तुओं पर कर की दर समान बनी रहे। हालांकि, सिगरेट समेत अन्य तंबाकू उत्पादों पर टैक्स बढ़ेगा इस पर फिलहाल कोई स्पष्टता नहीं है।
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Jalandhar News: DSP Bharat Masih ने संभाला चार्ज, दी चेतावनी, देखें वीडियो
जालंधर, ENS: सब-डिवीजन फिल्लौर के डीएसपी भरत मसीह ने चार्ज संभाला लिया है। भरत मसीह ने बताया कि वह पहले भी इस चौंकी के इंचार्ज रह चुके है। लोगों के सहयोग से उन्हें दोबारा इस इलाके में सेवा करने का मौका मिला है। लोगों के समर्थन से उस समय हमारी टीम ने क्राइम पर पूरी तरह नकेल डालकर रखी थी। अब भी लोगों से उम्मीद है कि वह हमारा और टीम का पूरा सहयोग करेंगे।
उन्होंने कहा कि जो पंजाब सरकार की युद्ध नशे विरुद्ध मुहिम चलाई जा रही है। उस पर काम करेंगे और लोगों के सहयोग से नशे के कारोबार पर नकेल डाली जाएगी। कानून का राज रहेगा कोई गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं होगी। इलाके में जो भी नशे के स्पॉट इलाके है। उन्हें चैकआउट करेंगे और निरंतर नजर रखी जाएगी। जो लोग नशे कर रहे है उन्हें नशा छुड़ाओं केंद्र में भेजकर नशे की दल-दल से बाहर निकालने का काम किया जाएगा।
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Punjab News: Hotel Paris Hilton में पुलिस की दबिश, विदेशी लड़कियां सहित 10 काबू
बठिंडाः शहर के प्रसिद्ध होटल पैरस हिल्टन में पुलिस ने दबिश दी। जहां पुलिस ने विदेशी लड़कियों सहित 10 को काबू किया है। दरअसल, पुलिस ने ने गुप्त सूचना के आधार पर छापा मारकर अश्लील गतिविधियों का भंडाफोड़ किया। पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक होटल में विदेशी लड़कियों की मौजूदगी में पार्टी की जा रही थी। इस दौरान होटल में पुलिस के पहुंचते ही सन्नाटा छा गया।

मामले की जानकारी देते हुए एसपी सिटी नरेन्द्र सिंह ने बताया कि उनकी टीम को गुप्त सूचना मिली थी कि होटल में संदिग्ध गतिविधियां हो रही हैं। इस पर तुरंत कार्रवाई करते हुए छापा मारा गया। जांच के दौरान पुलिस ने होटल से 10 लोगों को काबू किया गया है, जबकि कुछ विदेशी लड़कियों को हिरासत में लेकर कानूनी कार्रवाई के बाद घर भेज दिया गया। पुलिस ने होटल मालिक पंकज, उसके पार्टनर और एक अन्य व्यक्ति समेत कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
बताया जा रहा है कि होटल में विदेशी लड़कियों के साथ सेक्स रैकेट चलाए जाने का भी शक है, जिसकी पुष्टि के लिए आगे की जांच जारी है। एसपी सिटी नरेन्द्र सिंह ने कहा, “हमने आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। आगे की कार्रवाई तीव्र गति से चल रही है।”
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केंद्र की नीति पर सवाल: क्यों पंजाब पीछे, जबकि दूसरे राज्यों को मिल रहा तुरंत पैसा?
चंडीगढ़: 2025 के भयानक बाढ़ ने पंजाब को तबाह कर दिया था। लाखों एकड़ फसल डूब गई, सैकड़ों गांव पानी में समा गए, हजारों परिवार बेघर हो गए। उस मुश्किल घड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद पंजाब आए थे। हवाई सर्वे किया, कैमरों के सामने बड़े-बड़े वादे किए और ऐलान किया कि केंद्र सरकार पंजाब को बाढ़ राहत के लिए 1600 करोड़ रुपये की विशेष सहायता देगी। पंजाब के लोगों ने राहत की सांस ली थी कि अब कम से कम केंद्र सरकार तो साथ खड़ी है।
लेकिन आज कई महीने बीत जाने के बाद भी उस 1600 करोड़ में से एक रुपया भी पंजाब के खाते में नहीं आया। न एक पैसा। न केंद्र ने कोई आधिकारिक पत्र भेजा, न कोई किस्त जारी की। प्रधानमंत्री का वह भव्य ऐलान सिर्फ़ कैमरों और हेडलाइनों तक सीमित रह गया। पंजाब की जनता आज भी उसी बाढ़ के घाव चाट रही है और केंद्र सरकार मुँह फेरे बैठी है।

पंजाब सरकार ने बार-बार केंद्र को पत्र लिखे। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने खुद प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को चिट्ठियां लिखीं, मीटिंग मांगी, रिमाइंडर भेजे। हर बार जवाब मिला – “विचार किया जा रहा है”, “प्रक्रिया चल रही है”। लेकिन प्रक्रिया आज तक पूरी नहीं हुई। सैकड़ों मौतें हुईं, अरबों का नुकसान हुआ, फिर भी केंद्र सरकार की नींद नहीं टूटी।
दूसरी तरफ जब बिहार, असम या गुजरात में बाढ़ आती है तो केंद्र सरकार तुरंत पैकेज घोषित करती है, तुरंत पैसे ट्रांसफर कर देती है। वहाँ के मुख्यमंत्री अगर भाजपा के हैं तो राशि दोगुनी-तिगुनी हो जाती है। लेकिन पंजाब? पंजाब तो आम आदमी पार्टी की सरकार है, इसलिए यहाँ भेदभाव, उपेक्षा और सज़ा। भाजपा को लगता है कि पंजाब को सबक सिखाना है, भले इसके लिए लाखों किसान और मज़दूर भुखमरी की कगार पर पहुँच जाएँ।
केंद्र के मंत्री कभी 411 करोड़, कभी 480 करोड़, कभी 800 करोड़ दिए जाने का दावा करते हैं, लेकिन पंजाब के खजाने में एक भी रुपया नहीं आया। ये झूठी प्रेस रिलीज़ सिर्फ़ जनता को गुमराह करने के लिए हैं। सच तो आरटीआई और सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है – 1600 करोड़ का एक पैसा भी नहीं आया। यह सिर्फ़ धोखा नहीं, पंजाब के साथ विश्वासघात है।
पंजाब ने हमेशा देश को अनाज दिया, देश की सीमाओं की रक्षा की, सबसे ज़्यादा सैनिक दिए। लेकिन जब पंजाब मुसीबत में है तो केंद्र सरकार उसकी पीठ पर छुरा घोंप रही है। यह राजनीतिक बदला है, क्षेत्रीय भेदभाव है, संवैधानिक अधिकारों का हनन है।
पंजाब की जनता यह सब देख रही है। 2027 के विधानसभा चुनाव दूर नहीं। जिस दिन पंजाब जवाब देगा, उस दिन दिल्ली की सत्ता के गलियारे कांप उठेंगे क्योंकि पंजाब माफ़ नहीं करता, पंजाब याद रखता है।