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Jalandhar News: पार्षद Neeraj Jassal के खिलाफ थाने के बाहर लोगों ने लगाया धरना, दी चेतावनी, देखें वीडियो

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Jalandhar News: पार्षद Neeraj Jassal के खिलाफ थाने के बाहर लोगों ने लगाया धरना, दी चेतावनी, देखें वीडियो
जालंधर (ENS): महानगर में शादी समारोह के दौरान हुए विवाद ने अब राजनीतिक और कानूनी तूल पकड़ लिया है। कांग्रेस के मौजूदा पार्षद नीरज जस्सल पर एक युवक के साथ मारपीट करने और पिस्टल की बट (पीछे का हिस्सा) मारकर उसे गंभीर रूप से घायल करने के आरोप लगे हैं। पुलिस द्वारा इस मामले में ‘हल्की धाराएं’ लगाने के विरोध में पीड़ित परिवार और उनके समर्थकों ने आज थाने के बाहर रोष प्रदर्शन किया। बता दें कि पीड़ित योगेश बिरदी और उनके परिवार के अनुसार, यह घटना पिछले महीने 7 मार्च की है। योगेश अपने भाई के साथ एक शादी समारोह में गए थे। वहां उनके चचेरे भाई (करन) का किसी के साथ विवाद हो रहा था। योगेश ने जब बीच-बचाव करने की कोशिश की, तभी वहां कांग्रेस पार्षद नीरज जस्सल पहुंचे। आरोप है कि पार्षद नशे की हालत में थे और उन्होंने योगेश के साथ गाली-गलौज शुरू कर दी। विवाद बढ़ने पर पार्षद ने अपनी जेब से पिस्टल निकाली और योगेश के सिर पर वार कर दिया। हमले में योगेश के सिर पर गंभीर चोटें आईं और उन्हें अस्पताल में 7 टांके लगे।

पुलिस पर ‘ढीली कार्रवाई’ और राजनीतिक दबाव के आरोप

पीड़ित पक्ष ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि प्रशासन पूरी तरह से राजनीतिक दबाव में काम कर रहा है। उनका सबसे मुख्य ऐतराज एफआईआर दर्ज करने में हुई अत्यधिक देरी को लेकर है, क्योंकि 7 मार्च की घटना के बावजूद पुलिस ने करीब 24 दिन बाद 31 मार्च को मामला दर्ज किया। समर्थकों का तर्क है कि पुलिस ने जानबूझकर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 118, 109 और 351 जैसी हल्की धाराएं लगाई हैं, जबकि आरोपी ने पिस्टल का इस्तेमाल किया था, जिसके आधार पर आर्म्स एक्ट की धाराएं जुड़नी चाहिए थीं। इसके अलावा, पीड़ित परिवार इस बात से भी आहत है कि आरोपी पार्षद सरेआम घूम रहा है और पुलिस उसे गिरफ्तार करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रही है। इस पूरे विवाद पर थाना डिवीजन नंबर 1 के एसएचओ (SHO) राकेश कुमार ने प्रदर्शनकारियों से मिलकर अपना पक्ष रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्षद नीरज जस्सल के खिलाफ एफआईआर नंबर 103 पहले ही दर्ज की जा चुकी है और वर्तमान में जो भी धाराएं लगाई गई हैं, वे मेडिकल रिपोर्ट (MLR) और शुरुआती बयानों के आधार पर तय की गई हैं। एसएचओ ने यह भी बताया कि घटनास्थल पर फिलहाल कोई सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं हो पाई है, इसलिए जांच पूरी तरह से गवाहों और उपलब्ध सबूतों पर निर्भर है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जैसे-जैसे तफ्तीश आगे बढ़ेगी और नए तथ्य सामने आएंगे, कानून के मुताबिक धाराओं में आवश्यक बदलाव किए जा सकते हैं। जिला प्रधान सलविंदर कुमार और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने पुलिस प्रशासन को दो-टूक चेतावनी देते हुए अपनी मांगें दोहराई हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि यदि आरोपी के खिलाफ तुरंत आर्म्स एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई नहीं की गई और उसकी गिरफ्तारी सुनिश्चित नहीं हुई, तो वे अपने संघर्ष को और अधिक उग्र करेंगे। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कमिश्नर (CP) को भी एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें न्याय की गुहार लगाते हुए दोषी पार्षद पर कड़ी कानूनी नकेल कसने की मांग की गई है।    

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