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Punjab News: माइनिंग को लेकर ठेकेदार ने लगाए गंभीर आरोप, देखें वीडियो

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Punjab News: माइनिंग को लेकर ठेकेदार ने लगाए गंभीर आरोप, देखें वीडियो

लुधियाना: गांव बूंट में स्थित सरकारी खड्ड का मामला लगातार गरमाता जा रहा है। इस मामले में पहले जहां समस्त ग्राम पंचायतों के सरपंच जिसमें गांव चूहरवाल, सुजातवाल, मांगट, सत्तोवाल, ढेरी, साधु सिंह नगर, सीड़ा, बाजड़ा, अनेक कॉलोनी, मेहरबान आदि की ओर से मिलकर नवयुग कंपनी की और से नाजायज माइनिंग के आरोप लगा डीसी को मांगपत्र सौंपा था। वहीं अब इस मामले में खड्ड के ठेकेदार व ट्रक-टिप्पर यूनियन के सदस्यों ने सामने आकर अपना पक्ष रखा है। उनका आरोप है कि पहले कई गांवों की पंचायतों द्वारा उनसे रिश्वत ली जाती थी।

अब रिश्वत बढ़ाने पर उन्होंने देनी बंद कर दी, जिसके चलते अब झूठी शिकायतें देकर खड्ड बंद करवाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिकायतें देने वाले लोगों में कुछ शरारती तत्व शामिल है और उन पर दर्जनों पर्चे दर्ज है। उनकी और से जानबूझकर अपना कारोबार दोबारा चलाने के लिए शिकायतें की जा रही है। उनकी और से भोले भाले गांव वासियों को भी झांसे में फंसा रखा है। इस संबंधी खड्ड के ठेकेदार व यूनियनों द्वारा झूठी शिकायतें देने वाले शरारती तत्वों के खिलाफ प्रशासन को शिकायत भी दी है।

गांव बूंट की सरकारी खड्ड चला रहे लखवीर सिंह ने बताया कि इस मामले में खुद पहले अवैध माइनिंग कर रहे जसविंदर सिंह जस्सा द्वारा जानबूझकर झूठी शिकयतें देकर आरोप लगाए जा रहे हैं। जबकि पहले वे अपने कई साथियों के साथ गांव जमालपुर लेली और कासाबाद में अवैध माइनिंग करता रहा। उसके खिलाफ कई पर्चे दर्ज है। जबकि उसके कई वाहन कब्जे में हैं। अवैध कार्यें करने के चलते सरकार ने उसकी अवैध माइनिंग बंद कर दी। जिसके बाद अब वह सरकारी खड्ड के खिलाफ झूठी साजिशें रच रहा है, ताकि वे बंद हो जाए और उसका काम चल पड़े। उसने गांव वासियों को झूठ बोलकर अपने पीछे लगा रखा है।

वहीं टिप्पर यूनियन के वाइस प्रेजिडेंट हरिंदरजीत सिंह ने कहा कि रोपड़ के बाद लुधियाना की खड्ड सरकारी चल रही है। जहां से पूरे पंजाब को सप्लाई होती है। जिससे सैकड़ों लोगों का रोजगार चल रहा है। गांव मांगट के सरबजीत सिंह ने कहा कि आरोप लगाने वाले सभी पंचायतों के मेंबरों द्वारा रोजाना फ्री 2 से 3 ट्राली रेत ली जाती है। जिसे वह आगे बेचते भी है। लेकिन अब वे ज्यादा बंगार डाल रहे थे। जिसे पूरा नहीं किया। वहीं पंचायतों द्वारा प्रति टिप्पर पहले 100 रुपए रिश्वत और अब 500 ली जाती है। जिसे बंद कर दिया। रिश्वत न देने के चलते वह झूठे आरोप लगाने लग गए हैं।

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