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Punjab News: अवैध कॉल सेंटर पर पुलिस की Raid, 1 करोड़ की नगदी सहित 132 गिरफ्तार, देखें वीडियो

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Punjab News: अवैध कॉल सेंटर पर पुलिस की Raid, 1 करोड़ की नगदी सहित 132 गिरफ्तार, देखें वीडियो

98 लैपटॉप, 229 मोबाइल, 19 वाहन सहित बैंक खाते सील

लुधियानाः पुलिस ने इंटरनेशनल साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने 100 से अधिक ठगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस कमिशनर स्वप्न शर्मा ने प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि विदेशी नागरिकों को ऑनलाइन धोखाधड़ी और वित्तीय घोटालों के माध्यम से निशाना बनाकर साइबर धोखाधड़ी करने वाले गिरोह के खिलाफ कार्रवाई की गई। इस दौरान संधू टावर और आर्क मॉल के पास एक अन्य बिल्डिंग में छापेमारी की गई। इस अभियान में विभिन्न अवैध कॉल सेंटरों से कुल 132 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। काबूू किए गए दोषियों के कब्जे से 1 करोड़ 7 लाख रुपये की भारतीय करंसी, 98 लैपटॉप, 229 मोबाइल, विभिन्न ब्रांडों और मॉडलों के 19 वाहन बरामद किए गए। मास्टरमाइंड दिल्ली, गुजरात के रहने वाले हैं। आरोपियों ने बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए तकनीकी सेवा प्रोवाइडर के रूप में खुद को पेश करते थे। इन्होंने विदेशियों को पैसों के लिए धोखा दिया है। इसमें इस्तेमाल किए गए सभी मोबाइल फोन भी पुलिस ने जब्त कर लिए है। गिरफ्तार किए गिरोह के सदस्य देश के अलग-अलग राज्यों से संबंधित है। पता चला है कि मास्टमाइंड गरीब परिवारों से संबंध रखने वाले लड़के-लड़कियों को जल्द अमीर बनने के सपने दिखा इस काम में लगाया है। जांच में सामने आया है कि कुछ आरोपी 10वीं पास है और कुछ ग्रेजुएट है। पुलिस ने जांच के बाद कई बैंक खातों को सील कर दिया है। आरोपियों ने किराए पर दफ्तर लिया है। वहीं दफ्तर के मालिक की अगर भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जांच में सामने आया है कि दोषियों ने मुख्य दफ्तर यहां खोला हुआ था और दोषियों का सिडिंकेट यूरोप और नार्थ अमेरिका में तार जुड़े हुए है। आरोपियों की एक टीम में 7 से 8 मेंबर शामिल होते है। आरोपियों ने हैकर्स तैयार किए हुए है। उदाहरण के तौर फोन में वायरस अलर्ट जैसे विज्ञापन के मैसेज को गूगल में विदेश बैठे लोग शामिल करते है। ऐसे में जब उक्त मैसेज को क्लिक करते है तो फोन में स्क्रीन चलनी बंद हो जाएगी या स्क्रीन पर कुछ ओर चलने लग जाता है। जिसके बाद वह इस तरह के सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करके लोगों को ठगी का शिकार बनाते है। सीपी शर्मा के मुताबिक जांच में सामने आया कि आरोपी विदेशी लोगों के कंप्यूटर स्क्रीन पर Microsoft कंपनी के नाम से फर्जी वायरस और सिक्योरिटी अलर्ट भेजते थे। स्क्रीन पर एक फेक कस्टमर केयर नंबर भी दिखाया जाता था। जैसे ही पीड़ित उस नंबर पर कॉल करता, कॉल X-Lite Software के जरिए सीधे ठगों तक पहुंच जाती। इसके बाद आरोपी खुद को टेक्निकल सपोर्ट कर्मचारी बताकर पीड़ित को UltraViewer जैसे Remote Access Software डाउनलोड करवाते थे। इसके जरिए आरोपी पीड़ित के कंप्यूटर का पूरा एक्सेस हासिल कर लेते थे। बाद में नकली स्कैन और फर्जी पॉप-अप दिखाकर बैंक अकाउंट, ईमेल हैक होने या चाइल्ड पोर्नोग्राफी जैसे झूठे आरोप लगाकर डराया जाता था। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि हर ऑपरेटर रोजाना औसतन 8 से 10 कॉल संभालता था। कर्मचारियों को फिक्स सैलरी के साथ इंसेंटिव भी दिया जाता था। फिलहाल पुलिस डिजिटल एविडेंस, हवाला लिंक, क्रिप्टो ट्रांजैक्शन, प्रॉपर्टी मालिकों और अन्य सहयोगियों की भूमिका की जांच कर रही है। पुलिस कमिश्नरेट शर्मा ने कहा कि साइबर अपराधियों और संगठित फ्रॉड नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।      

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