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  • Jalandhar News: ट्रेन की चपेट में आने से पत्रकार की मौत, देखें Live

    Jalandhar News: ट्रेन की चपेट में आने से पत्रकार की मौत, देखें Live

    जालंधर, ENS: सोढल फाटक में ट्रेन की चपेट में आने से व्यक्ति की मौत हो गई। मिली जानकारी के अनुसार मृतक पत्रकार है। मृतक की पहचान 33 वर्षीय शिव भल्ला निवासी किशनपुरा के रूप में हुई है। परिजनों ने बताया कि मृतक अभी कुंवारा था। घटना की सूचना जीआरपी पुलिस को दे दी गई गई है। दरअसल, जम्मूतवी ट्रेन की चपेट में आने से व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई। जिसके बाद लोको पायलट द्वारा ट्रेन फाटक पर रोक दी गई और जीआरपी पुलिस को घटना संबंधी सूचित कर दिया गया।

    मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर सिविल अस्पताल की मोर्चरी के लिए भेज दिया है और घटना की सूचना मृतक के परिजनों को दे दी गई है। वहीं पुलिस ने द्वारा मामले को लेकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पुलिस का कहना है कि उन्हें ट्रेन की चपेट में व्यक्ति के आने की सूचना मिली थी। जिसके बाद मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

    मामले की जानकारी देते हुए चश्मदीद डिंपल ने बताया कि ट्रेन आने के दौरान फाटक बंद था। इस दौरान मृतक बाइरक पर आया और बंद फाटक होने के कारण बाइक साइड पर खड़ी कर दी। इस दौरान जब ट्रेन आने लगी तो वह रेलवे लाइनों पर आकर लेट गया और फोन फेंक दिया। जिसके बाद वह ट्रेन की चपेट में आ गया। इस घटना में उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

    वहीं घटना की सूचना मिलते मृतक के भाई सौरव बेरी ने बताया वह उसके साथ बैठा था। जिसके बाद वह घर खाना खाने के लिए गया और आज भाई का फोन आया तो वह कहने लगा उसे कुछ हो जाना है। सौरव ने कहा कि वह खाना खाने गया तो अचानक फोन आया कि शिव ट्रेन की चपेट में आ गया। परिजनों का कहना है कि उसे घर की ओर से कोई परेशानी नहीं थी। वहीं अन्य परिजनों ने कहा कि उन्हें लगा कि शिव गौंशाला गया हुआ है, लेकिन घर में किसी को नहीं पता था कि आज इस दुखद घटना की सूचना मिलेंगी।

  • Jalandhar News: खत्म हुआ किसानों का धरना, ज्वाइंट कमिश्नर का आया बयान, देखें वीडियो

    Jalandhar News: खत्म हुआ किसानों का धरना, ज्वाइंट कमिश्नर का आया बयान, देखें वीडियो

    जालंधर, ENS: जमशेर खास में लग रहे बायो-गैस/बायो-फ्यूल प्लांट के विरोध में किसान यूनियन सिद्धू ने पहले 1 जनवरी को अमृतसर-दिल्ली हाईवे जाम करने की कॉल दी थी। लेकिन पुलिस ने किसानों को रास्ते में रोक लिया। इस दौरान पुलिस ने किासनों की गाड़ियां रोक ली। जिसके बाद किसान कैंट काउंटी के सामने सोफी पिंड के बाहर प्रदर्शन करने के लिए बैठ गए थे। किसानों के प्रदर्शन के दौरान उनकी पुलिस के साथ तीखी नोकझोंक भी हुई थी। एसपी-2 हरविंदर सिंह गिल ने किसानों द्वारा लगाए आरोपों को बेबुनियाद बताया।

    वहीं मामला गरमाने के बाद नगर निगम की ज्वाइंट कमिश्नर मंदीप कौर मौके पर पहुंची। जहां ज्वाइंट कमिशनर ने किसानों के साथ मुलाकात करके धरना समाप्त करवाया गया। ज्वाइंट कमिशनर ने कहा कि 5 तारीख को डीसी दफ्तर में मीटिंग रखी गई है। इस मीटिंग ने डिप्टी कमिशनर हिमांशु अग्रवाल, पुलिस कमिश्नर धनप्रीत कौर मौजूद रहेंगे। ज्वाइंट कमिश्नर ने कहा कि बायो-गैस/बायो-फ्यूल प्लांट को यहां से शिफ्ट किया जाएंगा। ऐसे में इस प्लांट को किस जगह शिफ्ट किया जाएगा, इस पर 5 तारीख को रखी गई मीटिंग में विचार विमर्श किया जाएगा।

    वहीं प्लांट लगाने की जरूरत है या नहीं इस पर भी विचार किया जाएगा। मनदीप कौर ने कहा कि किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल की रिहाई की जो मांग की जा रही है, उन्हें रिलीज कर दिया गया है। चारे वाली ट्राली को लेकर आज शाम या कल सुबह तक हल हो जाएगा। जिसके बाद चारे की ट्राली कल से चालू हो जाएंगी। इस दौरान उन्होंने कहा कि 5 तारीख को प्लांट को लेकर हल निकाल लिया जाएगा। उन्होंने किसानों से अपील की है कि वह भी शांतिमय ढंग से मीटिंग में विचार विमर्श किया जाए। ज्वाइंट कमिशनर के आश्वासन के बाद किसानों ने धरना समाप्त कर दिया।

  • Jalandhar News: Airport के नाम बदलने को छिड़ी क्रेडिट वार, MLA ने केंद्र पर साधे निशाने, देखें वीडियो

    Jalandhar News: Airport के नाम बदलने को छिड़ी क्रेडिट वार, MLA ने केंद्र पर साधे निशाने, देखें वीडियो

    नवजोत कौर सिद्धू के इस्तीफे पर उठाए सवाल

    जालंधर, ENS: देश के प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी के जालंधर दौरे के दौरान एयरपोर्ट का नाम बदलने लेकर आदमपुर के विधायक सुखविंदर कोटली ने निशाने साधे। विधायक का कहना है कि श्री गुरु रविदास महाराज के दौरान डेरा सचखंड बल्ला में नतमस्त हुए वह अच्छी बात है। वहीं आदमपुर एयरपोर्ट का नाम बदलने को लेकर क्रेडिट वार छिड़ गया है। विधायक ने कहा कि आदमपुर एयरपोर्ट का नाम बदलने का प्रस्ताव कांग्रेस ने रखा था और इसे विधानसभा में 2017 में पास करवाकर केंद्र को भेजा हुआ था। इस मामले को लेकर वह खुद 4 सासंद के साथ केंद्रिय मंत्री ज्योतिराज सिंधिया से मिले थे और उन्होंने इसे पास किया था। उन्होंने कहा कि अब चुनाव को लेकर एयरपोर्ट के नाम का बदलाव किया गया। विधायक ने कहाकि कांग्रेस की ओर से पास होने के बाद 8 साल का इतंजार क्यों करना पड़ा। उन्होंने कहा कि इस मामले में उसी समय गुरु महाराज के बोर्ड लग जाने चाहिए थे, लेकिन क्यों नहीं लगाए गए, यह बड़ा सवाल है। इस मामले को लेकर विधायक ने कहा कि कांग्रेस द्वारा एयरपोर्ट का नाम रखा गया था, लेकिन केंद्र इस मामले में क्रेडिट ले रही है। केंद्र पर निशाना साधते हुए कहा कि किसान भी केंद्र से परेशान चल रहे है। इस दौरान बजट को लेकर कहा कि पंजाब को इस बजट में भी कुछ नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री जालंधर दौरे पर थे। ऐसे में लोगों को उनके आने के दौरान बजट पर काफी आस थी। उन्होंने कहा कि देश के पीएम कल दलितों के लिए 10, 20 या 50 हजार करोड़ का ऐलान कर देते, जिससे दलितों की जिंदगी में सुधार होता। उन्होंने कहा कि एजुकेशन के लिए ऐलान कर देते या कोई यूनिवर्सिटी को लेकर ऐलान कर देते, लेकिन ऐसा कुछ नहीं किया। उन्होंने कहा कि वह आदमपुर हलके के विधायक है, लेकिन पीएम मोदी के दौरे को लेकर उन्हें किसी ने भी आमत्रण नहीं भेजा। हालांकि उन्होंने पीएम मोदी से मिलने के लिए चिट्ठी भी लिखी थी, लेकिन उसके बावजूद उनसे मिलने का समय नहीं मिला। उन्होंने कहा कि अगर उनकी सुनवाई नहीं होगी तो मसले कहां वह हल करवाएंगे। वहीं नवजोत कौर सिद्धू के इस्तीफे को लेकर कहा कि अगर उन्हें पार्टी से विवाद था तो वह पार्टी के समक्ष मुद्दा रख सकते थे, लेकिन अगर पार्टी को छोड़कर वह दोबारा भाजपा में जाना चाहते है तो ठीक है, लेकिन इस्तीफे के बाद पार्टी के खिलाफ बोलना गलत है।
  • प्रधानमंत्री के फैसले से संत रविदास के अनुयायियों में खुशी: CM Nayab Saini

    प्रधानमंत्री के फैसले से संत रविदास के अनुयायियों में खुशी: CM Nayab Saini

    चंडीगढ़: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पंजाब के आदमपुर एयरपोर्ट का नामकरण संत शिरोमणि गुरू रविदास जी के नाम से किए जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह ऐतिहासिक फैसला लिया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सोमवार को नई दिल्ली स्थित हरियाणा भवन में मीडिया से बातचीत कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह हमारे लिए बड़े गर्व का विषय है कि संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की जयंती के पावन अवसर पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने आदमपुर एयरपोर्ट को श्री गुरु रविदास महाराज जी एयरपोर्ट का नाम दिया। यह नामकरण श्री गुरु रविदास महाराज जी के अमर आदर्शों को सच्ची श्रद्धांजलि है। उनके द्वारा दिए गए समता, करुणा और सेवा के मूल्य आज भी समाज को प्रेरित करते हैं और हमें एक समरस, न्यायपूर्ण तथा मानवीय समाज के निर्माण की दिशा में मार्गदर्शन देते हैं। यह पहल उनके महान विचारों को सम्मान देने के साथ-साथ भावी पीढ़ियों को भी उनके संदेश से प्रेरणा लेने का अवसर प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि यह पहल यह भी दर्शाती है कि हमारा राष्ट्र उन महापुरुषों को निरंतर स्मरण करता है जिन्होंने समाज को दिशा देने का कार्य किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी निरंतर देश के बड़े संस्थानों का नाम संत-महापुरुषों के नाम से कर रहे हैं, जो संत-महापुरुषों को सच्ची श्रद्धांजलि है। पिछले दिनों अयोध्या एयरपोर्ट का नाम भी महर्षि वाल्मीकि के नाम से रखा गया था। इसी तरह से हिसार एयरपोर्ट का नाम महाराजा अग्रसेन के नाम से रखा गया है।

    समाज के हर वर्ग को ध्यान में रखकर पेश किया गया बजट

    इस बार का आम बजट समाज के हर वर्ग को ध्यान में रखकर पेश किया गया है। इस बजट में हरियाणा को विशेष स्थान दिया गया है। बजट में सेम की समस्या से ग्रसित जमीन की बात की गई, एमएसएमई, इंडस्ट्री और एआई को विशेष स्थान दिया गया, जिसका लाभ सीधे हरियाणा को मिलेगा। कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार 55 साल सत्ता में रही लेकिन ऐसा बजट पेश नहीं कर पाई। यह बजट महिलाओं को सशक्त करने वाला है। यह युवाओं को रोजगार देने वाला है। यह किसानों को मजबूत करने वाला बजट है। किसान, युवा, महिला और गरीब सहित 140 करोड़ देशवासियों की आकांक्षाओं को पूरा करने वाला है।

    पंजाब में भाजपा की सरकार बनेगी

    पंजाब से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि पंजाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनेगी। वहां के लोगों ने मन बना लिया है कि पंजाब को यदि आगे बढ़ाना है तो भाजपा की सरकार बनानी पड़ेगी। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की सरकार ने लोगों को सिर्फ सब्ज-बाग दिखाए। पंजाब में पिछले दिनों बाढ़ आई, किसानों की फसल खराब हुई। वहां के मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने किसानों को 20 हजार रुपये एकड़ मुआवजा दिया और उनकी पार्टी के मुखिया गुजरात जाकर कह रहे हैं कि हमने किसानों को 50 हजार रुपये मुआवजा दिया। वह सिर्फ लोगों को बेवकूफ बनाने का काम कर रहे हैं। किसानों का नुकसान हो गया और वह सिर्फ राजनीतिक रोटियां सेकने का काम कर रहे हैं। पंजाब के किसानों की समस्या को समझा और 16 हजार करोड़ रुपये देने का काम किया।
  • 16वें वित्त आयोग से हिमाचल को हर वर्ष 10 हजार करोड़ का नुकसान : उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री

    16वें वित्त आयोग से हिमाचल को हर वर्ष 10 हजार करोड़ का नुकसान : उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री

    ‘जीएसटी पहले से नुकसानदेह, अब आरडीजी समाप्त कर केंद्र ने दिया दोहरा आघात…यह स्वीकार्य नहीं’
    ऊना/शिमला/सुशील पंडित:उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट और 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि इन फैसलों के चलते हिमाचल प्रदेश को हर वर्ष लगभग 10 हजार करोड़ रुपये का सीधा वित्तीय नुकसान उठाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यह कोई अस्थायी घाटा नहीं, बल्कि प्रदेश की वित्तीय संरचना को कमजोर करने वाला दीर्घकालिक संकट है, जो हिमाचल के लिए किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।
    उप मुख्यमंत्री ने कहा कि जीएसटी व्यवस्था पहले ही हिमाचल जैसे पर्वतीय और सीमित राजस्व संसाधनों वाले राज्यों के लिए नुकसानदेह सिद्ध हो चुकी है। जीएसटी क्षतिपूर्ति समाप्त होने से प्रदेश को पहले बड़ा आर्थिक झटका लगा और अब राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) को समाप्त कर केंद्र सरकार ने दूसरा गंभीर आघात दिया है। उन्होंने दो टूक कहा कि यह निर्णय स्वीकार्य नहीं है।
    उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश का कुल बजट लगभग 58 हजार करोड़ रुपये का है, जिसमें राजस्व व्यय का बड़ा हिस्सा वेतन, पेंशन और अन्य अनिवार्य मदों पर खर्च हो जाता है। ऐसे में केंद्रीय सहायता में किसी भी प्रकार की कटौती का सीधा असर प्रदेश के विकास कार्यों और जनकल्याण योजनाओं पर पड़ना स्वाभाविक है।
    उप मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में हिमाचल प्रदेश को लगभग 38 हजार करोड़ रुपये आरडीजी के रूप में प्राप्त हुए थे। वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए यह स्वाभाविक अपेक्षा थी कि यह सहायता बढ़कर 50 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचेगी, लेकिन इसके विपरीत आरडीजी को ही समाप्त कर दिया गया, जिससे प्रदेश के सामने गंभीर वित्तीय चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।
    श्री अग्निहोत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के गठन के समय ही यह स्पष्ट था कि विशेष भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यह राज्य आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर नहीं हो सकता। प्रदेश का गठन यहां के लोगों की राजनीतिक आकांक्षाओं और दुर्गम भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए किया गया था। उसी समय राष्ट्रीय स्तर पर यह सहमति बनी थी कि केंद्र सरकार हिमाचल को विशेष वित्तीय सहायता प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि केंद्र पर निर्भरता कोई कमजोरी नहीं, बल्कि संवैधानिक दायित्व का हिस्सा है।
    उप मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1952 से लेकर अब तक केंद्र सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश को विशेष वित्तीय सहायता देने की परंपरा रही है। राजस्व घाटा अनुदान उसी परंपरा का संस्थागत स्वरूप था। इसे समाप्त करना प्रदेश के साथ नीतिगत अन्याय है।
    श्री अग्निहोत्री ने कहा कि यह निर्णय संघीय ढांचे की भावना के भी विरुद्ध है। बड़े राज्यों के पास पर्याप्त संसाधन और राजस्व के साधन उपलब्ध हैं, जबकि आरडीजी समाप्त होने से पर्वतीय राज्यों, उत्तर-पूर्वी राज्यों और विशेष परिस्थितियों वाले प्रदेशों को सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
    उप मुख्यमंत्री ने भारतीय जनता पार्टी के सातों सांसदों तथा नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से सवाल किया कि वे इस मुद्दे पर स्पष्ट करें कि वे केंद्र के फैसलों के साथ हैं या हिमाचल प्रदेश के साथ। उन्होंने कहा कि 10 हजार करोड़ रुपये के वार्षिक नुकसान जैसे गंभीर विषय पर मौन रहना प्रदेश के हितों से सीधा समझौता है, जिसे प्रदेश की जनता माफ नहीं करेगी।
       
  • केंद्रीय नीतियों से हिमाचल प्रदेश को दोहरा झटका, Deputy CM ने जताई नाराजगी

    केंद्रीय नीतियों से हिमाचल प्रदेश को दोहरा झटका, Deputy CM ने जताई नाराजगी

    शिमला: उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट और 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि इन फैसलों के चलते हिमाचल को हर साल लगभग 10 हजार करोड़ रुपये का सीधा वित्तीय नुकसान उठाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यह कोई अस्थायी घाटा नहीं, बल्कि प्रदेश की वित्तीय संरचना को कमजोर करने वाला दीर्घकालिक संकट है, जो हिमाचल के लिए किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।

    उप-मुख्यमंत्री ने कहा कि जीएसटी व्यवस्था पहले ही हिमाचल जैसे पर्वतीय और सीमित राजस्व संसाधनों वाले राज्यों के लिए नुकसानदेह सिद्ध हो चुकी है। जीएसटी क्षतिपूर्ति समाप्त होने से प्रदेश को पहले बड़ा आर्थिक झटका लगा और अब राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) को समाप्त कर केंद्र सरकार ने दूसरा गंभीर आघात दिया है। उन्होंने दो टूक कहा कि यह निर्णय स्वीकार्य नहीं है।

    हिमाचल प्रदेश का कुल बजट लगभग 58 हजार करोड़ रुपये का है, जिसमें राजस्व व्यय का बड़ा हिस्सा वेतन, पेंशन और अन्य अनिवार्य मदों पर खर्च हो जाता है। ऐसे में केंद्रीय सहायता में किसी भी प्रकार की कटौती का सीधा असर प्रदेश के विकास कार्यों और जन कल्याण योजनाओं पर पड़ना स्वाभाविक है।

    पिछले पांच वर्षों में हिमाचल प्रदेश को लगभग 38 हजार करोड़ रुपये आरडीजी के रूप में प्राप्त हुए थे। वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए यह स्वाभाविक अपेक्षा थी कि यह सहायता बढ़कर 50 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचेगी, लेकिन इसके विपरीत आरडीजी को ही समाप्त कर दिया गया, जिससे प्रदेश के सामने गंभीर वित्तीय चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।

    हिमाचल के गठन के समय ही यह साफ था कि विशेष भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यह राज्य आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर नहीं हो सकता। प्रदेश का गठन यहां के लोगों की राजनीतिक आकांक्षाओं और दुर्गम भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए किया गया था। उसी समय राष्ट्रीय स्तर पर यह सहमति बनी थी कि केंद्र सरकार हिमाचल को विशेष वित्तीय सहायता प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि केंद्र पर निर्भरता कोई कमजोरी नहीं, बल्कि संवैधानिक दायित्व का हिस्सा है।

    वर्ष 1952 से लेकर अब तक केंद्र सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश को विशेष वित्तीय सहायता देने की परंपरा रही है। राजस्व घाटा अनुदान उसी परंपरा का संस्थागत स्वरूप था। इसे समाप्त करना प्रदेश के साथ नीतिगत अन्याय है। यह निर्णय संघीय ढांचे की भावना के भी विरुद्ध है। बड़े राज्यों के पास पर्याप्त संसाधन और राजस्व के साधन उपलब्ध हैं, जबकि आरडीजी समाप्त होने से पर्वतीय राज्यों, उत्तर-पूर्वी राज्यों और विशेष परिस्थितियों वाले प्रदेशों को सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

    उप-मुख्यमंत्री ने भारतीय जनता पार्टी के सातों सांसदों तथा नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से सवाल किया कि वे इस मुद्दे पर स्पष्ट करें कि वे केंद्र के फैसलों के साथ हैं या हिमाचल प्रदेश के साथ। 10 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के वार्षिक नुकसान जैसे गंभीर विषय पर मौन रहना प्रदेश के हितों से सीधा समझौता है, जिसे प्रदेश की जनता माफ नहीं करेगी।

  • Punjab News: गोलियां मारकर व्यक्ति का कत्ल, आरोपी गिरफ्तार, SSP ने किया खुलासा, देखें वीडियो

    Punjab News: गोलियां मारकर व्यक्ति का कत्ल, आरोपी गिरफ्तार, SSP ने किया खुलासा, देखें वीडियो

    मोहालीः जिले के ढकोली के किशनपुरा इलाके में हमलावारों द्वारा गोलियां मारकर व्यक्ति का कत्ल कर दिया। इस घटना में एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुआ, जिसका अस्पताल में उपचार चल रहा है। इस मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। मामले की जानकारी देते हुए मोहाली के एसएसएपी हरमनदीप सिंह हंस ने बताया कि गोलीबारी में 24 वर्षीय युवक प्रिंस की मौत हो गई।

    वहीं 42 वर्षीय भरत भूषण को का मोहाली के फोर्टिस अस्पताल में चल रहा है। एसएसपी ने बताया कि इस घटना को लेकर शहर में नाकबंदी करके कुछ ही घंटो में पुलिस ने 40 वर्षीय कुलदीप सिंह नामक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी ढकोली के राधे होम्स सोसाइटी में रहता है।

    जानकारी अनुसार रोड पर गाड़ी ओवरटेक करने को लेकर विवाद हुआ जिसके बाद कुलदीप सिंह ने अपने साथियों को बुला गोलीबारी शुरू कर दी गई। गोलीबारी के कारणों की पुलिस द्वारा बारीकी से जांच की जा रही है। एसएसपी ने कहा कि घायल व्यक्ति के बयानों पर आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए इस मामले को 4 घंटों में सुलझा लिया गया और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी के कब्जे से .32 बोर और खाली खोल बरामद किया है।

     

  • पर्यटन को बढ़ावा, होम-स्टे प्रोविजनल पंजीकरण पर सीएम Sukhu ने दिए निर्देश

    पर्यटन को बढ़ावा, होम-स्टे प्रोविजनल पंजीकरण पर सीएम Sukhu ने दिए निर्देश

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज यहां होम-स्टे पोर्टल http://homestay.hp.gov.in का शुभारम्भ किया। इस पोर्टल के जरिए से अब घर बैठे ही होम-स्टे का पंजीकरण किया जा सकेगा। पोर्टल पर पंजीकरण की प्रक्रिया को अत्यन्त सरल एवं उपयोगकर्ता अनुकूल बनाया गया है।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार होम-स्टे संचालकों और होटल मालिकों को अधिक से अधिक सुविधाएं प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयासरत है, ताकि उनके व्यवसाय पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। ऑब्जेक्शन के नाम पर होटल कारोबारियों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए।

    हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री को प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए एक अहम कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि फायर अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) के कारण होम-स्टे के पंजीकरण के रिन्यूअल को रोका नहीं जाना चाहिए। पर्यटन विभाग को ऐसे होटलों को प्रोविजनल पंजीकरण प्रदान करने को कहा, ताकि उनका व्यवसाय सुचारू रूप से संचालित होता रहे।

    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश में पर्यटन की अपार संभावनाओं के दृष्टिगत ‘पर्यटन से स्वरोजगार’ अर्जित करने के लिए होम-स्टे योजना आरम्भ की गई है। उन्होंने कहा कि होम-स्टे योजना का उद्देश्य ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देना तथा पर्यटकों को अनछुए पर्यटन स्थलों की ओर आकर्षित करना है।

    प्रदेश के राजस्व में भी पर्यटन क्षेत्र का अधिक योगदान है इसलिए वर्तमान सरकार ने इस योजना का दायरा बढ़ा कर इसमें शहरी क्षेत्रों को भी शामिल किया है ताकि स्थानीय लोगों को स्वरोजगार के अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध हो सकें। योजना के अंतर्गत अधिकतम छह कमरे की सुविधा का होम-स्टे पंजीकृत किया जा सकता है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि होम-स्टे संचालन से पर्यटकों को बेहतरीन सुविधाएं मिलने के साथ-साथ मकान मालिकों को घर पर ही अच्छी कमाई प्राप्त होगी। स्थानीय व्यंजनों को पर्यटकों को परोसने से होम-स्टे मालिकों की कमाई और भी बढ़ेगी क्योंकि पर्यटक स्थानीय व्यंजनों को काफी पंसद करते हैं तथा उन्हें घर जैसा अनुभव होता है। गांव में बने पुरातन शैली के घर पर्यटकों खासकर विदेशी पर्यटकों को काफी आकर्षित करते हैं।

    उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने होम-स्टे योजना के तहत ब्याज अनुदान योजना शुरू की है ताकि अधिक से अधिक लोग इस योजना का लाभ उठाकर अपनी आय के साधन भी बढ़ा सके। इस योजना में होम-स्टे संचालन के लिए शहरी, ग्रामीण व जनजातीय क्षेत्र में ब्याज अनुदान राशि क्रमशः 3, 4 व 5 प्रतिशत दी जा रही है। उन्होंने कहा कि यह ब्याज अनुदान, टर्म लोन पर पर्यटन इकाई बनाने अथवा विस्तार करने या अपग्रेड करने के लिए प्रदान किया जाता है।

    बैठक में हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष आर.एस.बाली वर्चुअल माध्यम से जबकि मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार मीडिया नरेश चौहान, प्रधान सचिव देवेश कुमार तथा निदेशक पर्यटन विभाग विवेक भाटिया शिमला में उपस्थित थे।

  • Punjab News: विवादों में घिरा सिमरनजीत सिंह का दोहता, श्री अकाल तख्त साहिब पेश हुए गोविंद संधू

    Punjab News: विवादों में घिरा सिमरनजीत सिंह का दोहता, श्री अकाल तख्त साहिब पेश हुए गोविंद संधू

    अमृतसरः पंजाब के पूर्व सांसद और शिरोमणि अकाली दल अमृतसर के प्रधान सिमरनजीत सिंह के दोहते (नाती) गोविंद सिंह संधू विवादों में घिर गए। शिरोमणि अकाली दल (बादल) के नेता विरसा सिंह वल्टोहा ने गोविंद सिंह संधू की शादी के फोटो शेयर कर ऐतराज जताया है। उनका आरोप है कि संधू ने शादी के दौरान कुछ रस्मों में धर्मिक प्रतीकों जैसे चौर और छत्र साहिब का इस्तेमाल किया, जो सिख मर्यादा के खिलाफ है।

    इस मामले के बाद आज गोविंद सिंह संधू श्री अकाल तख्त साहिब पेश हुए। जहां उन्हेंने श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज को लिखित रूप में पत्र देकर माफी मांगी। गोविंद सिंह संधू ने कहा कि सिख मर्यादा का वह सम्मान करते है और ऐसे में अनजाने में हुई गलती के लिए वह सिख संगत से हाथ जोड़कर माफी मांगते है।

    बता दें कि हाल ही में गोविंद सिंह संधू की शादी न्यू चंडीगढ़ में एक निजी फार्म हाउस में सराह कौर ढिल्लों से हुई। यह शादी काफी हाई-प्रोफाइल रही। घटना से जुड़ा एक वीडियो भी वायरल हुआ, जिसमें मान की बेटी के बेटे संधू को चलते हुए दिखाया गया है। वीडियो में उनके सिर के ऊपर चौर (मोर पंख का पंखा) घुमाया जा रहा है। वहीं, एक अन्य व्यक्ति उनके ऊपर छत्र (राजसी छाता) पकड़े नजर आता है। पीछे ढोल और बाजों की आवाज सुनाई दे रही है। इसके अलावा, दो पगड़ीधारी सिख युवक भाले लेकर संधू के साथ चलते दिखाई दे रहे हैं।

    वीडियो सामने आने के बाद सिख समुदाय के एक वर्ग ने कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि चौर और छत्र सिख धर्म में खास महत्व रखते हैं। ये प्रतीक केवल श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की सेवा और सम्मान से जुड़े होते हैं। इसलिए किसी व्यक्ति के लिए इन प्रतीकों का उपयोग करना सिख भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है।

  • Punjab News: मजीठिया को जमानत मिलने पर घर के बाहर जुटे अकाली नेताओं में भारी उत्साह, देखें वीडियो

    Punjab News: मजीठिया को जमानत मिलने पर घर के बाहर जुटे अकाली नेताओं में भारी उत्साह, देखें वीडियो

    अमृतसरः शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को आज उस समय बड़ी कानूनी राहत मिली, जब माननीय सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें बेल मंजूर कर दी। अदालत के इस अहम फैसले के साथ मजीठिया के परिवारिक सदस्यों और पूरे अकाली दल में खुशी की लहर दौड़ गई। पार्टी कार्यकर्ताओं ने इस फैसले को सच्ची जीत करार दिया।

    सुप्रीम कोर्ट के फैसले की खबर मिलते ही बिक्रम मजीठिया की अमृतसर स्थिति आवास के बाहर समर्थक जुटने शुरू हो गए। जहां कार्यकर्ताओं द्वारा एक-दूसरे को मिठाइयां खिलाईं गई और “बोले सो निहाल” तथा “अकाली दल जिंदाबाद” के नारें लगाए गए। इस दौरान मजीठिया के घर के बाहर माहौल पूरी तरह जश्नमय बना रहा।

    इस मौके पर अकाली दल के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कहा कि उन्हें न्याय प्रणाली पर पूरा भरोसा था और आज का फैसला लोकतंत्र और कानून की बृद्धि को दर्शाता है। कार्यकर्ताओं का कहना था कि बिक्रम मजीठिया जल्द ही रिहाई के बाद समुदायों में शामिल होंगे और पार्टी को मजबूती मिलेगी।

    युवक वर्ग में भी इस फैसले को लेकर खास उत्साह देखा गया। अकाली दल के कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि मजीठिया की वापसी से पार्टी में नए जोश आएगा और युवा बढ़-चढ़ कर अकाली दल से जुड़ेंगे। कई स्थानों पर लड्डू बांट कर खुशी मनाई गई और आने वाले दिनों में बड़े स्वागत कार्यक्रमों की तैयारी भी शुरू हो गई है।