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  • नशे के विरूद्ध जागरूकता के लिए खेलो हिमाचल -चिट्टा मुक्त अभियान शुरूः मुख्यमंत्री

    नशे के विरूद्ध जागरूकता के लिए खेलो हिमाचल -चिट्टा मुक्त अभियान शुरूः मुख्यमंत्री

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने यहां मंगलवार सायं ‘खेलो हिमाचल -चिट्टा मुक्त अभियान‘ की बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि यह महत्त्वपूर्ण राज्यव्यापी पहल खेलों और युवाओं की भागीदारी के माध्यम से नशे की समस्या से निपटने के उद्देश्य से शुरू की जा रही है। उन्होंने अभियान की रणनीति और कार्ययोजना की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य युवाओं की ऊर्जा को रचनात्मक और स्वस्थ गतिविधियों की ओर मोड़ना तथा ‘चिट्टा’ जैसे मादक पदार्थों के खिलाफ एक सशक्त सामाजिक जन आंदोलन खड़ा करना है।

    मुख्यमंत्री ने चिट्टा और अन्य मादक पदार्थों की बढ़ती चुनौती पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि नशे की आदत न केवल युवाओं का भविष्य बर्बाद कर रही है, बल्कि परिवारों और पूरे समाज को भी प्रभावित कर रही है। राज्य सरकार नशे के कारोबार पर कड़ी कार्रवाई के साथ-साथ रोकथाम, जागरूकता और पुनर्वास जैसे उपायों को अपनाकर बहुआयामी रणनीति के तहत इस समस्या के समाधान के लिए कार्य कर रही है। सुक्खू ने कहा कि खेल सामाजिक परिवर्तन का एक सशक्त माध्यम बन सकते हैं। इससे युवाओं में अनुशासन, टीम भावना, आत्मविश्वास और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित होती है। ‘खेलो हिमाचलदृचिट्टा मुक्त अभियान’ के माध्यम से युवाओं को जमीनी स्तर पर खेल गतिविधियों से जोड़कर उन्हें नशे से दूर रहने का सकारात्मक विकल्प उपलब्ध करवाया जाएगा।

    राज्य की सभी 3,758 ग्राम पंचायतों, 8 नगर निगमों, 29 नगर परिषदों तथा 39 नगर पंचायतों में युवाओं को चिट्टे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया जाएगा। विशेष रूप से नशे से सर्वाधिक प्रभावित 235 ग्राम पंचायतों में गहन स्तर पर अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत विभिन्न खेल प्रतियोगिताएं, जागरूकता कार्यक्रम, सामुदायिक संपर्क अभियान और युवा सहभागिता गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। खेल प्रतियोगिताएं उप-मंडल, जिला और राज्य स्तर पर आयोजित की जाएंगी। इन प्रतियोगिताओं के सुचारू संचालन, निगरानी और पर्यवेक्षण के लिए खेल संघों, युवा सेवाएं एवं खेल विभाग, शिक्षा विभाग तथा पुलिस विभाग के रेफरी एवं अधिकारियों की तकनीकी समिति गठित की जाएगी। इन प्रतियोगिताओं के आयोजन के लिए 11.56 करोड़ रुपये का प्रावधान कर विजेता और उप-विजेता टीमों को पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी।

    राज्य सरकार एक स्वस्थ, अनुशासित और सशक्त युवा पीढ़ी के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है, जो हिमाचल प्रदेश को उज्ज्वल भविष्य की ओर ले जाने में सक्षम हो। उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे के चंगुल में फंसने से रोकने के लिए समय रहते हस्तक्षेप, व्यापक जनजागरूकता और समाज की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। सुक्खू ने कहा कि नशा-मुक्त हिमाचल का सपना तभी साकार हो सकता है जब सरकार, शैक्षणिक संस्थान, खेल संगठन, स्थानीय निकाय, पंचायती राज संस्थाएं तथा समाज मिलकर सामूहिक प्रयास करें। उन्होंने सभी संबंधित पक्षों से अभियान को सफल बनाने और इसे जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने में सक्रिय सहयोग देने का आह्वान किया। सचिव युवा सेवाएं एवं खेल प्रियंका बसु इंग्टी, निदेशक शिवम प्रताप सिंह, विशेष सचिव नवीन तन्वर तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी बैठक में उपस्थित थे।

     

  • अभिषेक जैन ने जल संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान किया

    अभिषेक जैन ने जल संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान किया

    शिमला: ‘जल संचय जन भागीदारीः कैच द रेन-2026’ अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा के लिए आज यहां राज्य स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में उपायुक्त, सह-जिला नोडल अधिकारी, जल शक्ति विभाग के प्रमुख अभियंता, मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रत्यक्ष एवं वर्चुअल माध्यम से भाग लिया।

    बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रधान सचिव (जल शक्ति) एवं अभियान के राज्य नोडल अधिकारी डॉ. अभिषेक जैन ने कहा कि जल संरक्षण को जन-आंदोलन का स्वरूप देना समय की आवश्यकता है। उन्होंने सभी उपायुक्तों को निर्देश दिए कि पंचायती राज संस्थाओं, शहरी स्थानीय निकायों, शैक्षणिक संस्थानों, स्वयं सहायता समूहों, महिला मंडलों, युवा क्लबों, गैर-सरकारी संगठनों तथा अन्य सामुदायिक संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित कर अभियान को वास्तविक अर्थ में जन भागीदारी का अभियान बनाया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि अभियान को वीबी-जी राम जी, जल जीवन मिशन, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, अमृत, कैम्पा, स्वच्छ भारत मिशन तथा राज्य एवं केंद्र प्रायोजित अन्य योजनाओं के साथ प्रभावी अभिसरण के माध्यम से लागू किया जाए ताकि जल संरक्षण गतिविधियों का अधिकतम लाभ सुनिश्चित किया जा सके।

    प्रधान सचिव ने कहा कि मौजूदा जल संरक्षण परिसंपत्तियों के संरक्षण, पुनर्स्थापन, पुनर्वास और अधिकतम उपयोग को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से पारंपरिक जल संरक्षण संरचनाओं जैसे बावड़ियों, खात्रियों, कुहलों, पोखरों तथा अन्य स्थानीय जल स्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन पर बल दिया। उन्होंने ग्राम पंचायतों एवं स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी से ग्रामीण स्तर पर आवश्यकता आधारित लघु जल संरक्षण एवं भूजल पुनर्भरण कार्यों की पहचान कर उन्हें शीघ्र क्रियान्वित करने के निर्देश भी दिए। साथ ही सभी कार्यों का समुचित दस्तावेजीकरण, जियो-टैगिंग तथा निर्धारित पोर्टल पर समयबद्ध अपलोड सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया ताकि पारदर्शी निगरानी एवं प्रभावी रिपोर्टिंग हो सके।

    दीर्घकालिक योजना के महत्व को रेखांकित करते हुए डॉ. अभिषेक जैन ने निर्देश दिए कि प्रत्येक जिले में वीबी-जी राम जी के अंतर्गत जल संरक्षण कार्यों की एक समर्पित शेल्फ तैयार की जाए, जिससे वर्षा जल संग्रहण एवं भूजल पुनर्भरण गतिविधियों को वार्षिक विकास योजनाओं का स्थायी हिस्सा बनाया जा सके। बैठक में 4 जुलाई से 4 अगस्त, 2026 तक चलाए जा रहे विशेष राष्ट्रव्यापी अभियान की प्रगति पर विस्तृत प्रस्तुति भी दी गई। इसमें जिला-वार कार्यान्वयन, विभिन्न केंद्रीय एवं राज्य योजनाओं के साथ अभिसरण, प्रदेशभर में संचालित गतिविधियों तथा जियो-टैगिंग एवं जल संचयः जन भागिदारी पोर्टल पर कार्यों की अपलोडिंग की स्थिति की समीक्षा की गई।

    इसके अतिरिक्त, केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा निर्धारित जिला-वार लक्ष्यों तथा उनके विरुद्ध अब तक प्राप्त प्रगति की भी विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में जल संरक्षण कार्यों के क्रियान्वयन में तकनीकी सहयोग की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। इस दौरान निर्णय लिया गया कि जल शक्ति विभाग विभिन्न विभागों को वैज्ञानिक आधार पर जल संरक्षण एवं भूजल पुनर्भरण संरचनाओं की योजना एवं निर्माण के लिए आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन तथा परामर्श उपलब्ध कराएगा।

  • राज्य अप्रेंटिसशिप काउंसिल की बैठक में युवाओं के प्रशिक्षण एवं रोज़गार के अवसरों पर चर्चा

    राज्य अप्रेंटिसशिप काउंसिल की बैठक में युवाओं के प्रशिक्षण एवं रोज़गार के अवसरों पर चर्चा

    शिमला: हिमाचल प्रदेश में युवाओं को उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल, व्यावहारिक प्रशिक्षण एवं रोज़गार के बेहतर अवसर उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से राज्य अप्रेंटिसशिप काउंसिल की बैठक राज्य सचिवालय में आयोजित की गई। इस दौरान प्रशिक्षुता (अप्रेंटिसशिप) प्रशिक्षण को अधिक प्रभावी, व्यापक एवं उद्योगोन्मुख बनाने तथा युवाओं के लिए प्रशिक्षण एवं रोज़गार के अवसरों का विस्तार करने संबंधी विभिन्न विषयों पर व्यापक चर्चा की गई।

    बैठक की अध्यक्षता करते हुए तकनीकी शिक्षा, व्यावसायिक एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग के प्रधान सचिव एवं राज्य अप्रेंटिसशिप काउंसिल के अध्यक्ष डॉ. अभिषेक जैन ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में अप्रेंटिसशिप के अवसरों और प्रशिक्षुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि सुनिश्चित की जाए।युवाओं को अप्रेंटिसशिप से जोड़ने के लिए राज्य में व्यापक जागरूकता अभियान चलाए जाएं तथा औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों, इंजीनियरिंग एवं पॉलीटेक्निक संस्थानों, विश्वविद्यालयों, उद्योगों और अन्य हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए।

    उन्होंने निजी उद्योगों की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने तथा अधिकाधिक प्रतिष्ठानों को राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप पोर्टल पर पंजीकृत करने पर विशेष बल दिया ताकि युवाओं को उद्योग आधारित प्रशिक्षण एवं रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध हो सकें। बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश में अप्रेंटिसशिप को बढ़ावा देने के लिए जुलाई, 2026 तक 156 अप्रेंटिसशिप मेलों का आयोजन किया गया। इसके अतिरिक्त, भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप प्रत्येक माह नियमित रूप से अप्रेंटिसशिप मेलों का आयोजन किया जा रहा है। परिषद् ने उद्योगों एवं प्रतिष्ठानों, विशेषकर सरकारी विभागों एवं सार्वजनिक उपक्रमों की भागीदारी बढ़ाने तथा उन्हें राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप पोर्टल पर पंजीकरण कर अधिकाधिक अप्रेंटिसशिप अवसर सृजित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने पर बल दिया।

    बैठक में यह भी अवगत करवाया गया कि वर्तमान में तकनीकी शिक्षा विभाग के विभिन्न संस्थानों में 98 प्रशिक्षु अप्रेंटिसशिप प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। परिषद ने भविष्य में आवश्यकता एवं उपलब्ध अवसरों के अनुरूप अधिक से अधिक युवाओं को अप्रेंटिसशिप से जोड़ने और कार्यक्रम का विस्तार करने पर बल दिया। इसके अतिरिक्त, सरकारी विभागों में कार्यरत अप्रेंटिसों को स्टाइपेंड के भुगतान के लिए पर्याप्त बजटीय प्रावधान सुनिश्चित करने तथा अप्रेंटिसशिप कार्यक्रम को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाने पर भी चर्चा की गई।

    इस बैठक में विभिन्न सरकारी विभागों से संबंधित राज्य अप्रेंटिसशिप काउंसिल के सदस्य उपस्थित थे। बैठक में प्रदेश में अप्रेंटिसशिप को कौशल विकास एवं रोजगार सृजन का सशक्त माध्यम बनाते हुए अधिकाधिक युवाओं को उद्योग आधारित प्रशिक्षण से जोड़ने के लिए सभी संबंधित विभागों एवं हितधारकों द्वारा समन्वित प्रयास किए जाने पर बल दिया।

     

  • ‘मुख्यमंत्री का कार्यकर्ताओं के साथ संवाद’ कार्यक्रम शुरू

    ‘मुख्यमंत्री का कार्यकर्ताओं के साथ संवाद’ कार्यक्रम शुरू

    कार्यकर्ता एकजुट होकर कांग्रेस की विचारधारा को आगे बढ़ाएं: मुख्यमंत्री

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने ‘मुख्यमंत्री का कार्यकर्ताओं के साथ संवाद कार्यक्रम’ की शुरूआत सिरमौर जिला के पच्छाद तथा शिमला जिला के चौपाल विधानसभा क्षेत्र से की। उन्होंने ओक ओवर शिमला में दोनों विधानसभा क्षेत्रों के कांग्रेस कार्यकर्ताओं से फीडबैक लिया और विकास कार्यों पर चर्चा की। कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री की इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि पार्टी के कार्यकर्ता पूरी मजबूती के साथ कांग्रेस सरकार के साथ खड़े हैं। कार्यकर्ताओं ने अपने-अपने क्षेत्र की विकास कार्यों पर विस्तृत चर्चा की और सरकार को पूर्ण सहयोग देने की बात की। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी कार्यकर्ता एकजुट होकर कांग्रेस की विचारधारा को आगे बढ़ाएं और राज्य सरकार की नीतियों और जन कल्याणकारी योजनाओं को लोगों तक पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े तीन वर्षों में कांग्रेस सरकार ने लोगों का कल्याण सुनिश्चित करने के लिए अनेक योजनाएं शुरू की हैं और इनका लाभ हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा कि बदहाल व्यवस्था कांग्रेस सरकार को पिछली भाजपा सरकार से विरासत में मिली। इस व्यवस्था में सुधार करने के लिए अनेक कदम उठाए गए हैं। राज्य सरकार ने स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में सुधार लाए हैं। मेडिकल कॉलेजों में पीजी की सीटों की संख्या बढ़ाई गई है, जिससे आने वाले समय में स्वास्थ्य क्षेत्र में और सुधार नजर आएगा। इसके अलावा सरकार ने प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में आदर्श स्वास्थ्य संस्थान भी बनाए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रदेश में 150 से ज्यादा सरकारी स्कूलों में सीबीएसई पाठयक्रम लागू किया है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों को भी बेहतर शिक्षा उपलब्ध हो सके। इन स्कूलों में अध्यापकों की नियुक्ति की जा रही है। इसके अलावा राज्य सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए दूध के मूल्य में वृद्धि की है। गाय का दूध 61 रुपये तथा भैंस का दूध 71 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीदा जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए भी कदम उठा रही है और प्राकृतिक खेती से तैयार कृषि उत्पादों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने सेब बागवानों का मण्डी मध्यस्थता योजना के तहत 30 बोरी तक खरीदे गए सेब का पूरा भुगतान कर दिया है। अब राज्य सरकार 100 बोरी तक सेब का भुगतान करने जा रही है और उसके बाद 100 से ज्यादा सेब बोरी का पैसा जारी कर दिया जाएगा। सुक्खू ने कहा कि विधवा महिलाओं और एकल नारियों के बच्चों की शिक्षा का खर्च भी राज्य सरकार उठा रही है और पात्र विद्यार्थियों को एक प्रतिशत ब्याज दर पर बीस लाख तक ऋण दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि पच्छाद और चौपाल विधानसभा क्षेत्र में विकास के मामले में कमी नहीं आने दी जाएगी और वहां अधूरे कार्यों को पूर्ण करने के लिए समुचित धन उपलब्ध करवाया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार के पास विकास कार्यों के लिए धन की कोई कमी नहीं है और राज्य सरकार पूरे प्रदेश का एक समान विकास सुनिश्चित कर रही है। इस अवसर पर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष विनय कुमार ने कहा कि पच्छाद प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री डॉ. वाई एस परमार की जन्मभूमि है और राज्य सरकार पच्छाद क्षेत्र का विकास सुनिश्चित कर रही है। उन्होंने कहा कि उन्हें कांग्रेस का प्रदेशाध्यक्ष बनाकर कांग्रेस हाईकमान ने पूरे सिरमौर जिला को सम्मान दिया है। प्रदेश में संगठन को मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। प्रदेश में सरकार और संगठन मिलकर काम कर रहे हैं और वर्तमान कांग्रेस सरकार 2027 में पुनः सत्ता में आकर इतिहास रचने को तैयार हैं। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गंगू राम मुसाफिर, प्रदेश कांग्रेस के महासचिव विनोद जिंटा, चौपाल से कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी रजनीश किमटा, जिला शिमला ग्रामीण के अध्यक्ष कृष्ण हिमराल, मुख्यमंत्री के ओएसडी रितेश कपरेट, कांग्रेस नेता दयाल प्यारी सहित अन्य वरिष्ठ कार्यकर्ता इस अवसर पर उपस्थित थेे।  
  • 15 वर्षों तक होंगी एआईटीपी वाहनों की परिचालन अवधि: उप-मुख्यमंत्री

    15 वर्षों तक होंगी एआईटीपी वाहनों की परिचालन अवधि: उप-मुख्यमंत्री

    प्रदेश सरकार के प्रयासों से नियमों में संशोधन

    शिमला: उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने आज यहां बताया कि प्रदेश सरकार के सतत प्रयासों से प्रदेश के ऑल इंडिया टूरिस्ट टैक्सी ऑपरेटरों की वर्षों पुरानी महत्त्वपूर्ण मांग पूरी हो गई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा केंद्र सरकार के समक्ष लगातार टैक्सी ऑपरेटरों की मांगों का मामला उठाया गया, जिसके परिणामस्वरूप ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट (एआईटीपी) वाहनों की परिचालन अवधि को 12 वर्ष से बढ़ाकर 15 वर्ष कर दिया गया है। इस निर्णय से प्रदेश के हजारों टैक्सी संचालकों को बड़ी राहत मिलेगी तथा पर्यटन एवं परिवहन क्षेत्र भी सशक्त होंगे। उप-मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश जैसे पर्यटन प्रधान राज्य में हजारों परिवार टैक्सी संचालन कर अपनी आजीविका अर्जित करते हैं। वाहन संचालक परिचालन अवधि बढ़ाने की निरंतर मांग कर रहे थे, जिसे उन्होंने केंद्र सरकार के समक्ष प्रमुखता से उठाया। उन्होंने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के समक्ष इस विषय को प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया और वाहन संचालकों की व्यावहारिक कठिनाइयों से अवगत कराया। केंद्र सरकार द्वारा नियमों में संशोधन किए जाने के पश्चात प्रदेश सरकार ने भी इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी आवश्यक आदेश जारी कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि परिवहन विभाग द्वारा आवश्यक आदेश जारी करने के साथ-साथ विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी अधिसूचित कर दी गई है, ताकि पात्र वाहन मालिक संशोधित नियमों का लाभ आसानी से प्राप्त कर सकें। संशोधित व्यवस्था लागू होने से पात्र एआईटीपी वाहन 15 वर्ष तक संचालित किए जा सकेंगे। इस व्यवस्था के लागू होने से टैक्सी ऑपरेटरों पर आर्थिक बोझ कम होगा और उनके रोजगार का साधन भी सशक्त होगा। उप-मुख्यमंत्री ने कहा कि संशोधित व्यवस्था के तहत ऐसे एआईटीपी वाहन, जिनकी पंजीकरण अवधि 15 वर्ष से कम है, निर्धारित शर्तों की पूर्ति के बाद इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। इसके लिए वाहन मालिकों को वैध फिटनेस प्रमाण-पत्र, पंजीकरण प्रमाण-पत्र, बीमा, प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण-पत्र, सभी सरकारी शुल्क का भुगतान तथा अन्य वैधानिक औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। इस प्रक्रिया को पारदर्शी, सरल और समयबद्ध बनाने के लिए परिवहन विभाग द्वारा विस्तृत एसओपी जारी कर दी गई है। मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि इस निर्णय से न केवल टैक्सी ऑपरेटरों को आर्थिक राहत मिलेगी, बल्कि प्रदेश के पर्यटन उद्योग को भी नई गति प्राप्त होगी। पर्यटन सीजन के दौरान बेहतर परिवहन सुविधाएं उपलब्ध होंगी। प्रदेश सरकार परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। भविष्य में भी उनकी व्यावहारिक समस्याओं के समाधान के लिए सकारात्मक एवं जनहितकारी निर्णय लेती रहेगी।
  • हमीरपुर के समर्थ अत्री का एशियन शॉर्ट ट्रैक आइस स्केटिंग ट्रॉफी-2026 के लिए हुआ चयन

    हमीरपुर के समर्थ अत्री का एशियन शॉर्ट ट्रैक आइस स्केटिंग ट्रॉफी-2026 के लिए हुआ चयन

    शिमला: हमीरपुर जिले के भोरंज तहसील से सम्बन्ध रखने वाले समर्थ अत्री, जिनका चयन देहरादून में 17 से 20 अगस्त, 2026 को आयोजित होने वाली एशियन शॉर्ट ट्रैक आइस स्केटिंग ट्रॉफी के लिए हुआ है। उन्होंने कल सायं मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू से भेंट की। उनका इस प्रतियोगिता में अच्छे प्रदर्शन के लिए आशीर्वाद प्राप्त किया।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने समर्थ अत्री को इस प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रदेश सरकार खिलाड़ियों को उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए प्रदेश में बेहतर खेल अधोसरंचना का सृजन कर रही है ताकि वे अपनी प्रतिभा को निखारकर राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में अच्छा प्रदर्शन कर सकें। उन्होंने कहा कि समर्थ अत्री ने अपनी प्रतिभा और अथक मेहनत के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जगह बनाकर प्रदेश का मान बढ़ाया है। मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि समर्थ अत्री एशियन प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन कर भारत और हिमाचल प्रदेश का नाम अंतरराष्ट्रीय मंच पर रोशन करेंगे।

    शिमला के प्रतिष्ठित ऑकलैंड हाउस स्कूल में दसवीं कक्षा के छात्र समर्थ अत्री पिछले छह-सात वर्षों से शिमला स्थित आइस स्केटिंग रिंक में नियमित अभ्यास कर रहे हैं। हाल ही में उनका चयन 21वीं राष्ट्रीय शॉर्ट ट्रैक आइस स्केटिंग चौंपियनशिप के लिए हुआ था। प्रतियोगिता के बाद आयोजित राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में उन्होंने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। इसी प्रदर्शन के आधार पर अब उनका चयन एशियन शॉर्ट ट्रैक आईस स्केटिंग ट्राफी-2026 के लिए किया गया है।

     

  • मुख्यमंत्री ने तकनीकी शिक्षा के छात्रों के लिए ‘तकनीकी रोजगार सेतु’ पोर्टल का शुभारंभ किया

    मुख्यमंत्री ने तकनीकी शिक्षा के छात्रों के लिए ‘तकनीकी रोजगार सेतु’ पोर्टल का शुभारंभ किया

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने सोमवार देर सायं तकनीकी शिक्षा विभाग के ‘तकनीकी रोजगार सेतु’ पोर्टल का शुभारंभ किया। यह अपनी तरह का पहला डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसका उद्देश्य छात्रों, तकनीकी शिक्षण संस्थानों और रोजगारदाताओं को एकीकृत प्रणाली के माध्यम से जोड़कर हिमाचल प्रदेश में प्लेसमेंट और भर्ती प्रक्रिया को सरल एवं प्रभावी बनाना है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि राज्य सरकार कौशल विकास और रोजगार सृजन के लिए एक मजबूत व्यवस्था विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। तकनीकी रोजगार सेतु पोर्टल युवाओं और उद्योगों के बीच एक प्रभावी सेतु का कार्य करेगा तथा तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्रों को बेहतर रोजगार अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    यह पोर्टल एक व्यापक डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया गया है, जहां छात्र अपनी प्रोफाइल, अपनी कौशल क्षमताओं का प्रदर्शन, प्रशिक्षण एवं प्रमाणपत्रों का विवरण अपलोड कर सकेंगे। इसके अतिरिक्त रोजगार के अवसर, ऑनलाइन आवेदन तथा अपने प्लेसमेंट की स्थिति की निगरानी कर सकेंगे। यह पहल छात्रों को रोजगार के अवसरों और उद्योगों की आवश्यकताओं तक सीधी पहुंच प्रदान कर उन्हें सशक्त बनाएगी।

    नियोक्ता भी इस पोर्टल पर पंजीकरण, रिक्त पदों की जानकारी साझा कर सकेंगे। इसके अतिरिक्त पात्र उम्मीदवारों की प्रोफाइल देखकर भर्ती प्रक्रिया शुरू कर सकेंगे तथा सफल नियुक्तियों की जानकारी विभाग को उपलब्ध करवा सकेंगे। यह एकीकृत प्रणाली नियोक्ताओं और नौकरी के इच्छुक युवाओं के बीच पारदर्शी एवं प्रभावी संवाद सुनिश्चित करेगी तथा भर्ती प्रक्रिया में होने वाली अनावश्यक देरी को कम करेगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पोर्टल पर 164 संस्थान पंजीकृत हो चुके हैं, जिनमें 136 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान, 18 पॉलिटेक्निक संस्थान, 5 इंजीनियरिंग कॉलेज तथा 5 फार्मेसी कॉलेज शामिल हैं। उन्होंने कहा कि हिम एक्सेस इंटीग्रेशन पोर्टल के माध्यम से अब तक 26,168 छात्रों का पंजीकरण किया जा चुका है, जिनमें से 23,054 छात्रों की कौशल मैपिंग पूरी हो चुकी है। इसके अतिरिक्त अब तक 97 नियोक्ता भी इस पोर्टल पर पंजीकृत हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि इस पोर्टल के माध्यम से इलेक्ट्रीशियन, प्लंबर जैसे कुशल श्रमिकों की सेवाएं अल्प अवधि के कार्यों के लिए भी प्राप्त की जा सकेंगी तथा ऐसे कुशल श्रमिक भी इस प्लेटफॉर्म पर अपना पंजीकरण करा सकेंगे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीकी शिक्षण संस्थान इस पोर्टल के माध्यम से छात्रों का डेटा प्रबंधन, प्रोफाइल अनुमोदन तथा प्लेसमेंट परिणामों की निगरानी कर सकेंगे। इससे संस्थानों को छात्रों का रिकॉर्ड बनाए रखने और संभावित नियोक्ताओं के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने में सहायता मिलेगी। सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार सुशासन को मजबूत बनाने और युवाओं के लिए सार्थक रोजगार के अवसर सृजित करने के लिए प्रौद्योगिकी का प्रभावी उपयोग कर रही है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि तकनीकी रोजगार सेतु पोर्टल उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करेगा, युवाओं की रोजगार क्षमता को बढ़ाएगा तथा कुशल युवाओं को गुणवत्तापूर्ण रोजगार उपलब्ध कराने के लिए एक विश्वसनीय मंच साबित होगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश को कुशल मानव संसाधन का केंद्र बनाने तथा राज्य के युवाओं को उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप दक्ष बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
    इस अवसर पर उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी, प्रधान सचिव डॉ. अभिषेक जैन, डिजिटल प्रौद्योगिकी एवं सुशासन विभाग के निदेशक डॉ. निपुण जिंदल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

  • आयकर विभाग 22 जुलाई को शिमला में करदाता जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करेगा

    आयकर विभाग 22 जुलाई को शिमला में करदाता जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करेगा

    शिमला: आयकर विभाग के एक प्रवक्ता ने जानकारी दी है कि विभाग द्वारा 22 जुलाई, 2026 को दोपहर 2 बजे से 3 बजे तक रेलवे बोर्ड भवन, शिमला के सम्मेलन कक्ष में करदाता जागरूकता एवं जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम का उद्देश्य करदाताओं को निर्धारण वर्ष 2026-27 के लिए आयकर रिटर्न (आईटीआर) समय पर एवं सही तरीके से दाखिल करने के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान करना है।

    उन्होंने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य स्वैच्छिक कर अनुपालन को बढ़ावा देना है। इस दौरान सही आईटीआर फॉर्म के चयन, उपयुक्त कर व्यवस्था (टैक्स रिजीम) के चुनाव, रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथियों, विभिन्न स्रोतों से प्राप्त आय की सही जानकारी, ई-फाइलिंग एवं ई-वेरिफिकेशन की प्रक्रिया, आयकर कानूनों में हाल के संशोधनों तथा विलंब से अथवा गलत रिटर्न दाखिल करने के परिणामों के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाएगी। कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तरी सत्र भी आयोजित किया जाएगा।

    प्रवक्ता ने बताया कि संयुक्त आयकर आयुक्त, शिमला रेंज केशव किशोर आनंद कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे, जबकि उप आयकर आयुक्त, शिमला सर्किल, डॉ. शिखा शर्मा संसाधन अधिकारी के रूप में तकनीकी सत्र का संचालन करेंगी।

    उन्होंने बताया कि वेतनभोगी कर्मचारियों, पेंशनभोगियों, व्यवसायियों, एमएसएमई, पेशेवरों, स्टार्ट-अप उद्यमियों, होटल एवं पर्यटन क्षेत्र से जुड़े हितधारकों, शैक्षणिक संस्थानों, धर्मार्थ संगठनों, महिला उद्यमियों तथा पहली बार आयकर रिटर्न दाखिल करने वाले करदाताओं सहित सभी करदाताओं को कार्यक्रम में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया है। कार्यक्रम में भागीदारी पूर्णतः निःशुल्क होगी।

     

  • Strait Of Hormuz में मृतक के परिवार ने की न्याय की मांग, मुख्यमंत्री से की भेंट

    Strait Of Hormuz में मृतक के परिवार ने की न्याय की मांग, मुख्यमंत्री से की भेंट

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू से हमीरपुर जिले के गलोड़ क्षेत्र के राजेश शर्मा ने भेंट की। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हाल ही में अपनी जान गंवाने वाले आदित्य शर्मा के पिता राजेश शर्मा नेे मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि आदित्य शर्मा की असामयिक मृत्यु का मामला केंद्र सरकार के समक्ष उठाया जाए, क्योंकि अब तक इस मामले में केंद्र सरकार की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

    मुख्यमंत्री ने शोकग्रस्त परिवार के प्रति संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार मजबूती के साथ परिवार के साथ खड़ी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि वह इस मामले को केंद्र सरकार के समक्ष उठाएंगे ताकि परिवार को न्याय मिल सके। मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। इस अवसर पर आदित्य शर्मा की माता सुषमा शर्मा भी उपस्थित थीं।

  • प्रधान सचिव ने ABVIGET में शैक्षणिक एवं आधारभूत संरचना विकास की समीक्षा की

    प्रधान सचिव ने ABVIGET में शैक्षणिक एवं आधारभूत संरचना विकास की समीक्षा की

    शिमला: तकनीकी शिक्षा, व्यावसायिक एवं औद्योगिक प्रशिक्षण के प्रधान सचिव डॉ. अभिषेक जैन ने शुक्रवार को जिला शिमला के प्रगतिनगर स्थित अटल बिहारी वाजपेयी राजकीय इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (एबीवीजीआईईटी) का दौरा कर संस्थान की शैक्षणिक, प्रशासनिक, अनुसंधान तथा आधारभूत संरचना संबंधी गतिविधियों की समीक्षा की।

    इस अवसर पर डॉ. जैन ने इंजीनियरिंग, पॉलिटेक्निक एवं आईटीआई विंग के संकाय सदस्यों और कर्मचारियों के साथ संवाद किया। उन्होंने समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए संस्थान को और सशक्त बनाने पर बल दिया। उन्होंने शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार, अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देने, आधारभूत संरचना के उन्नयन तथा विद्यार्थियों के समग्र विकास की दिशा में कार्य करने के लिए कहा। बैठक में मानव संसाधन को सुदृढ़ करने, छात्र कल्याण निधि का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने, केंद्रीय पुस्तकालय में अतिरिक्त पुस्तकों एवं डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता बढ़ाने, प्रयोगशालाओं के आधुनिकीकरण तथा अत्याधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रयोगशाला स्थापित करने का निर्णय लिया गया। उन्होंने शोध पत्रिकाओं में प्रकाशन को प्रोत्साहित करने पर बल दिया।

     

    प्रधान सचिव ने विद्यार्थियों को शैक्षणिक एवं औद्योगिक भ्रमण के माध्यम से उद्योगों का अधिक व्यावहारिक अनुभव प्रदान करने, संकाय सदस्यों द्वारा नियमित मार्गदर्शन, व्यक्तित्व विकास एवं सॉफ्ट स्किल्स प्रशिक्षण तथा ‘टॉपर गैलरी’ जैसी पहलों के माध्यम से शैक्षणिक उत्कृष्टता को सम्मानित करने पर भी बल दिया। परिसर के समग्र विकास के लिए कक्षाओं के उन्नयन, खेल सुविधाओं के विस्तार, इनडोर जिम्नेजियम की स्थापना, हरित परिसर के विकास तथा स्वच्छता के उच्च मानकों को बनाए रखने के निर्देश दिए गए। इसके अतिरिक्त, संकाय सदस्यों को राष्ट्रीय एजेंसियों से अनुसंधान अनुदान प्राप्त करने और उद्योगों के साथ सहयोग को और मजबूत करने के लिए प्रेरित किया गया।

    डॉ. अभिषेक जैन ने कहा कि संस्थान को शैक्षणिक उत्कृष्टता, नवाचार, अनुसंधान, उद्योग-संस्थान साझेदारी तथा उपलब्ध संसाधनों के प्रभावी उपयोग के माध्यम से तकनीकी शिक्षा का उत्कृष्टता केंद्र बनने की दिशा में कार्य करना चाहिए। उन्होंने संकाय एवं कर्मचारियों का आहवान करते हुए कहा कि समर्पण और सामूहिक प्रतिबद्धता के साथ तकनीकी शिक्षा के सर्वोच्च मानकों को हासिल करने की दिशा में कार्य किया जाए।