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  • कार से भयानक टक्कर के बाद खाई में गिरी बस, 30 की मौत, देखें तस्वीरें

    कार से भयानक टक्कर के बाद खाई में गिरी बस, 30 की मौत, देखें तस्वीरें

    पेशावरः उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान के पेशावर में एक भीषण सड़क हादसे की खबर है। देर रात को एक बस और कार की टक्कर हो गई। इसके बाद बस के गहरी खाई में गिर जाने से कम से कम 30 लोगों की मौत हो गई है। वहीं इस भयंकर सड़क दुर्घटना में 15 लोग घायल हुए हैं। यह एक सप्ताह से भी कम समय में इस तरह की दूसरी घातक दुर्घटना है।

    न्यूज एजेंसी के अनुसार दुर्घटना गिलगित बाल्टिस्तान इलाके के दिआमीर क्षेत्र में शतियाल चौक के पास हुई। स्थानीय पुलिस के अनुसार बस गिलगित से रावलपिंडी की ओर जा रही थी। तभी शतियाल इलाके से विपरीत दिशा से आ रही कार से उसकी आमने-सामने टक्कर हो गई। इसके बाद दोनों वाहन गहरी खाई में गिर गई। सूचना मिलने के बाद पुलिस और बचाव अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे और घायलों और शवों को आरएचसी अस्पताल पहुंचाया गया।

    पुलिस अधिकारियों ने बताया कि बचावकर्मियों को अंधेरे के कारण राहत एवं बचाव कार्य में दिक्कत का सामना करना पड़ा। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस दुर्घटना में लोगों की मौत पर शोक जताया है। सरकारी ‘रेडियो पाकिस्तान’ के अनुसार, प्रधानमंत्री शरीफ ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताई है और मृतकों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की है। उन्होंने अधिकारियों को घायल का उचित इलाज सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने भी दुर्घटना में लोगों की मौत पर शोक जताया है।

  • भीषण तबाही के बीच फिर लगे भूकंप के झटके, 4300 से अधिक लोगों की हो चुकी मौत

    भीषण तबाही के बीच फिर लगे भूकंप के झटके, 4300 से अधिक लोगों की हो चुकी मौत

    तुर्कीः भीषण तबाही के बीच एक बार फिर भूकंप के झटके महसूस किए गए। मंगलवार सुबह आए झटकों की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 5.5 मापी गई। यूएस जियोलॉजिकल सर्वे की वेबसाइट के मुताबिक मंगलवार को भी भूकंप का बड़ा झटका तुर्की में महसूस किया गया है। वेबसाइट के अनुसार, यह झटका सुबह करीब पौने नौ बजे दर्ज किया गया, जिसकी रिक्टर स्केल पर तीव्रता 5.5 रही। भूकंप में मरने वाले लोगों का कुल आंकड़ा बढ़कर 4300 के पार पहुंच गया है। वहीं सीरिया में भूकंप से हुई तबाही से अभी तक 1444 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। भूगर्भ वैज्ञानिकों का कहना है कि बड़े भूकंप के झटकों के बाद भी तुर्की और सीरिया के सीमाई इलाके में करीब 100 भूकंप के झटके महसूस किए गए। 

    सोमवार को आए भूकंप के झटकों से तुर्की और सीरिया में करीब चार हजार से ज्यादा इमारतें ध्वस्त हो गई हैं। जिनमें दबकर बड़ी संख्या में लोगों की मौत की मौत हुई है। डब्लूएचओ के वरिष्ठ अधिकारियों का अनुमान है कि इस भूकंप में 20 हजार से ज्यादा लोगों की जान गई है। राहत और बचाव कार्य जारी हैं और भारत समेत दुनिया के कई देशों ने तुर्की की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। भारत ने एनडीआरएफ की दो टीमें डॉग स्कवाडय के साथ तुर्की रवाना की हैं। इसके अलावा मेडिकल सप्लाई भी भेजी गई है। 

    तुर्की में आए भूकंप के बाद नीदरलैंड के एक वैज्ञानिक का ट्वीट सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। दरअसल इस ट्वीट में वैज्ञानिक ने तुर्की में बड़ा भूकंप आने की चेतावनी दी थी, जो कि सच साबित हुई। डच वैज्ञानिक फ्रैंक हूजरबीट्स, सोलस सिस्टम जियोमैट्री सर्वे नामक इंस्टीट्यूट में रिसर्चर हैं। उन्होंने शुक्रवार को ट्वीट कर लिखा था कि जल्दी या देर से, केंद्रीय तुर्की और जॉर्डन सीरिया के इलाके में 7.5 मैग्नीट्यूड का भूकंप आ सकता है। 

  • 10 घंटे में तीसरी बार भूकंप के लगे तेज झटके, 100 सालों की सबसे बड़ी आपदा!

    10 घंटे में तीसरी बार भूकंप के लगे तेज झटके, 100 सालों की सबसे बड़ी आपदा!

    तुर्की में सोमवार को तीसरी बार भूंकप के झटके महसूस किए गए। इस बार भूकंप की रिक्टर पैमाने  पर तीव्रता 6 मापी गई है। ये झटके पांच बजकर 32 मिनट पर महसूस किए गए इससे पहले भारतीय समयानुसार तीन बजकर 54 मिनट पर भी भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए थे। जिसकी रिक्टर पैमाने पर तीव्रता 7.5 मापी गई। तुर्की और सीरिया में अब तक भूकंप से 1500 से अधिक लोगों की मौत हो गई है। उसका केंद्र अंकारा से 427 किलोमीटर दूर जमीन से 10 किमी. अंदर था। प्रारंभिक भूकंप के बाद 50 से अधिक आफ्टरशॉक्स आए, जिसमें 7.5-तीव्रता का झटका भी शामिल है। 

    वहीं, तुर्की की एक समाचार एजेंसी ने देश की आपदा एजेंसी का हवाला देते हुए रिपोर्ट दी कि दक्षिणी तुर्की में कहारनमारास प्रांत के एलबिस्तान जिले में 7.6 तीव्रता का एक और ताजा भूकंप आया है। इसका असर सीरिया के दमिश्क, लताकिया अन्य सीरियाई प्रांतों में भी महसूस किया गया। 

    1960 में इतिहास में सबसे बड़े भूकंपों में चिली में किया गया था दर्ज 

    साल 1952 में रूस में कामचटका प्रायद्वीप के पास 9.0 तीव्रता का भूकंप आया था। इसमें 2,000 से अधिक लोग मारे गए थे। यह भूंकप एक बड़ी सुनामी का कारण बना. इसकी लहरें पेरू, चिली और न्यूजीलैंड तक पहुंच गई थी। लेकिन सबसे ज्यादा नुकसान हवाई द्वीपों में हुआ। हाल के इतिहास में सबसे बड़े भूकंपों में से एक मई 1960 में बायो-बायो, चिली में दर्ज किया गया था। 9.4 और 9.6 की तीव्रता वाले इस भूकंप ने लगभग 10 मिनट तक जमीन को हिलाया था। इस भूकंप ने लगभग 6000 लोगों की जान ली थी। इसे अब तक दर्ज किया गया सबसे अधिक तीव्रता वाला भूकंप माना जाता है।

    इस भूकंप से लगभग 300 करोड़ यूएस डॉलर से लेकर 700 करोड़ यूएस डॉलर का नुकसान हुआ था। इसके बाद भूकंप 1964 में गुड फ्राइडे के दिन आया था। ग्रेट अलास्कन भूकंप की तीव्रता 9.2 थी और यह 5 मिनट से थोड़ा कम समय तक चला और इसे उत्तरी अमेरिका में दर्ज अब तक का सबसे शक्तिशाली भूकंप माना जाता है। झटके से केवल नौ लोगों की मौत हुई, लेकिन दुनिया भर में इसके परिणामस्वरूप आई सुनामी में 100 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। भूकंप से सुनामी की लहरें अंटार्कटिका तक पहुंच गई थीं और पेरू, मेक्सिको, जापान और न्यूजीलैंड के साथ-साथ अन्य तटीय क्षेत्रों में भी देखी गई थी।

    एनडीआरएफ और मेडिकल टीम भेजी जाएंगी तुर्की 

    प्रधानमंत्री मोदी के निर्देश पर तुर्की को तत्काल सहायता देने के मुद्दे पर प्रधानमंत्री के मुख्य सचिव पीके मिश्रा ने अहम बैठक बुलाई। बैठक में तय हुआ है कि सर्च और रेस्क्यू अभियान के लिए एनडीआरएफ और मेडिकल टीम तुर्की भेजी जाएंगी। इसके साथ राहत सामग्री भी जल्द से जल्द टुर्की के लिए रवाना की जाएगी। एनडीआरएफ की दो टीमों में 100 जवान होंगे। इनमें डॉग स्क्वायड भी शामिल हैं। इसके अलावा ये टीमें जरूरी उपकरण भी अपने साथ ले जाएंगी। मेडिकल टीम में डॉक्टर, अन्य स्टाफ और जरूरी दवाएं होंगी।

    तुर्की में 1999 में आए भूकंप में 18000 लोगों की हुई थी मौत

    तुर्की की भौगोलिक स्थिति के चलते यहां अक्सर भूकंप आते रहते हैं। यहां 1999 में आए भूकंप में 18000 लोगों की मौत हो गई थी। अक्टूबर 2011 में आए भूकंप में 600 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। तुर्की में आज आए भूकंप की बराबर तीव्रात का भूकंप इससे पहले 1939 में आया था। उसमें 32,700 से ज्यादा लोग मारे गए थे।

  • 7.8 तीव्रता से लगे भूकंप के झटकों से भारी तबाही, कई लोगों की मौत

    7.8 तीव्रता से लगे भूकंप के झटकों से भारी तबाही, कई लोगों की मौत

    इस्तांबुलः तुर्की और सीरिया में 7.8 तीव्रता के भीषण भूकंप के दो झटकों से बड़ी तबाही आई है। तुर्की और सीरिया में भूकंप से सैकड़ों लोगों की मौत हो गई और कई इमारतें ध्वस्त हो गईं। तुर्की में भूकंप से अब तक 76, तो सीरिया में 86 मौतों की पुष्टि हुई है। बड़े पैमाने पर बचाव एवं राहत कार्य चल रहा है। मौतों का आंकड़ा बढ़ने का अनुमान है। सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। दोनों देशों में न जानें कितनी ही इमारतें जमींदोज हो चुकी हैं, जिनके मलबे में लोग फंसे हुए हैं। इधर इटली में सुनामी का अलर्ट जारी हुआ है। भूकंप ने दक्षिण तुर्की के गजिएनटेप शहर को दहला दिया है।

    तुर्की की इमरजेंसी सर्विस ने कहा कि 7.8 तीव्रता के भूकंप से सात प्रांतों में कम से कम 76 लोगों की मौत हुई है और 440 लोग घायल हुए हैं। तुर्की में आए भीषण भूकंप के असर से सीरिया में 86 लोगों क मौत हो गई और 200 लोग घायल हुए हैं। यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे ने सोमवार को कहा कि दक्षिणी तुर्की में 7.8 तीव्रता का भूकंप आया है। यूएसजीएस के मुताबिक भूकंप जमीन से करीब 24.1 किलोमीटर (14.9 मील) की की गहराई पर आया है। इसका केंद्र तुर्की के गाजियांटेप प्रांत के नूरदागी से 23 किलोमीटर (14.2 मील) पूर्व में स्थित है। यूएसजीएस ने कहा कि मध्य तुर्की में इस भूकंप के आने के बाद तगड़े झटके महसूस किए गए हैं। पहले भूकंप के लगभग 11 मिनट बाद 9.9 किलोमीटर की गहराई में 6.7 तीव्रता का एक और भूकंप आने की खबर है।

    तुर्की में ये भूकंप सोमवार (6 फरवरी) को सुबह 6.47 बजे गाजियांटेप के करीब आया। इसका असर साइप्रस, तुर्की, ग्रीस, जॉर्डन, लेबनान, सीरिया, इराक और जॉर्जिया तक महसूस किया गया. सोमवार तड़के आए भूकंप से हुए नुकसान और हताहतों के बारे में अब जानकारी मिलने लगी है। सोशल मीडिया पर शेयर किए गए वीडियो और फोटो से लगता है कि भारी पैमाने पर तबाही और जानमाल के नुकसान की आशंका है। तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोवन ने ट्विटर पर कहा कि भूकंप से असर वाले इलाकों में खोज और बचाव दलों को तुरंत भेज दिया गया। एर्दोवन ने कहा कि खोज और बचाव दल लगातार काम कर रहे हैं। उम्मीद है कि इस आपदा से हम जल्द से जल्द और कम से कम नुकसान के साथ निपट लेंगे।

    तुर्की का दक्षिणी इलाका गजियांटेप एक प्रमुख औद्योगिक और विनिर्माण केंद्रों में से एक है, जिसकी सीमा सीरिया से लगती है। गौरतलब है कि तुर्की दुनिया के सबसे ज्यादा सक्रिय भूकंप के इलाकों में से एक है। तुर्की में 1999 में 7.4 तीव्रता के भूकंप से इस्तांबुल में लगभग 1,000 सहित 17,000 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। एक्सपर्ट लंबे समय से चेतावनी देते आ रहे हैं कि एक बड़ा भूकंप इस्तांबुल को तबाह कर सकता है। क्योंकि वहां सुरक्षा सावधानियों के बिना बड़े पैमाने पर निर्माण की मंजूरी दी गई है।

  • अमेरिकी वीजा के लिए लम्बा इंतजार खत्म, नया नियम लागू

    अमेरिकी वीजा के लिए लम्बा इंतजार खत्म, नया नियम लागू

    नई दिल्लीः अमेरिका का वीजा पाने के लिए भारतीयों को अपॉइंटमेंट प्राप्त करने में 500 से अधिक दिनों का लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। बैकलॉग को कम करने के प्रयासों के बावजूद लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि इस समय को कम करने के लिए अमेरिकी दूतावास अब एक नया तरीका भी लेकर आया है। भारत में अमेरिकी दूतावास ने रविवार को कहा कि जो भारतीय विदेश यात्रा कर रहे हैं, वे उस जगह के अमेरिकी दूतावास या वाणिज्य दूतावास से वीजा अपॉइंटमेंट प्राप्त कर सकते हैं।

    अमेरिकी दूतावास ने थाईलैंड का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां भारतीय यात्री बी1 और बी2 वीजा (यात्रा और कारोबार) के लिए अपॉइंटमेंट हासिल कर सकते हैं। वीजा प्राप्त करने के प्रोसेस में होने वाली देरी को कम करने के लिए अमेरिका ने हाल ही में नई पहल शुरू की, जिसमें पहली बार अमेरिका जाने वाले लोगों के लिए Special Interview आयोजित करना और कांसुलर स्टाफ की संख्या बढ़ाना शामिल है। वीजा बैकलॉग को कम करने के लिए दिल्ली में अमेरिकी दूतावास, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता और हैदराबाद में वाणिज्य दूतावासों ने भी 21 जनवरी को “विशेष शनिवार साक्षात्कार दिवस” ​​​​आयोजित किया था।

    आपको बता दें कि अमेरिकी विदेश विभाग ने पिछले दिनों अमेरिकी वीजा के आवेदकों के लिए कई तरह की छूट का भी प्रावधान किया है। साथ ही भारत में अमेरिकी मिशन ने दो सप्ताह पहले 2,50,000 से अधिक अतिरिक्त बी1/बी2 अपॉइंटमेंट जारी किए। गौरतलब है कि भारत उन कम देशों में से एक था जहां कोरोनोवायरस से संबंधित यात्रा प्रतिबंध हटाए जाने के बाद अमेरिकी वीजा के लिए आवेदनों में बड़ी तेजी देखी गई।

  • पूर्व राष्ट्रपति का हुआ निधन, दुबई के अस्पताल में ली अंतिम सांस

    पूर्व राष्ट्रपति का हुआ निधन, दुबई के अस्पताल में ली अंतिम सांस

    नई दिल्ली। पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ का दुबई में निधन हो गया. परवेज मुशर्रफ गंभीर बीमारियों के शिकार थे. मुशर्रफ 2001 से 2008 तक पाकिस्तान के राष्ट्रपति रहे. इसके पहले वो आर्मी चीफ भी रहे चुके थे. परवेज मुशर्रफ को करगिल की जंग के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया जाता है. उन्होंने ही पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री मियां नवाज शरीफ का तख्तापलट किया था.

    आपको बताते चलें कि मुशर्रफ मार्च 2016 में इलाज कराने के लिए दुबई गए थे, तभी से वह वहीं अपना इलाज करा रहे थे. इसके पहले भी कई बार उनकी मौत की खबर आ चुकी थीं लेकिन तब उनके परिवार ने उन खबरों का खंडन किया था. लंबी बीमारी के दौरान वो कई बार वेंटिलेटर पर रहे. लेकिन इस बार वो जिंदगी की जंग हार गए.

    पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को फांसी की सजा सुनाई गई है. पाकिस्तान के इतिहास में पहली बार पेशावर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस वकार अहमद सेठ की अध्यक्षता में विशेष अदालत की तीन सदस्यीय पीठ ने ऐसी सजा सुनाई थी.

  • अहमदी मस्जिद पर TLP समर्थकों की भीड़ ने की तोड़फोड़, देखें वीडियो

    अहमदी मस्जिद पर TLP समर्थकों की भीड़ ने की तोड़फोड़, देखें वीडियो

    कराचीः पाकिस्तान इन दिनों गंभीर आर्थिक संकट से घिरा हुआ है। इसके बावजूद हमारे पड़ोसी देश में धार्मिक कट्टरता अपने चरम पर है। बता दें कि एक वीडियो सामने आया है, जिसमें कुछ लोग पाकिस्तान के कराची शहर में एक मस्जिद की मीनारों को सरेआम तोड़ते नजर आ रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तोड़फोड़ करने वाले लोग तहरीक ए लब्बैक पाकिस्तान के सदस्य हैं और जिस मस्जिद की मीनारों को तोड़ा जा रहा है, वह एक अहमदी मस्जिद है।

    बता दें कि अहमदिया मुस्लिम, पाकिस्तान का एक अल्पसंख्यक समाज है और पाकिस्तान में उन्हें दूसरे दर्जे का नागरिक माना जाता है। बहुत से अहमदिया मुसलमानों को ईशनिंदा के झूठे आरोपों में मौत की सजा भी दी जा चुकी है। पाकिस्तान का धार्मिक संगठन तहरीक ए लब्बैक पाकिस्तान खास तौर पर अहमदिया मुसलमानों के खिलाफ मुखर रहता है।

    बीते साल अक्टूबर में तहरीक ए लब्बैक पाकिस्तान के एक मौलवी के बयान ने खूब सुर्खियां बटोरी थी। अपने बयान में मौलवी ने अहमदिया समुदाय की गर्भवती महिलाओं पर हमला करने का निर्देश दिया था। मौलवी ने ऐसा इसलिए कहा था ताकि कोई अहमदिया पैदा ही ना हो सके। टीएलपी के मौललवी मोहम्मद नईम चट्ठा का यह वीडियो खूब वायरल हुआ था। 

  • लाखों की तादाद में सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे लोग, देखें वीडियो

    लाखों की तादाद में सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे लोग, देखें वीडियो

    ब्रिटेन: वेतन बढ़ाने और महंगाई को नियंत्रित करने की मांग को लेकर ब्रिटेन में पांच लाख से ज्यादा लोग लंदन की सड़कों पर हैं। प्रदर्शन करने वालों में टीचर्स, सरकारी कर्मचारी और अन्य लोग शामिल हैं। इसे ब्रिटेन का पिछले एक दशक में अब तक का सबसे बड़ा प्रदर्शन माना जा रहा है।

    पीएमओ ने ऐसा नहीं करने की अपील की

    जानकारी के अनुसार प्रदर्शन से पहले पीएमओ ने लोगों को ऐसा नहीं करने की अपील की थी। बताया जा रहा है कि प्रदर्शन में करीब तीन लाख टीचर्स शामिल हैं। जिससे बड़ी संख्या में स्कूलों पर असर पड़ रहा है। दरअसल, पूर्व में कोरोना और फिर अब यूक्रेन जंग से ब्रिटेन में महंगाई है। जिससे लोग परेशान हैं।

    12 सालों में लगातार टीचर्स के वेतन में कमी 

    गौरतलब है कि इंस्टीट्यूट फॉर फिस्कल स्टडीज के मुताबिक साल 2010 से 2022 के बीच में टीचर्स के वेतन में 9 से 10 फीसदी की कमी दर्ज की गई है। यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज की प्रोफेसर कैथरीन बर्नार्ड ने मीडिया में कहा, ब्रिटेन में हड़ताल करने के खिलाफ काफी सख्त कानून हैं। भारी संख्‍या में सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करना इतना आसान नहीं है। फिर भी अगर पांच लाख से ज्यादा लोग अपने घरों से निकले हैं तो मामला गंभीर है।

  • बर्फीली सड़क पर फिसलने से कई वाहनों से टकराई बस, वीडियो वायरल

    बर्फीली सड़क पर फिसलने से कई वाहनों से टकराई बस, वीडियो वायरल

    वैंकूवरः बर्फबारी के समय सड़कों पर बर्फ की परत जम जाती है जो आने-जाने वाले वाहनों के लिए मुश्किलें पैदा कर देती है। कभी-कभी बर्फीली सड़कों पर ड्राइविंग करना अत्यधिक खतरनाक हो सकता है। अक्सर ड्राइवर इन सड़कों पर अपने वाहनों से नियंत्रण खो देते हैं। हाल ही में कनाडा में हुई एक सड़क दुर्घटना का वीडियो सामने आया है, जिसमें एक बस बर्फ पड़ी सड़क पर अचानक फिसल जाती है और आस-पास की कुछ कारों से टकरा जाती है।

    वायरल हो रहा घटना का ये सीसीटीवी एक फरवरी की सुबह का बताया जा रहा है। वैंकूवर सिटी न्यूज के अनुसार हुई इस घटना में किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। ये घटना वहीं किसी घर में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। जिसकी क्लिप सोशल मीडिया पर खूब शेयर हो रही है। वीडियो में तेज धमाके की आवाज भी सुनी जा सकती है जब ये बेकाबू हुई बस बर्फ की वजह से साइड में मुड़ जाती है और दूसरी कारों से टकरा जाती है।

  • दुनिया की सबसे छोटी हवाई यात्राः सिर्फ 53 सेकेंड के लिए उड़ान भरता है विमान

    दुनिया की सबसे छोटी हवाई यात्राः सिर्फ 53 सेकेंड के लिए उड़ान भरता है विमान

    स्कॉटलैंडः आपने अब तक दुनिया की सबसे लंबी उड़ान वाली फ्लाइट के बारे में सुना होगा। भारत से अमेरिका या फिर यूरोप जाएं तो आपको कई घंटे तक फ्लाइट का सफर करना पड़ता है। यहां तक कि अगर आप दिल्ली से मुंबई भी फ्लाइट के जरिए जाएं तो भी आप को कम से कम डेढ़ से 2 घंटे का समय लगेगा। लेकिन अगर हम आपसे कहें कि दुनिया में एक हवाई उड़ान इतनी ज्यादा छोटी है कि उसे टेक ऑफ के बाद गंतव्य तक पहुंच कर लैंड करने में मात्र 53 सेकेंड का समय लगता है तो आप क्या कहेंगे। सबसे बड़ी बात कि ये एक कमर्शियल उड़ान होती है और हर रोज कई यात्री इस फ्लाइट का सहारा लेकर एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते हैं।

    कहां होती है इतनी छोटी उड़ान

    सीएनएन के अनुसार, करीब 53 सेकंड की यह उड़ान स्कॉटलैंड में होती है। दरअसल, स्कॉटलैंड के दो टापूओं के बीच ये हवाई जहाज उड़ान भरता है। ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि इन दोनों के बीच कोई पुल नहीं है। इनके बीच का समुंदर इतना पथरीला है कि यहां नाव चलाना भी बहुत मुश्किल है। इस वजह से एक टापू से दूसरे टापू पर जाने के लिए यात्री इस हवाई जहाज का सहारा लेते हैं। इस फ्लाइट को लोगान एयर ऑपरेट करती है, जो पिछले 50 सालों से यहां सर्विस दे रही है।

    कितना लगता है किराया

    53 सेकंड की इस सबसे छोटी उड़ान के लिए हर रोज यात्रियों को लगभग 14 पाउंड खर्च करने पड़ते हैं। भारतीय रुपयों में अगर इसे कन्वर्ट किया जाए तो यह 1815 के आसपास आएगा। हालांकि, स्कॉटलैंड के हिसाब से यह किराया बेहद कम है। दरअसल, यहां की सरकार इन दोनों टापूओं पर रहने वाले लोगों को इस प्लेन किराए में सब्सिडी देती है, जिसकी वजह से इन लोगों को किराया कम देना पड़ता है। बता दें इन दोनों टापूओं पर लगभग 690 लोग रहते हैं।

    क्या है इन टापुओं का नाम

    इनमें से एक टापू का नाम है वेस्ट्रे और दूसरे टापू का नाम है पापा वेस्ट्रे। वेस्ट्रे में जहां 600 लोग रहते हैं। वही पापा वेस्ट्रे में करीब 90 लोग रहते हैं। जिस फ्लाइट से यह लोग यात्रा करते हैं, वह बहुत छोटी फ्लाइट है और इसमें एक बार में सिर्फ 8 लोग ही सवार हो सकते हैं। यहां रहने वाले लोगों का गुजारा ज्यादातर टूरिज्म से होता है। दुनियाभर से लोग इस छोटी उड़ान का हिस्सा भरने आते हैं। अगर आप भी इस छोटी उड़ान का हिस्सा बनना चाहते हैं तो आपको इसके लिए स्कॉटलैंड जाना पड़ेगा।