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  • Premanand Maharaj की शरण में पहुंचे कुमार सानू, बताई दिल की बात

    Premanand Maharaj की शरण में पहुंचे कुमार सानू, बताई दिल की बात

    धर्म: वृंदावन में स्थित प्रेमानंद महाराज से मिलने दूर-दूर से लोग आते हैं। कई स्टार्स सेलेब्स अपने मन की शांति की तलाश में उनसे मिलने मीलों दूर आते हैं। विराट कोहली-अनुष्का शर्मा, शिल्पा शेट्टी-राज कुंद्र, बी प्रॉक के अलावा हाल ही में राजपाल यादव ने भी प्रेमानंद महाराज से मिलने के लिए गए थे। अब प्रेमानंद महाराज से मिलने के लिए मशहूर सिंगर कुमार सानू पहुंचे। उन्होंने महाराज से आशीर्वाद भी लिया।

    प्रेमानंद महाराज से मिलने पहुंचे कुमार सानू

    कुमार सानू प्रेमानंद महाराज से मिलने उनके आश्रम में पहुंचे। वहां पर उनकी टीम ने सानू का परिचय करवाया। टीम ने कहा कि कुमार सानू की उपलब्धि कितनी बड़ी है। वो अभी तक 27 हजार गाने गा चुके हैं। उन्हें पद्मश्री भी मिल चुका है। इसके बाद कुमार सानू ने हाथ जोड़कर प्रेमानंद महाराज से कहा कि – आपको देख लिया बस हो गया। सिर्फ आपका आशीर्वाद लेने आए। बस आप अपना आशीर्वाद दीजिएगा कि मैं जो काम कर रहा हूं वो ठीक से कर पाऊं।

    इससे नीचे स्तर पर मत जाना

    इसके बाद प्रेमानंद महाराज ने कहा कि – देखिए पूर्व में आपने कोई बड़ा तप किया होगा जो आप इतने लोकप्रिय हुए हैं। ये कोई छोटी-मोटी बात नहीं होती है। जनमानस स्तर पर आपने अपने अधिकार बनाया हमारे भारतीय और अन्य भी जो प्रियजन हैं। उनके सदवचन आपकी वाणी में हैं। ये पूर्व जन्म के अच्छे कर्मों का फल है। अब कुछ ऐसा कीजिए कि इससे नीचे न जाएं। समझ रहे हैं ना ऐसा भजन ऐसा पुण्य ऐसा लोकोप्कार कीजिएगा जिससे भारत में आप जन्में फिर आपका यश हो। इससे नीचे स्तर पर अब जाना ठीक नहीं है। इतना फेमस होने के बाद अगर हमारी गति बिगड़ जाए तो ये ठीक नहीं है। अब अगर हम जन्में तो मनुष्ट रुप में ही जन्में और समाज की सेवा करें। बहुत सुंदर, अच्छा लगा आपसे मिलकर। इसके बाद कुमार सानू ने प्रेमानंद महाराज को अपना मशहूर गाना जब कोई बात बिगड़ जाए भी सुनाया। महाराज ने बड़े ध्यान से उनका गाना सुना। सिंगर ने कहा कि – ‘ये गाना हम सबके लिए गा सकते हैं, माता-पिता, भाई-बहन, पति-पत्नी कोई भी कह सकता है’।

    कुनिका सदानंद संग लिव इन रिलेशनशिप में थे सिंगर

    कुमार सानू पिछले कुछ दिनों से अपने अफेयर, टूटी शादी और एक्स वाइफ को लेकर काफी चर्चा बटौर रहे हैं। सिंगर एक्ट्रेस कुनिका सदानंद के साथ भी लिव इन रिलेशन में रह चुके हैं। कुनिका ने खुद अपना रिश्ता शादीशुदा सिंगर के साथ बिग बॉस में कबूल किया था। हाल ही में सानू की एक्स वाइफ रीता भट्टाचार्या ने भी उन पर चीटिंग समेत कई आरोप लगाए थे। जवाब में कुमार सानू ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई और मानहानि का दावा ठोका था। केस अभी भी कोर्ट में चल रहा है।
  • कैसे मनाना चाहिए नया साल?Premanand Maharaj ने बताया नई शुरुआत का तरीका

    कैसे मनाना चाहिए नया साल?Premanand Maharaj ने बताया नई शुरुआत का तरीका

    धर्म: वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज के विचार व्यक्ति का जीवन बदल देते हैं। महाराज भक्तों को जीवन की कई शिक्षाएं देते हैं। सोशल मीडिया पर उनके लाखों फॉलोअर्स है। अपने सत्संग के जरिए वह लोगों का मार्गदर्शन करते हैं। कई सारे युवा भी महाराज की बातों को बहुत ध्यान से सुनते हैं। बॉलीवुड के कई दिग्गज एक्टर भी प्रेमानंद महाराज के पास अपनी समस्याओं को लेकर पहुंच चुके हैं। अब हाल ही में क्रिकेटर विराट कोहली और उनकी पत्नी अनुष्का शर्मा भी महाराज के पास पहुंचे थे।

    नया साल कैसे मनाएं

    प्रेमानंद महाराज का सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें एक भक्त ने उनके पूछा कि साल 2026 का जश्न कैसे मनाना चाहिए। साल के पहले दिन क्या करना चाहिए। इस पर प्रेमानंद महाराज ने उत्तर देते हुए कहा कि सुबह गायों को चारा खिलाएं। इसके साथ ही पक्षियों को दाना डालें।
    घर के लोग मिलकर अच्छा भोजन बनाओ और उसको गरीबों में बांट दो। ऐसा करने से पूरा साल मंगलमय जाएगा। जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहेगी। साथ ही प्रेमानंद महाराज ने कहा कि घी का दीपक जलाएं और ये प्रण लें कि आज से कोई गलत काम नहीं करेंगे। साथ ही नाम कीर्तन करेंगे।

    नए साल पर न करें नशा

    इसके अलावा प्रेमानंद महाराज ने कहा कि कुछ लोग नए साल पर मांस खाते हैं, शराब पीते हैं पर यह गलत है। उन्होंने कहा कि नए साल पर प्रण लेना चाहिए कि अब इन चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए। इन सभी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।

    मेहनत की कमाई कोई नहीं ले सकता

    एक व्यक्ति ने इस दौरान प्रेमानंद से पूछा कि अगर हमारी मेहनत की कमाई कोई हड़प लेता है तो हमें क्या करना चाहिए क्योंकि इससे हमारा मन उस व्यक्ति से बहुत खट्टा हो जाता है। इस पर महाराज ने कहा कि – ऐसा न सोचिए क्योंकि ऐसा भी हो सकता है कि जो आपके साथ हो रहा है वो पिछले जन्म में आपने किया हो उस व्यक्ति के साथ। कई बार हमारे साथ जो होता है वो पिछले जन्मों के कर्मों का कारण होता है। ऐसे में आपको विवेक का इस्तेमाल करना चाहिए। आपको सोचना चाहिए कि चलो हम निपट गए इस व्यक्ति से उससे बैर नहीं करना चाहिए।
  • हनुमान जी को नवनिधि के दाता क्यों कहा जाता है? जानें इसका क्या अर्थ है

    हनुमान जी को नवनिधि के दाता क्यों कहा जाता है? जानें इसका क्या अर्थ है

    हनुमान चालीसा में गोस्वामी तुलसीदास जी ने लिखा है। अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता, अस बर दीन जानकी माता।इसका मतलब है कि हनुमान जी को नौ प्रकार की दिव्य निधियों (नवनिधि) देने का अधिकार है। ये निधियां केवल भौतिक संपत्ति ही नहीं बल्कि आध्यात्मिक शक्तियों और समृद्धि का प्रतीक भी हैं। नवनिधि सिद्धि क्या है? नवनिधि सिद्धि का अर्थ है नौ दिव्य निधियों पर पूर्ण अधिकार।
    • पुराणों के अनुसार ये निधियां भगवान कुबेर की संपत्ति मानी जाती हैं।
    • हनुमान जी इन निधियों के स्वामी हैं।
    • वे इनका उपयोग स्वयं नहीं करते, बल्कि योग्य भक्तों को देते हैं।
    • हनुमान जी की भक्ति से साधक को धन, स्वास्थ्य, सम्मान और मोक्ष तक की प्राप्ति होती है।
    चालीसा में उल्लेख है कि यह वरदान माता जानकी (सीता जी) से मिला। यह दिखाता है कि हनुमान जी की भक्ति और सेवा कितनी महान है। नवनिधियां कौन-कौन सी हैं? शास्त्रों में नौ निधियों का वर्णन इस प्रकार है
    1. पद्म – कमल जैसी शुद्धता, सौभाग्य और समृद्धि।
    2. महापद्म – असीम धन और वैभव।
    3. शंख – कीर्ति, सम्मान और सफलता।
    4. मकर – शक्ति और सुरक्षा।
    5. कच्छप – स्थिरता और दीर्घायु।
    6. मुक्ता – सौंदर्य और शांति।
    7. नील – दुर्लभ और मूल्यवान संपदा।
    8. खर्व – विशाल धन।
    9. कण – सूक्ष्म लेकिन अनंत विस्तार वाली निधि।
    इन निधियों से केवल धन ही नहीं, बल्कि जीवन में संतुलन, सम्मान और आध्यात्मिक शक्ति भी मिलती है। नवनिधि सिद्धि का आध्यात्मिक महत्व
    • यह सिद्धि केवल भौतिक लाभ नहीं, बल्कि मन की शांति, स्वास्थ्य और मोक्ष का मार्ग भी देती है।
    • हनुमान जी की भक्ति से साधक संतोष, संयम, सेवा और शुद्ध आचरण सीखता है।
    • यह सिद्धि साधना, मंत्र जप और ईश्वर की कृपा से प्राप्त होती है।
    • हनुमान जी स्वयं इन शक्तियों का उपयोग नहीं करते, बल्कि भक्तों को देते हैं। यह उनकी निस्वार्थ भक्ति और महानता का प्रतीक है।
     
  • इस दिशा में लगाएं Money Plant, घर में बनी रहेगी सुख समृद्धि

    इस दिशा में लगाएं Money Plant, घर में बनी रहेगी सुख समृद्धि

    धर्मः सभी का लोकप्रिय पौधा मनी प्लांट सभी के घर आम पाया जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार अगर मनी प्लांट को घर में सही दिशा और सही तरीके से लगाया जाए, तो यह घर में पॉजिटिव एनर्जी लाने के साथ-साथ आर्थिक संकट को कम करने में भी मददगार होता है।इसी वजह से लोग अपने घर में ऐसे पौधे लगाना पसंद करते हैं जो धन वृद्धि का संकेत माने जाते हैं। अधिकतर लोग इसे अपने लिविंग रूम, बालकनी या ऑफिस में लगाते हैं, ताकि घर में सुख-समृद्धि और बरकत बनी रहे। लेकिन कई बार घर में मनी प्लांट लगाने के बाद भी उसका कोई खास फल नहीं मिल पाता इसके पीछे कई वजहें जिम्मेदार होती हैं।

    मनी प्लांट को कहीं भी लगा देना कभी-कभी परेशानियां पैदा कर सकता है। वास्तु शास्त्र में दिशा का विशेष महत्व है, इसलिए मनी प्लांट की गलत दिशा न सिर्फ इसके सकारात्मक प्रभाव को कम कर देती है, बल्कि कभी-कभी घर में नकारात्मक ऊर्जा, अनावश्यक तनाव और आर्थिक रुकावटें भी पैदा कर सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि किसी भी पौधे की ऊर्जा उसके स्थान के अनुसार बदलती है, और मनी प्लांट तो विशेष रूप से धन, समृद्धि और शांति का कारक माना जाता है।

    वास्तु शास्त्र के अनुसार, उत्तर या पूर्व दिशा मनी प्लांट के लिए सबसे शुभ मानी जाती है। उत्तर दिशा धन के देवता कुबेर की दिशा मानी जाती है, इसलिए यहां मनी प्लांट लगाने से आर्थिक समस्याएं कम होती हैं और धन वृद्धि के योग बनते हैं। पूर्व दिशा सूर्य उदय की दिशा है, जो सकारात्मक ऊर्जा, स्वास्थ्य और तरक्की का प्रतीक है। इस दिशा में मनी प्लांट लगाने से घर में शांति रहती है और परिवार के सदस्यों में अनावश्यक विवाद नहीं होते।

  • देशभर में आस्था का प्रमुख केंद्र बना ये प्रसिद्ध मंदिर, 225 करोड़ रुपए से पार हुआ चढ़ावा

    देशभर में आस्था का प्रमुख केंद्र बना ये प्रसिद्ध मंदिर, 225 करोड़ रुपए से पार हुआ चढ़ावा

    चित्तौड़गढ़ः भारतीयों में मंदिरों को लेकर खास आस्था देखी जाती है। लोग दिल खोलकर मंदिरों में चढ़ावा चढ़ाते है और भगवान के प्रति अपनी आस्था का प्रगटावा करते हैं। मंडफिया में एक ऐसा मंदिर है जो अब देशभर में आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया है। श्री सांवलियाजी के नाम से मशहूर मंदिर में आने वाले भक्त भगवान को अपना साझेदार मानकर अपनी आय का हिस्सा चढ़ाते हैं। इस श्रद्धा का असर मंदिर के चढ़ावे में साफ दिख रहा है। इस साल वार्षिक चढ़ावा 225 करोड़ रुपए पार कर गया है, जबकि 30 साल पहले यह सिर्फ 65 लाख रुपए था। इस तरह चढ़ावे में 340 गुना से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। अब मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या भी लाखों में पहुंच गई है। विशेष अवसरों पर तो एक दिन में 15 लाख से अधिक भक्त दर्शन के लिए आते हैं। जानकारी मुताबिक, श्री सांवलिया जी मंदिर में पहली बार साल 1991 में जब दान पात्र खोला गया था। साल के अंत में यानी 1991-92 में मंदिर को करीब 65.45 लाख रुपए की आय हुई थी। तब से यह सिलसिला लगातार बढ़ता गया। इसके बाद सांवरा सेठ की ख्याति ऐसी फैली कि अगले ही साल 1992-93 में 1.75 करोड़ का कुल चढ़ावा आया। इसी तरह, यह कारवां 2, 3 करोड़ की राशि से बढ़कर साल 2024–25 तक करीब 225 करोड़ रुपए, यानी लगभग ढाई अरब रुपए तक पहुंच गई। यह वृद्धि सिर्फ पैसों की नहीं, बल्कि भगवान सांवलिया सेठ में बढ़ते विश्वास और भक्तों की अटूट आस्था की कहानी भी बयां करती है। नकदी, आभूषणों के साथ स्टांप पेपर भी चढ़ातें हैं भक्त यहां आने वाले भक्त भगवान को सिर्फ मन्नतें नहीं मांगते, बल्कि अपनी कमाई का एक हिस्सा ‘सांवरा सेठ’ के नाम पर चढ़ाते हैं। कई तो अपने व्यापार या नौकरी की आमदनी में भगवान को “पार्टनर” बनाकर नियमित रूप से हिस्सा अर्पित करते हैं। कुछ भक्त तो इस पार्टनरशिप को स्टांप पेपर पर लिखकर भी मंदिर को सौंपते हैं। मंदिर में हर महीने अमावस्या से पहले चतुर्दशी के दिन दान पात्र खोले जाते हैं। इसमें इतनी बड़ी मात्रा में चढ़ावा आता है कि पूरा गिनने में कम से कम 5 से 10 दिन का समय लग जाता है। भक्त सिर्फ नकद ही नहीं, बल्कि मनी ऑर्डर, चेक और ऑनलाइन के माध्यमों से भी दान करते हैं। इतना ही नहीं, विदेशी पर्यटक भी आते है और वे फॉरेन करेंसी भी चढ़ा कर जाते है। काउंटिंग के दौरान कई फॉरेन करेंसी भी मिलते है। इसके अलावा सोने-चांदी के गहने, सिक्के, ऐंटीक आइटम्स और आभूषणों के रूप में भी चढ़ावा आता है। श्री सांवलिया जी मंदिर की ख्याति अब सिर्फ चित्तौड़गढ़ या मेवाड़ तक सीमित नहीं रही। राजस्थान के हर कोने से लेकर देश-विदेश तक के भक्त यहां आकर दर्शन करते हैं।

    ये है मान्यता

    करीब 250 से 300 साल पहले जब बागुंड का इलाका जंगलों से घिरा था, तब मंडफिया गांव के एक ग्वाला भोलीराम गुर्जर रोज अपनी गायों को चराने वहां जाया करते थे। एक दिन दोपहर में जब वह एक पेड़ के नीचे आराम कर रहे थे, तभी उन्हें सपने में भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप श्री सांवलिया सेठ ने दर्शन दिए और कहा – मैं यहीं दबा हुआ हूं, मुझे बाहर निकालो। भोलीराम ने जब यह बात गांववालों को बताई और खुदाई शुरू की, तो वहां से तीन एक जैसी मूर्तियां निकलीं। ग्रामीणों ने इन मूर्तियों को श्रीकृष्ण का ही रूप माना और उनके श्याम वर्ण के कारण उन्हें ‘सांवलिया सेठ’ नाम दिया गया। तीनों मूर्तियों में से एक मूर्ति भोलीराम अपने घर मंडफिया लेकर आए और उसे घर के परिंडे (मटकी रखने की जगह, जो अभी सांवरा सेठ की मूर्ति स्थापित है) में स्थापित कर पूजा-पाठ शुरू कर दी। धीरे-धीरे इन तीनों स्थानों पर मंदिर बने, लेकिन मंडफिया स्थित मंदिर की ख्याति सबसे ज्यादा बढ़ी। यही वह स्थान है, जिसे आज श्री सांवलिया जी मंदिर के रूप में जाना जाता है।
  • ये है धनतेरस का इतिहास, आयुर्वेद से भी जुड़ा है त्योहार

    ये है धनतेरस का इतिहास, आयुर्वेद से भी जुड़ा है त्योहार

    धर्मः कार्तिक माह (पूर्णिमान्त) की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन पूरे देश में धनतेरस मनाया जाता है। इस त्योहार को दिवाली की शुरुआत भी बताया जाता है। वहीं भारत सरकार ने धनतेरस को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। इसके पीछे भी बहुत बड़ा इतिहास छिपा हुआ है। वहीं जैन आगम में धनतेरस को ‘धन्य तेरस’ या ‘ध्यान तेरस’ भी कहते हैं। भगवान महावीर इस दिन तीसरे और चौथे ध्यान में जाने के लिये योग निरोध के लिए चले गए थे। 3 दिन के ध्यान के बाद योग निरोध करते हुए दीपावली के दिन निर्वाण को प्राप्त हुए। तभी से यह दिन धन्य तेरस के नाम से प्रसिद्ध हुआ। 2025 में धनतेरस 18 अक्टूबर यानि आज मनाया जा रहा है। आज लोग पूजा पाठ करेंगे और घर में कोई सोने-चांदी की चीज भी खरीदेंगे जो घर में खुशहाली और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है। कई लोग धनतेरस के इतिहास से जागरूक नहीं है, जिसके बारे में आज इस आर्टिकल के माध्यम से जानकारी देंगे। ये जानकारी पटकथाओं और ज्योतिष शास्त्रों से ली गई है जो केवल सूचना के लिए है।

    ये है मान्यता

    मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान इस दिन भगवान धन्वंतरि हाथ में अमृत कलश और आयुर्वेद की पुस्तक लेकर प्रकट हुए थे। भगवान धन्वंतरि के नाम पर ही इस पर्व का नाम धनतेरस पड़ा, क्योंकि उस दिन कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि थी। इसी कारण इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है, जिन्हें आयुर्वेद का जनक और स्वास्थ्य, समृद्धि व दीर्घायु का देवता माना जाता है। हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, भगवान धन्वंतरि भगवान विष्णु के अवतार हैं। वे आयुर्वेद के देवता और चिकित्सा शास्त्र के प्रवर्तक माने जाते हैं। पुराणों में बताया गया है कि उनका प्रादुर्भाव समुद्र मंथन के दौरान हुआ था। देवताओं और असुरों के बीच अमृत प्राप्ति के लिए समुद्र मंथन किया गया था, उसमें भगवान धन्वंतरि अमृत का कलश लेकर प्रकट हुए थे। इस कारण उन्हें अमृत का प्रतीक और जीवन रक्षक माना जाता है। इसके अलावा, धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि के साथ माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की भी पूजा की जाती है। यह पर्व धन, समृद्धि और स्वास्थ्य के लिए विशेष माना जाता है। प्रदोष काल में दीपदान और यम तर्पण की परंपरा भी इस दिन निभाई जाती है, ताकि अकाल मृत्यु से रक्षा हो। भागवत पुराण और विष्णु पुराण में भगवान धन्वंतरि का उल्लेख इस प्रकार है कि वे चार भुजाओं वाले, शंख, चक्र, जलौका और अमृत कलश धारण किए हुए प्रकट हुए थे। उनकी उत्पत्ति के बारे में वेदों में कहा गया है… ‘कार्तिकेकृष्ण पक्षे त्रयोदश्यां गुरोर्दिने। हस्त नक्षत्र संयुक्ते यामे प्राथमिके निशि। धन्वंतर्याख्यया चाहं धनंगुप्तमिवादते। अवतीर्णोयतस्तस्मात् सा तिथि सर्वकामदा।’ इसका अर्थ है कि भगवान धन्वंतरि का प्रादुर्भाव कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को, हस्त नक्षत्र में, रात्रि के प्रथम प्रहर (प्रदोष काल) में हुआ। इस कारण यह तिथि सभी कामनाओं को पूर्ण करने वाली मानी जाती है।

    इस वजह से है भगवान धन्वंतरि का आयुर्वेद से है संबंध

    भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद का जनक कहा जाता है। माना जाता है कि उन्होंने मानवजाति को स्वस्थ जीवन जीने की कला सिखाई। आयुर्वेद एक प्राकृतिक चिकित्सा और जीवनशैली पर आधारित है। इसका ज्ञान भगवान धन्वंतरि द्वारा ही दिया गया था। वे न केवल रोगों के उपचार, बल्कि रोगों से बचाव और स्वस्थ जीवन जीने के सिद्धांतों के प्रतीक हैं। आयुर्वेद ग्रंथों में उनकी शिक्षाओं का उल्लेख है और चरक संहिता व सुश्रुत संहिता जैसे ग्रंथ उनसे प्रेरित हैं।
  • Dhanteras आजः इस शुभ मुहूर्त पर करें सोना-चांदी की खरीदारी, जानें पूजन विधि

    Dhanteras आजः इस शुभ मुहूर्त पर करें सोना-चांदी की खरीदारी, जानें पूजन विधि

    धर्म: आज देशभर में धनतेरस का पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन कुबेर देवता और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन आप जो भी खरीदते हैं, उसका लाभ पूरे साल जातक को प्राप्त होता है। इसलिए, लोग इस दिन सोना-चांदी और यहां तक कि वाहन भी खरीदते हैं।

    द्रिक पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि का आरंभ 18 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 18 मिनट पर होगा और तिथि का समापन 19 अक्टूबर को दोपहर 1 बजकर 51 मिनट पर होगा। धनतेरस पर पहला मुहूर्त आज सुबह 8 बजकर 50 मिनट से लेकर सुबह 10 बजकर 33 मिनट तक रहेगा। उसके बाद दूसरा मुहूर्त आज सुबह 11 बजकर 43 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 28 मिनट तक रहेगा और तीसरा मुहूर्त आज शाम 7 बजकर 16 मिनट से रात 8 बडकर 20 मिनट तक रहेगा।

    खरीदारी का चौघड़िया मुहूर्त
    शुभ कालः सुबह 7 बजकर 49 मिनट से सुबह 9 बजकर 15 मिनट तक
    लाभ उन्नति मुहूर्तः दोपहर 1 बजकर 32 मिनट से दोपहर 2 बजकर 57 मिनट तक
    अमृत कालः दोपहर 2 बजकर 57 मिनट से शाम 4 बजकर 23 मिनट तक
    चर कालः दोपहर 12 बजकर 6 मिनट से दोपहर 1 बजकर 32 मिनट तक

    पूजन का मुहूर्त
    द्रिंक पंचांग के अनुसार, धनतेरस पर आज पूजन का मुहूर्त शाम 7 बजकर 16 मिनट से शुरू होकर रात 8 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। इस शुभ मुहूर्त में आप मां लक्ष्मी, कुबेर देवता और भगवान धन्वंतरि की पूजा करें, जिनकी उपासना से आपको सुख-समृद्धि प्राप्त होगी।

    धनतेरस के दिन सूर्यास्त होने के बाद घर के मुख्य द्वार पर चार मुखी यम दीपक जलाया जाता है। जो कि यम देवता के लिए प्रज्वलित किया जाता है। इस अनुष्ठान को यम दीपक और दीपदान भी कहा जाता है, जो कि परिवार की सुख-शांति के लिए जलाया जाता है।

    आज यम दीपक जलाने का मुहूर्त शाम 5 बजकर 48 मिनट से लेकर शाम 7 बजकर 04 मिनट तक रहेगा, जिसकी अवधि 1 घंटे 16 मिनट की रहेगी।

    धनतेरस के दिन क्या खरीदना चाहिए?
    ज्योतिषियों के अनुसार, धनतेरस के दिन खरीदारी करने से घर में सकारात्मता का वास होता है। धनतरेस पर सोना और चांदी के आभूषण और सिक्के खरीदने से मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
    बर्तन: इस दिन तांबे और पीतल के बर्तन खरीदना बहुत ही शुभ माना जाता है।
    झाड़ू: धनतेरस के दिन नई झाड़ू खरीदना भी अच्छा माना जाता है. कहते हैं कि इस दिन नई झाड़ू लाने से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है।

  • Rangoli के ये Design भरेंगे दिवाली के त्योहार में रंग, जानें बनाने का तरीका

    Rangoli के ये Design भरेंगे दिवाली के त्योहार में रंग, जानें बनाने का तरीका

    धर्मः दिवाली का त्योहार रोशनी, खुशियों और सजावट का प्रतीक है। इस दिन हर घर को दीपों, फूलों और Rangoli Designs से सजाया जाता है। पूरे देश में लोग अपने घरों की दीवारों पर flower garlands, बालकनी में लाइट्स और आंगन में रंग-बिरंगी रंगोली (Rangoli) बनाकर त्योहार को और खास बना देते हैं।

    रंगोली न सिर्फ घर की शोभा बढ़ाती है, बल्कि इसे शुभता और सकारात्मकता का प्रतीक भी माना जाता है। दिवाली पर रंगोली बनाना पारंपरिक रूप से good luck symbol माना गया है। वहीं कई लोगों को रंगोली बनाने में दिक्कत आती है। वह कुछ आसान डिजाइनों से रंगोली को खूबसूरत और कम समय में आकृषक बना सकते हैं।

    इसमें पहले नंबर पर है फूलों जैसी दिखने वाली रंगोली। इसको बनाने के लिए चार अलग-अलग फूलों को मिलाकर इस डिजाइन को बनाया जा सकता है। यह रंगोली दिखने में बहुत डिटेल्ड लगती है, लेकिन इसे बनाना बेहद आसान है। सिर्फ 10 मिनट में आप इसे फर्श या आंगन में तैयार कर सकते हैं।

    इसी के साथ दीप वाली रंगोली भी काफी ट्रेंड में है। यह रंगोली देखने में बेहद खूबसूरत और बनाने में आसान है। आपको बस एक बेसिक पेटर्न बनाना है और फिर उसमें लाल, सफेद और नीले रंगों से भरना है। और सुंदर बनाने के लिए किनारों पर दीये सजाएं जिससे घर की शान और बढ़ेगा।

    वहीं पूजा रूम के लिए परफेक्ट रंगोली डिजाइन पंखूड़ी वाली रंगोली काफी प्रचलित है। घरों में पूजा स्थान की सजावट का खास महत्व होता है। इस डिजाइन में लाल, गुलाबी और संतरी रंगों का इस्तेमाल कर सकते हैं। बीच में चौकोर पैटर्न बनाकर किनारों पर फूलों की पंखुड़ियों का बॉर्डर दें सकते हैं जो डिजाइन मिनटों में तैयार हो जाएगा।

    पीले, हरे और सफेद रंग से बनी सिंपल रंगोली भी दिवाली के लिए परफेक्ट है। यह डिजाइन आकर्षक और पारंपरिक दोनों है। इन तीन रंगों से बनी रंगोली आपके घर को फ्रैश लुक देती है।

  • Karva Chauth पर सुहागिनें जरूर करें यह काम, माता पार्वती का मिलेगा आशीर्वाद

    Karva Chauth पर सुहागिनें जरूर करें यह काम, माता पार्वती का मिलेगा आशीर्वाद

    धर्मः आज देशभर में करवा चौथ का त्योहार मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में करवा चौथ का दिन बहुत ही शुभ माना जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं सोलह श्रृंगार करके अपने पति की लंबी उम्र और अपने वैवाहिक जीवन के लिए कठोर व्रत का पालन करती हैं। यह व्रत पति और पत्नी के बीच प्यार और समर्पण का प्रतीक भी माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार करवा चौथ के दिन भगवान गणेश, माता गौरी और भगवान शंकर की पूजा की जाती है। करवा चौथ के दिन भगवान शिव और माता पार्वती का पूजन करें, उसके बाद 108 बार ‘ऊं नम: शिवाय’ मंत्र का जाप करें। साथ ही, लाल रंग, पीले रंग या गुलाबी रंग के ही वस्त्र धारण करें और काले रंग के वस्त्र भूल से भी न धारण करें।

    पति की लंबी उम्र के लिए उपाय
    करवा चौथ की पूजा के समय करवा में पानी भरकर माता पार्वती के सामने रखें। मान्यता है कि यह करवा आपके पति की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य का प्रतीक होता है। पूजा के बाद यह जल तुलसी या पीपल के पेड़ की जड़ में चढ़ा दें।

    इसके अलावा, इस दिन अपने घर का बना हुआ भोजन ही प्रसाद के रूप में ग्रहण करें। बाहर रेस्टोरेंट में जाकर खाना ना खाएं क्योंकि करवा चौथ का निर्जला व्रत पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। अगर आप जाकर खाना खाएंगे तो वह पवित्रता भंग हो जाएगी।

    जरूरतमंदों को करें दान
    अगर संभव हो तो शाम के समय किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद महिला को भोजन करवाएं या सुहाग सामग्री (जैसे चूड़ी, बिंदी, सिंदूर, कंघी आदि) का दान करें। इससे मां पार्वती की कृपा बनी रहती है।

    इसके अलावा, इसदिन चंद्रमा को अर्घ्य देते समय पति का नाम मन में लेकर जल चढ़ाएं और आशीर्वाद मांगें कि आपके रिश्ते में कभी कोई दूरी न आए। करवा चौथ की रात में चांद देखने के बाद आंगन या खिड़की पर एक दीया जलाकर रखें। यह दीया सौभाग्य का प्रतीक होता है और माना जाता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।

  • कल से शुरु होगा कार्तिक महीना, मिलेगी भगवान विष्णु की कृपा, जरुर करें ये काम

    कल से शुरु होगा कार्तिक महीना, मिलेगी भगवान विष्णु की कृपा, जरुर करें ये काम

    धर्म: हिंदू धर्म में कार्तिक महीना बहुत ही पावन माना जाता है। यह चातुर्मास का अंतिम महीना होता है। इसी समय सभी देव तत्व बहुत मजबूत होते हैं। इसलिए इस दौरान धन और धर्म से जुड़े प्रयोग किए जाते हैं। इस महीने में तुलसी का रोपण और विवाह भी बहुत शुभ माना जाता है। इशके अलावा इस दौरान दीपदान और दान करने से भी शुभ फल मिलता है। द्रिक पंचांग के अनुसार, इस बार कार्तिक का महीना 8 अक्टूबर 2025 से लेकर 5 नवंबर 2025 को खत्म होगा।

    इस महीने में क्या न करें

    कार्तिक के महीने में स्निग्ध चीजें और मेवे खाने के लिए कहा जाता है। इसके अलावा ऐसी चीजें जो गर्म हो और लंबे समय तक एनर्जी बनाए रखें उनका सेवन करना चाहिए। इस महीने में दाल खाने के लिए भी मना किया जाता है। इसके अलावा इस दौरान सूर्य की किरणों में स्नान करना उत्तम बताया गया है। इस महीने में दोपहर में सोने पर भी मनाही बताई गई है।

    घर में लगाएं तुलसी का पौधा

    तुलसी का पौधा बहुत ही विशेष माना जाता है। इसमें औषधीय के साथ-साथ दैवीय गुण भी मौजूद होते हैं। पुराणों में तुलसी को भगवान विष्णु के रुप शालिग्राम की पत्नी कहा गया है। पौराणिक कथाओं की मानें तो भगवान विष्णु ने छल से इनका वरण किया था तभी से श्री हरि भगवान को शालिग्राम के रुप में पूजा जाता है। कार्तिक मास में तुलसी की पूजा करना और इसका पौधा घर में लगाना बहुत ही शुभ माना जाता है।

    दीपक जलाएं

    इस पूरे महीने में तुलसी के पास घी या फिर तिल के तेल का दीपक जरुर जलाएं। खासतौर पर कार्तिक अमावस्या और पूर्णिमा तिथि वाले दिन यह उपाय जरुर करें। इससे मां लक्ष्मी की कृपा आप पर बनी रहेगी।

    जल चढ़ाएं

    रोज सुबह नहाने के बाद तुलसी को इस पूरे महीने में जल चढ़ाएं। इससे घर में पॉजिटिव एनर्जी आएगी। ऐसा करने से भगवान विष्णु की कृपा भी आपको मिलेगी। तुलसी मां को जल चढ़ाते समय ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नम: मंत्र का जाप करें।

    मंत्रों का करें जाप

    इस महीने में तुलसी की माला धारण करना या फिर तुलसी मां के मंत्रों का जाप करना भी बहुत ही शुभ माना जाता है। इस उपाय को दूर करने से नेगेटिव एनर्जी दूर होती है और मानसिक शांति भी मिलती है।