ड्रैगन फ्रूट की खेती ने मुश्ताक गुज्जर को बनाया अग्रणी किसान, दूसरे किसानों के लिए भी बने प्रेरणा स्त्रोत

ऊना/सुशील पंडित: वर्तमान दौर में अधिकतर युवा आरामदायक जिंदगी जीने के लिए सरकारी नौकरी या बहु-उद्देशीय राष्ट्रीय कम्पनियों में नौकरी पाने के लिए प्रयासरत रहते हैं। लेकिन जिला के आदर्श नगर अंब के रहने वाले मुश्ताक गुज्जर ने खेतीवाड़ी को ही अपने व्यवसाए के रूप में चुना। लेकिन मुश्ताक गुज्जर ने गेहूं, मक्की, धान की परम्परागत खेती करन के बावजूद ड्रैगन फ्रूट  की खेती करने में अपनी रूचि दिखाई और वर्तमान में कड़ी मेहनत करके ड्रैगन फ्रूट से लाखों रूपये की कमाई कर रहे हैं। ड्रैगन फ्रूट की खेती कर दूसरें किसानों के लिए मिसाल बनकर उभरे हैं आदर्श नगर अंब के मेहनतकश किसान मुश्ताक गुज्जर।

 मुश्ताक गुज्जर ने इस वर्ष ड्रैगन फ्रूट के लगभग 1300 पौधों से लगभग दो टन तक फल की पैदावार निकाली है जिससे उन्हें काफी लाभ मिला है। मुश्ताक बताते हैं कि ड्रैगन फल की मार्किट में बहुत अधिक मांग है और यह फल काफी ऊंचे दामों पर बिकता है। वहीं मानव शरीर के लिए जरूरी पौषक तत्व जैसे एंटीऑक्सिडेंट, एंटीएजिंग, पोटाश व कैल्शियम भरपूर मात्रा में होते हैं। यह दिल के मरीजों के लिए यह फल वरदान है। खाने में यह फल स्ट्रॉबैरी व लीची जैसे मीठा स्वाद देता है। यह फल जितना स्वादिष्ट है, उतना ही स्वास्थ्यवर्धक भी है। मानव शरीर में ड्रैगन फ्रूट एक दवा का काम करता है। ड्रैगन फ्रूट की खेती में मुश्ताक का परिवार भी भरपूर साथ देता है। यही कारण है कि उनकी सफलता की कहानी क्षेत्र के अन्य लोगों को ड्रैगन फ्रूट की खेती करने के लिए प्रेरित कर रही है।
  
वर्तमान में मुश्ताक गुज्जर 5,000 ड्रैगन पौधों की कर रहे देखभाल 
मुश्ताक गुज्जर बताते हैं कि उन्होंने वर्ष 2019 में लगभग 500 ड्रैगन फ्रूट के पौधों से शुरूआत की थी। वर्तमान में मुश्ताक गुज्जर दो हाइब्रिड और
 एक ट्राडिशनल ड्रैगन फ्रूट के लगभग 5,000 पौधों की खेती कर रहे हैं जिसमें अमेरिकन ब्यूटी, रेड सिमन, रेड रॉयल व वियतनामी किस्म के ड्रैगन फ्रूट शामिल हैं। इस वर्ष लगभग 1300 ड्रैगन फ्रूट के पौधांे से लगभग दो क्विंटल ड्रैगन फ्रूट की पैदावार की है, जिसे उन्होंने 250 से 300 रूपये प्रति किलो के हिसाब से मार्किट में बेचा।  मुश्ताक ने 3.5 एकड भूमि पर तैयार की ड्रैगन फ्रूट की नर्सरी मुश्ताक गुज्जर बताते हैं कि ड्रैगन फ्रूट को स्थानीय बाजार के  अलावा जिला बिलासपुर व हमीरपुर सहित अन्य पड़ोसी राज्यों जैसे चंडीगढ़ व जालंधर में भी बेचते हैं जिससे उन्हें काफी अच्छे दाम मिलते है। मुश्ताक गुज्जर ने ड्रैगन फ्रूट की नर्सरी भी साढे़ तीन एक्ड़ तैयारी करवाई है जोकि अगले वर्ष तक फू्रटिंग देने शुरू कर देंगे। इसके अतिरिक्त वर्तमान में उन्होंने तीन व्यक्तियों को स्थाई रोजगार भी दे रखा है। 
इसके अतिरिक्त बागवानी विभाग के अधिकारी समय-समय पर आकर तकनीकी सहायता भी देते हैं। उद्यान विभाग के अधिकारी समय-समय पर ड्रैगन फ्रूट के पौधों के पोषण हेतू प्राथमिक न्यूट्रिशन तथा पौधे में लगने वाली बीमारियों से बचाव के लिए दवाओं के बारे में जानकारी मुहैया करवाते रहते हैं जिससे उन्हें काफी मदद मिलती है
जिला में ड्रैगन की खेती को बढ़ावा देने हेतू उपायुक्त कर रहे भरसक प्रयास 
मुश्ताक गुज्जर ने उपायुक्त राघव शर्मा का धन्यवाद व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने इस ड्रैगन की फसल को सफल बनाने के लिए काफी भरसक  प्रयास किए हैं। उनके दिशा-निर्देशानुसार समय-समय पर ड्रैगन फ्रूट की खेती पर सेमीनार आयोजित किए गए जिससे खेती करने में काफी मदद मिली। उन्होंने बताया कि उपायुक्त के प्रयासों से ही इस की खेती को किसान क्रेडिट लिमिट में जोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि साढे़ छः लाख प्रति एक्ड़ के हिसाब से इस फसल की केसीसी लिमिट बनाई जा रही है। उन्होंने उपायुक्त राघव शर्मा द्वारा किसानों को लाभान्वित करने के लिए की गई इस पहल की काफी सराहना की। 
मुश्ताक के पिता कहते हैं- सीमेंट के पोल स्थापित कर लगाए ड्रैगन के 500 पौधे 
मुश्ताक गुज्जर के पिता शौकत अली गुज्जर कहते हैं वर्ष 2019 के मार्च माह में सीमेंट के पोल बनाकर 500 ड्रैगन फ्रूट के पौधे लगाए थे। सितंबर से अक्तूबर माह में फूल से फल तैयार होने में 40 दिन का समय लगता है। ड्रैगन फ्रूट के पौधे का औसतन जीवन 25-30 वर्ष होता है। ऐसे में किसान को एक ही बार निवेश करना होता है। उन्होंने बताया कि एक पोल पर पेड़ को तैयार करने के लिए तकरीबन सभी खर्च मिलाकर 1,000 रूपये का खर्च आता है। उन्होंने युवा किसानों से कहा कि परम्परागत खेती के साथ-साथ कुछ नया किया जाए तो उससे भी कमाई की जा सकती है। 

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