शहर और गांव की जनता हो जागरूक ,सरकारी जंगलों को आग से बचाने के लिए विभाग का करें सहयोग: सुशील राणा

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जिला ऊना में सरकारी भूमि पर होने बाली आगजनी की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई, जुर्माना और सजा का प्रावधान
ऊना/सुशील पंडित: जिला ऊना के बन अधिकारी (डीएफओ) सुशील राणा ने हाल ही में सरकारी भूमि पर आगजनी की घटनाओं के खिलाफ कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने बताया कि अब अगर किसी ने सरकारी भूमि पर आगजनी की तो उसे भारी जुर्माना और सजा का सामना करना पड़ेगा। इसके तहत एक कनाल भूमि पर आगजनी करने पर आरोपी को 5000 रुपये का जुर्माना देना होगा। इसके अलावा, आगजनी के दोषी को एक वर्ष तक की सजा भी हो सकती है।
डीएफओ सुशील राणा ने बताया कि फॉरेस्ट विभाग ने आगजनी की घटनाओं से निपटने के लिए अपनी पूरी तैयारी कर ली है। विभाग के कर्मचारी अब जिलेभर में सक्रिय रूप से गश्त कर रहे हैं, खासकर रात के समय, ताकि आगजनी और अवैध कटान को रोका जा सके। उन्होंने कहा कि वन क्षेत्र में आगजनी और अवैध गतिविधियों के खिलाफ उनकी टीम लगातार नजर बनाए हुए है। इस दौरान एक दर्जन से ज्यादा वन काटू और हजारों अवैध खैर कटान की घटनाओं का पता चल चुका है, जिन्हें पकड़ने में विभाग को सफलता मिली है।डीएफओ सुशील राणा ने यह भी कहा कि हर व्यक्ति को आगजनी के महत्व को समझना चाहिए। खासकर किसानों को मलकीयत भूमि पर आगजनी करते समय अत्यधिक सतर्क रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि आग का प्रयोग खेती के लाभ के लिए किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए उचित सावधानी और योजना बनानी जरूरी है। यदि आग बिना नियंत्रण के फैलती है, तो यह केवल वन्यजीवों और पेड़-पौधों के लिए ही नहीं, बल्कि मानव जीवन और संपत्ति के लिए भी खतरे का कारण बन सकती है। सुशील राणा ने बताया कि जिला ऊना में अब फॉरेस्ट विभाग के कर्मचारियों की तैनाती बढ़ा दी गई है, ताकि जंगलों और सरकारी भूमि को आगजनी और अवैध कटान से बचाया जा सके। विभाग ने विशेष गश्त प्रणाली को मजबूत किया है, जिसमें रात के समय भी कर्मचारी सक्रिय रहते हैं। इससे अवैध गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। विभाग की यह पहल खासतौर पर उन क्षेत्रों में प्रभावी है, जहां आगजनी और अवैध कटान की घटनाएं ज्यादा देखने को मिलती हैं। सुशील राणा ने कहा कि सरकारी भूमि पर आगजनी करने के खिलाफ नया जुर्माना और सजा का प्रावधान फॉरेस्ट विभाग के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। जुर्माने का यह नियम सरकारी भूमि की सुरक्षा और वन्यजीवों की रक्षा के उद्देश्य से लागू किया गया है। इसके तहत किसी भी व्यक्ति को एक कनाल सरकारी भूमि पर आग लगाने के लिए 5000 रुपये का जुर्माना देना होगा। इसके अलावा, आगजनी के दोषी व्यक्ति को एक वर्ष तक की सजा भी हो सकती है। इससे विभाग उम्मीद करता है कि आगजनी की घटनाओं में कमी आएगी और लोग सरकारी भूमि के महत्व को समझेंगे।      रात को गश्त के दौरान वन विभाग कर्मचारियों ने अवैध कटान के पकड़े दर्जनों मामले सुशील राणा ने यह भी जानकारी दी कि रात को गश्त के दौरान वन विभाग के कर्मचारियों ने हाल ही में एक दर्जन से ज्यादा वन काटुओं और हजारों अवैध खैर कटान की घटनाओं को पकड़ा है। इन घटनाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है, ताकि जंगलों का अवैध दोहन रोका जा सके। अवैध लकड़ी कटाई और जंगलों में आगजनी जैसी घटनाओं को रोकने के लिए विभाग ने अपनी निगरानी व्यवस्था को और सख्त कर दिया है। विभाग की यह कार्रवाई न केवल वन क्षेत्र के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह उन लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई करने में मदद करती है, जो वन संपदा का दुरुपयोग कर रहे हैं। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे आगजनी करने से पहले उसकी गंभीरता को समझें और अगर किसी तरह की आगजनी करना आवश्यक हो, तो उसे नियंत्रित तरीके से करें। इसके लिए विभाग ने विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शुरू किए हैं, ताकि किसान और आम लोग आगजनी के सही तरीके को जान सकें और इस प्रक्रिया से होने वाली समस्याओं से बच सकें। विभाग का मुख्य उद्देश्य सरकारी भूमि और जंगलों को सुरक्षित रखना है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को भी यह प्राकृतिक संपत्ति मिल सके।

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