किसे मिलेगी Arvind Kejriwal के इस्तीफ़े के बाद मुख्यमंत्री की कमान? आज नए नाम पर हो सकती है चर्चा

नई दिल्लीः आबकारी घोटाले से जुड़े मनी लॉड्रिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के दो दिन बाद एक चौंकाने वाले घटनाक्रम में अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे की घोषणा कर दी। वह 17 सितंबर ( मंगलवार) को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे। पांच माह तक जेल में रहने के बाद रविवार को पहली बार पार्टी मुख्यालय पहुंचे केजरीवाल ने आयोजित कार्यक्रम में कहा कि मनीष सिसोदिया भी सरकार में शामिल नहीं होंगे।

अब नए मुख्यमंत्री के नाम पर चर्चा शुरू हो गई है। इनमें शिक्षा मंत्री आतिशी सबसे ऊपर हैं। आतिशी, केजरीवाल से साथ मनीष सिसोदिया की भी भरोसेमंद सहयोगी हैं। महिला होना भी उनके पक्ष में जाता है। वह सरकार में दूसरी सबसे पावरफुल मंत्री हैं। परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत का नाम भी लिया जा रहा है। कहा यह भी जा रहा कि कोई चौंकाने वाला नाम भी आ सकता है।

केजरीवाल ने कहा, ”मैं जब तक सीएम की कुर्सी पर नहीं बैठूंगा जब तक जनता अपना फ़ैसला न सुना दे. मैं जनता के बीच जाऊंगा. फ़रवरी में चुनाव हैं। आज मैं इस मंच से मांग करता हूं कि चुनाव नवंबर में महाराष्ट्र के साथ कराया जाए।” ”जल्द आम आदमी पार्टी के विधायक दल की बैठक होगी, उसमें नए मुख्यमंत्री का नाम तय होगा। जब तक चुनाव नहीं होते हैं, तब तक मेरी जगह आम आदमी पार्टी से कोई और मुख्यमंत्री बनेगा।” वह स्वयं लोगों के बीच जाएंगे और उनका समर्थन मांगेंगे। अगर दिल्लीवालों को लगता है कि मैं ईमानदार हूं, तो मेरे पक्ष में वोट दें और लगता है कि गुनाहगार हूं, तो मुझे होने वाले चुनाव में वोट ना दें।

अगर जनता को लगता है कि केजरीवाल बेईमान है, तो मैं एक मिनट के लिए भी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नहीं बैठूंगा। मैंने अपने जीवन में इज्जत और ईमानदारी के अलावा कुछ नहीं कमाया है, मेरा और मेरी पार्टी का बैंक अकाउंट खाली है। वहीं भाजपा ने इसे नया नाटक बताते हुए कहा,”शराब घोटाले में जेल में रहकर इस्तीफा न देकर बाहर आने के बाद त्यागपत्र देना बताता है कि केजरीवाल ने आरोपों को स्वीकार कर लिया है। जब भी चुनाव होंगे, तब केजरीवाल सरकार की विदाई तय है।” राजनीति के जानकार आम आदमी पार्टी के संयोजक केजरीवाल के इस फैसले को हरियाणा चुनाव व भ्रष्टाचार के मुद्दे पर पार्टी को हुए नुकसान को रोकने की कोशिश से जोड़ कर देख रहे हैं।

केजरीवाल ने यह संदेश देने का प्रयास किया है कि उन्हें सत्ता की कोई लालसा नहीं है और वे शीर्ष पद पर लौटने से पहले जनता का फैसला चाहते हैं। ‘ये शर्तें हमारे लिए कोई अड़चन नहीं हैं।’ केजरीवाल बोले,”मेरे लिए कहा जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने जमानत की कुछ शर्तें लगाई हैं कि काम नहीं कर पाएंगे। पिछले 10 वर्ष में इन लोगों ने शर्तें लगाने में क्या कोई कसर छोड़ी थी? एलजी ने शर्तें लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

केंद्र सरकार ने कानून पर कानून लाकर मेरे पावर छीने, लेकिन मैंने दिल्ली के काम नहीं बंद होने दिए। ये शर्तें हमारे लिए कोई अड़चन नहीं हैं। केजरीवाल ने कहा कि अगर गैर-भाजपा मुख्यमंत्रियों के खिलाफ झूठे केस दर्ज किए जाते हैं और उन्हें गिरफ्तार किया जाता है, तो मैं आग्रह करता हूं कि वे इस्तीफा न दें, बल्कि जेल से सरकार चलाएं। मार्च में जेल जाने से पहले केजरीवाल ने जेल से सरकार चलाने की घोषणा की थी। उनका कहना है कि उन्होंने इसे साबित भी कर दिया है।

 

 

 

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