जिस स्कूल में प्राथमिक शिक्षा की पूरी, अब उसी में प्रिंसीपल के रूप में सेवाएं देंगें: राजपाल सरोही

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हटली स्कूल पहुंचने पर स्कूल स्टाफ द्वारा प्रिंसीपल राजपाल सरोही का हुआ स्वागत ऊना/सुशील पंडित:  जीवन में जब व्यक्ति अपने मूल स्थान पर लौटकर समाज सेवा का संकल्प लेता है, तो वह न केवल प्रेरणा का स्रोत बनता है बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी आदर्श प्रस्तुत करता है। ऐसा ही एक उदाहरण हैं, प्रबलता से प्रिंसीपल बने राजपाल सरोही का, जो अब अपने ही प्राथमिक स्कूल हटली से बने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला हटली में प्रिंसीपल के रूप में सेवाएं देने जा रहे हैं। प्रिंसीपल राजपाल सरोही का शैक्षणिक और व्यावसायिक सफर प्रेरणादायक रहा है। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पैतृक हटली स्कूल से ग्रहण की, जहां अब वह बतौर प्रधानाचार्य वापस लौट रहे हैं। छठी कक्षा के बाद उन्होंने सैनिक स्कूल सुजानपुर में दाखिला लिया और वहां से बाहरवीं तक की शिक्षा पूरी की। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए हरियाणा के कुरुक्षेत्र स्थित थानेश्वर यूनिवर्सिटी से स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की। राजपाल सरोही को वर्ष 1998 के अक्टूबर माह में उनकी पहली सरकारी नियुक्ति राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बड़ागांव (शिमला) में मिली। यहीं से उन्होंने अपने शैक्षणिक सेवाओं की शुरुआत की। शिक्षा के क्षेत्र में समर्पण और परिश्रम के बल पर उन्होंने विभिन्न सरकारी स्कूलों में अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने विद्यार्थियों के शैक्षिक व नैतिक विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।   22 वर्षों के अनुभव के बाद राजपाल सरोही को मिली पदोन्नति शिक्षा क्षेत्र में लगभग 22 वर्षों की लंबी और सराहनीय सेवा के बाद राजपाल सरोही को प्रिंसीपल के पद पर पदोन्नति मिली। इसके उपरांत उन्होंने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला शिलाई में प्रधानाचार्य के रूप में कार्यभार संभाला। शिलाई में अपनी सेवाएं देने के बाद उन्होंने अम्बेहड़ा और फिर क्यारियां स्कूलों में भी प्रिंसीपल के रूप में अपनी भूमिका का निर्वहन किया। राजपाल सरोही की यह यात्रा अब उस मुकाम पर पहुंची है, जहां से उन्होंने अपने शैक्षिक जीवन की शुरुआत की थी। अब वे उसी हटली स्कूल में बतौर प्रिंसीपल अपनी सेवाएं देंगे, जहां उन्होंने कभी विद्यार्थी के रूप में कक्षाएं लगाई थीं। यह संयोग केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत प्रेरणादायक है

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