Punjab News: 10-15 हथियारबंद बदमाशों ने घर पर किया हमला, 11वीं के छात्र का सिर फोड़ा, देखें वीडियो

होशियारपुरः टांडा शहर में शरेआम गुंडागर्दी का नंगा नाच देखने को मिला। जहां पिपला वाली गली वार्ड नंबर 9 में लगभग 10 से 15 लोगों के एक झुंड ने पत्रकार के घर में जबरन घुसकर उसकी पत्नी और बच्चे पर जानलेवा हमला किया। हमलावरों ने उनके बच्चे के सिर पर लोहे की रॉड से वार किया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई। हमले के दौरान हमलावरों ने खुलेआम पिस्तौलें लहराईं, जिससे पूरे मोहल्ले में दहशत का माहौल बन गया। पीड़ितों ने पुलिस को मामले की शिकायत दी है। पीड़ितों ने आरोप लगाए की पुलिस मामले में कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि पुलिस जानबूझकर मामले को दबाने की कोशिश कर रही है।

जानकारी देती पीड़ित महिला निवासी उड़मुड़ टांडा के वार्ड नंबर 9 पिपला वाली गली ने बताया कि उनके बेटा 11वीं कक्षा का छात्र है और बीते दिन वह अपना आखिरी एग्जाम देकर वापिस घर आ रहा था कि रास्ते में एक थार वाले युवक ने उसे घेर लिया और उससे मारपीट की। उनका बेटा किसी तरह वहां से भाग आया और घर आकर उसने सब कुछ बताया। पीड़िता ने घटना की जानकारी अपने पति को दी। पति ने कहा कि वह घर आकर देखता है। वहीं थोड़ी देर बाद करीब 10 से 15 युवक हथियारों के साथ लेस होकर आए और उनके घर पर हमला कर दिया।

बदमाशों ने उनके बेटे को घर से निकालकर बुरी तरह पीटा और उसके सिर पर लोहे की रॉड मारकर बुरी तरह घायल कर दिया। वहीं आरोपियों ने महिला के साथ भी बुरा व्यावहार किया और उनके घर का सामान भी तोड़ दिया। वहीं महिला ने कहा कि हमलावरों ने उसे धमकी दी कि उनका तो बम ब्लास्ट में भी नाम आया था वह उनका कुछ नहीं बिगाड़ सके तो आप क्या करलेंगे। महिला मुताबिक, बदमाश उनके घर से नकदी भी लेकर गए है और सामान की भी तोड़फोड़ करके गए हैं।

बताया जा रहा है कि हमलावरों में एक व्यक्ति ऐसा भी है जो बम ब्लास्ट केस में एनआईए (NAI) ने तलब कर रखा है। उक्त व्यक्ति से पूछताछ पूरी हो चुकी है, लेकिन वह अब खुलेआम ऐसे अपराधों में शामिल पाया जा रहा है, जो कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

वहीं हमलावरों ने आरोप लगाए कि पुलिस ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है। हमले से डरे-सहमे पीड़ित परिवार ने जिला प्रशासन और पंजाब सरकार से न्याय की मांग की है। उनका कहना है कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो वे उच्च न्यायालय या मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाएंगे।

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