मंदिरों के धन को लेकर सरकार नीयत खराब, हाई कोर्ट के फैसले का स्वागत : जयराम ठाकुर

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सरकार चलाने के बजाय धर्मार्थ कार्यों में ही खर्च हो मंदिरों का पैसा

ऊना/शिमला/सुशील पंडित:  शिमला से जारी बयान में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि मंदिरों की धनराशि पर सरकार की नज़र पहले से ही टेढ़ी थी और सरकार मंदिरों का पैसा हथियाने की हमेशा तरकीबें निकालता रहता था। कभी किसी योजना के नाम पर, कभी किसी और बहाने से सरकार मंदिरों का पैसा हथियाने का काम कर रही थी। सत्ता में आने के साथ ही सरकार की नज़र मंदिरों की संपत्तियों पर थी। भाजपा ने हमेशा मंदिर के पैसे जबरदस्ती लेकर सरकार चलाने का विरोध किया। हमने समय-समय पर सरकार की नीयत को लेकर आगाह भी किया था। उन्होंने कहा कि अब माननीय उच्च न्यायालय द्वारा मंदिर के पैसे सरकार चलाने के लिए ख़र्च करने पर रोक और मंदिर की सम्पतियों की देखरेख से संबंधित जो दिशा निर्देश दिए गए हैं, वह स्वागत योग्य हैं। इससे सरकार द्वारा मंदिरों से धनराशि वसूलने पर रोक लगेगी और मंदिरों का पैसा श्रद्धालुओं की सुविधा, गौ माता की सेवा और सनातन धर्म के प्रचार प्रसार में ही लगेगा।

जयराम ठाकुर ने कहा कि हमने पहले ही इस मामले में सरकार की मंशा पर सवाल उठाए थे कि वह सरकार चलाने के लिए मंदिरों की सम्पत्ति हड़पना चाहती है। इसी वर्ष 29 जनवरी को सरकार द्वारा प्रदेश के सभी डीसी को पत्र लिखा गया था कि मंदिर अपने राजस्व से सरकार के खजाने में पैसा जमा करें उन पैसों का इस्तेमाल सुखाश्रय और सुख शिक्षा योजना के लिए होगा। यह सरकार की एक साजिश से ज्यादा कुछ नहीं थी। क्योंकि लोक कल्याण समिति की बैठक में यह सामने आया कि सरकार द्वारा सुखाश्रय के लिए आवंटित बजट का लगभग 88 करोड़ रुपए सरकरा द्वारा एफडी किया गया है। जबकिलाभार्थियों को कोई बड़ी राहत सहायता मिल नहीं रही है। इस योजना के नाम पर जो कि सरकार की फ्लैगशिप स्कीम है जिसके लिए सरकार द्वारा कम से कम करोड़ों रुपये हर साल विज्ञापन पर खर्च किए गए उस योजना के लिए भी मंदिर से पैसा क्यों लिया जा रहा है।

जयराम ठाकुर ने कहा कि सबसे बड़ा सवाल सरकार की नीयत का है। मंदिरों से सरकार की वसूली की बात जब सामने आई तो सरकार सीधे मुकर गई। ब्रिटिश पार्लियामेंट द्वारा झूठे सर्टिफाइड मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और संबंधित विभाग के मंत्री ने साफ़-साफ़ कहा कि कोई पैसा नहीं लिया जा रहा है। जब सरकार द्वारा लिखी गई चिट्ठी सबके सामने आई तब भी उन्होंने झूट का सहारा लेना बंद नहीं किया। अगर सरकार पैसा ले रही है तो उसे स्वीकारने में समस्या क्या है? झूठ बोलने की नौबत तभी आती है ज़ब नीयत में खोट हो। मंदिर से पैसा वसूली करने वाली सरकार की मित्र मंडली और उसके प्रचार तंत्र ने हमारी सरकार द्वारा गोशाला के लिए मंदिरों के द्वारा दान देने पर प्रश्न उठाए। सनातन परंपरा के विरोधी कांग्रेस ने मंदिरों का पैसा गाय माता के लिए गौशाला बनाने का भी विरोध किया था। विधान सभा के बनाए कानून पर प्रश्न उठाया था। अब माननीय न्यायालय के गौसेवा और गौशाला के लिए मंदिरों की संपत्ति खर्च करने के दिशा निर्देश से गौसेवा पर उंगली उठाने वाले लोगों को भी साफ़ संदेश मिल गया है। अब व्यवस्था परिवर्तन वाली सुख की सरकार के मुखिया से हमारी अपेक्षा है कि वह मंदिरों की संपत्ति पर अपनी नज़रें गड़ाने से बचेंगे और मंदिर की आय का इस्तेमाल धर्माथ कार्यों पर ही खर्च करेंगे।

जायरा ठाकुर ने कहा कि माननीय हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मंदिरों की आय को देवता की संपत्ति बताया, सरकार के उपयोग पर रोक लगाई है।  मंदिरों का यह चढ़ावा अब सिर्फ धार्मिक, शैक्षणिक और धर्मार्थ कार्यों में खर्च होगा। मंदिरों में चढ़ाया गया पैसा, देवता है कि और प्रदेश सरकार का इस पर कोई हक नहीं है। ट्रस्टी केवल सरंक्षक हैं। अब यह पैसा सिर्फ धर्म का प्रचार प्रसार मानवता और गौ सेवा में ही यह धनराशि खर्च की जा सकती है। साथ ही मंदिरों की आय और व्यय का ब्योरा परिसर में सार्वजनिक तौर पर लिखने के निर्देश दिए गए हैं।

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