प्याज-लहसुन बना पति-पत्नी में कलेश का कारण, हुआ तलाक, हाईकोर्ट पहुंचा मामला

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नई दिल्ली: अहमदाबाद से तलाक का एक अजीबो गरीब मामले सामने आया है। इस मामले में खाने में प्याज और लहसुन न डालने के चलते एक कपल के बीच में इतनी बहस हो गई की तलाक तक बात पहुंच गई। पत्नी अपने बच्चे को साथ लेकर चली गई। इसके कारण से पति ने पत्नी के खान-पान की पांबदियों को असहनीय बताते हुए फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दायर की थी। इस अर्जी को मंजूर कर लिया गया।

हाईकोर्ट पहुंचा मामला

बाद में इस मामले में गुजरात हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। वहां अदालत ने तलाक को चूनौती देने वाली पत्नी की अपील खारिज कर दी। कपल की शादी साल 2002 में हुई थी। पत्नी स्वामीनारायण संप्रदाय की अनुयायी थी और इसलिए वह प्याज लहसुन नहीं खाती थी परंतु उसकी सास और पति इससे परहेज नहीं करते थे। समय के साथ-साथ व्यंजनों का चुनाव उनके वैवाहिक जीवन के लिए आपदा बन गया। धीरे-धीरे दोनों में घरेलू विवाद बढ़ गए और उनके रिश्ते में खट्टास आ गई।

2013 में दी तलाक के लिए अर्जी

स्वामीनारायण संप्रदाय के नियमों का पालन करने वाली पत्नी नियमित रुप से मंदिर में प्रार्थना और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेती थी परंतु सास और पति अपनी खाने की आदत नहीं बदलना चाहते थे ऐसे में घर में अलग से खान-पान की व्यवस्था हुई। इस विभाजित रसोई के कारण दोनों के वैवाहिक संबंध भी खत्म हो गए और पत्नी ने बच्चे के साथ पति का घर छोड़ दिया। साल 2013 में पति ने अहमदाबाद फैमिली कोर्ट में तलाक के लिए अर्जी दी थी। उसने यह दावा किया कि पत्नी ने उसके खिलाफ खाने को लेकर क्रूरता करके उसे छोड़ दिया है। इसके बाद साल 2024 में फैमिली कोर्ट ने दोनों के तलाक को मंजूरी दे दी और पति को भरण-पोषण का आदेश दिया। इसके बाद दोनों हाईकोर्ट में पहुंचे।

प्याज-लहसुन के कारण हुआ मतभेद

पत्नी के वकील ने हाईकोर्ट में कहा कि पति ने फैमिली कोर्ट में यह दावा किया था कि पत्नी की धार्मिक मान्यताओं के कारण प्याज लहसुन से परहेज करने की उसकी आदत झगड़े का कारण बन रही थी और वह अपने रुख पर अड़ी हुई थी। फैमिली कोर्ट ने पति पति के दावे को स्वीकार कर लिया और तलाक देने के साथ पति को भरण पोषण का आदेश भी दिया। पत्नी का कहना है कि फैमिली कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं हो रहा। पति के वकील ने यह तर्क दिया कि उनसाक मुवक्किल और उसकी मां पत्नी के लिए बिना प्याज लहसुन के खाना बनाते थे। प्याज और लहसुन का सेवन ही दोनों के बीच में मतभेद का कारण था। पति ने हाईकोर्ट को बताया कि उसे महिला पुलिस स्टेशन में भी आवेदन देना पड़ा था। हाईकोर्ट में पत्नी ने कहा कि अब उसको तलाक से कोई भी आपत्ति नहीं है। पति ने हाईकोर्ट को जवाब दिया है कि वह बाकी भरण-पोषण राशि को किश्तों में अदालत की रजिस्ट्री में जमा करेगा। यह राशि उसकी पत्नी को दी जाएगी इसके बाद हाईकोर्ट ने पत्नी की तलाक को चुनौती देने वाली याचिका ही खारिज कर दी।

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