हिमाचल के अधिकारों की अनदेखी, बजट पर CM Sukhu ने दी तीखी प्रतिक्रिया

शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने केंद्रीय बजट 2026-27 को हिमाचल प्रदेश सहित आम जनता, मध्यम वर्ग, किसानों, बागवानों और विशेष रूप से पहाड़ी राज्यों के प्रति उदासीन करार दिया है। प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश के लोगों को इस बजट से गहरी निराशा हुई है। बढ़ती महंगाई और आर्थिक दबावों के बीच मध्यम वर्ग को आयकर में राहत की उम्मीद थी, लेकिन केंद्र सरकार ने इसे पूरी तरह नजरअंदाज किया। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि यह बजट न तो विकास का रास्ता दिखाता है और न ही न्याय सुनिश्चित करता है।

मुख्यमंत्री ने 16वें वित्त आयोग द्वारा राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) समाप्त किए जाने को संघीय ढांचे पर सीधा प्रहार बताया। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत राज्यों को मिलने वाला यह अनुदान 1952 से निरंतर दिया जाता रहा है, लेकिन पहली बार इसे बंद किया गया है। 15वें वित्त आयोग के दौरान हिमाचल को करीब 37 हजार करोड़ रुपये का आरडीजी मिला था। आरडीजी की समाप्ति से प्रदेश की वित्तीय स्थिरता, आवश्यक सेवाओं और विकास कार्यों पर गंभीर असर पड़ेगा।

मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि कृषि, बागवानी, पर्यटन और बुनियादी ढांचे के लिए बजट में हिमाचल जैसे पर्वतीय राज्य की जरूरतों को नजरअंदाज किया गया है। सेब उत्पादकों, पर्यटन क्षेत्र और रेलवे विस्तार जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि जीएसटी मुआवजा बंद होने और ब्याज-मुक्त ऋण की सीमा में वृद्धि न होने से राज्य पर दोहरा आर्थिक बोझ पड़ा है। मुख्यमंत्री ने इसे जन-विरोधी, किसान-विरोधी और हिमाचल-विरोधी बजट बताते हुए कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के हितों की आवाज मजबूती से उठाती रहेगी।

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