फाल्गुन अमावस्या पर लगेगा साल का पहला सूर्य ग्रहण, इस विधि के साथ करें पूजा

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धर्म: इस साल फाल्गुन अमावस्या 17 फरवरी को मनाई जाएगी। इस दिन मंगलवार है तो ऐसे में भौमवती अमावस्या भी होगी। इस दिन सूर्यग्रहण भी लगने वाला है। अमावस्या पर की गई प्रक्रिया के पालन से ग्रहों की शांति और दोषों का निवारण दोनों हो सकता है। तन मन की शुद्धि के लिए अमावस्या पर गंगा स्नान बहुत ही फलदायी माना जाता है। इस दिन पवित्र नदी का जल अमृत के सामान होता है। अमावस्या वाले दिन दान करने से कई जन्मों के पाप भी धुल जाते हैं और व्यक्ति को अपने जीवन में तमाम सुख मिलते हैं।

अमावस्या पर स्नान का मुहूर्त

फाल्गुन अमावस्या वाले दिन स्नान के लिए सबसे शुभ ब्रह्मा मुहूर्त माना जाता है। ये समय आध्यात्मिक और शारीरिक तौर पर सर्वोत्तम माना जाता है। यह समय मानसिक स्पष्टता, ऊर्जा और आरोग्य देता है जिससे नेगेटिविटी दूर होती है। फाल्गुन अमावस्या की शुरुआत 16 फरवरी शाम को 5:34 और 17 फरवरी को शाम 5:30 बजे खत्म होगा। इस दिन स्नान का समय सुबह 5:16 बजे से लेकर सुबह 6:07 बजे तक होगा। इस दिन अमृत काल मुहूर्त सुबह 10:39 से लेकर दोपहर 12:17 तक रहेगा।

ऐसे करें पूजा

इस दिन तुलसी के पौधे को धोकर चंदन, कुमकुम, फूल, चुनरी के साथ सजाएं। घी का दीपक जलाएं और धूप जलाएं। इसके बाद परिक्रमा करें और मंत्र का जाप करें। फाल्गुन महीने की अमावस्या पर पीपल की पूजा का भी खास महत्व होता है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर पानी में गंगाजल, कच्चा दूध और तिल मिलाकर पीपल को चढ़ाएं। इससे लक्ष्मी जी प्रसन्न रहती हैं। पितरों की पूजा के लिए अमावस्या श्रेष्ठ तिथि मानी जाती है। इस दिन पितरों को जलांजलि दें। इससे उनकी आत्मा तृप्ति रहेगी। जल अर्पित करने के लिए जल हथेली में लेकर अंगूठे की ओर से चढ़ाएं। कंडा जलाकर उस पर गुड़-घी डालकर धूप अर्पित करें। पितरों का ध्यान करें। अमावस्या पर दूध और पानी से भगवान शालीग्राम का अभिषेक करें और पूजन सामग्री अर्पित करें। अभिषेक किए हुए जल में थोड़ा सा खुद भी पी लें।

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