Jalandhar News: लूटपाट को झपटमार में बदलना पड़ा महंगा, High Court ने DSP और जांच अधिकारी को किया तलब

जालंधर, ENS: महानगर में लूटपाट की वारदाते लगातार बढ़ रही है। वहीं लूट की वारदात के एक मामले को लेकर पुलिस विवादों में घिर गई है। दरअसल, लूट की वारदात को झपटमार में बदलना पुलिस को महंगा पड़ गया है। शिकायतकर्ता ने इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। जिस पर हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए डीएसपी और जांच अधिकारी को तलब किया है। सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्य प्रताप सिंह ने टिप्पणी की कि एफआईआर में वर्णित घटनाक्रम स्पष्ट रूप से लूटमार की श्रेणी में आता है। इस मामले को लेकर हाई कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। एक मामले में सजा कम करने के उद्देश्य से पुलिस ने लूटमार की घटना को झपटमारी में बदल दिया।

अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया लूटमार का मामला होने के बावजूद इसे झपटमारी में परिवर्तित करना न्याय प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ है। दर्ज एफआईआर को लेकर शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि 3 अज्ञात हमलावरों ने बेसबाल बैट और ‘दातर’ जैसे हथियारों से हमला कर उसे और उसके साथी को घायल किया और मोबाइल फोन, नकदी तथा मोटरसाइकिल छीनकर फरार हो गए। इन तथ्यों के बावजूद पुलिस ने लूटमार की गंभीर धाराओं के बजाय झपटमारी से संबंधित प्रविधानों में मामला दर्ज किया।

अदालत ने जांच अधिकारी और संबंधित डीएसपी को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया कि लूटमार के मामले को झपटमारी में क्यों बदला गया। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आपराधिक मामलों में लापरवाही या जानबूझकर की गई त्रुटियां बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। आरोपी को दी जमानत को लेकर कोर्ट ने कहा कि इस तरह की त्रुटियां तकनीकी नहीं होतीं, बल्कि इससे पूरे मामले की गंभीरता, सजा की प्रकृति और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होती है। बताया जा रहा है कि आरोपी को नियमित जमानत भी प्रदान की गई और कहा गया है कि आरोपी 7 महीने से हिरासत में है और जांच पूरी हो चुकी है। वहीं सह-आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है।

 

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