Donald Trump के चीन दौरे के बाद हुआ चौंकाने वाला दावा, Dustbin में फेंकी गई ये चीजें

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नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अब हाल के चीन दौरे के बाद एक चौंकाने वाला दावा सामने आया है। सोशल मीडिया और कई रिपोर्ट्स में ऐसा बोला जा रहा है कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने चीन से मिले हुए सभी गिफ्ट, बैज, फोन और दूसरे सामान ट्रंप के विमान एयरफोर्स वन में चढ़ने से पहले डस्टबिन में फेंक दिए। साइबर जासूसी और इलेक्ट्रॉनिक निगरानी के डर के कारण से उठाया गया है। दावा किया जा रहा है कि अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने यह साफ निर्देश दिया था कि चीन की ओर से मिला कोई भी सामान राष्ट्रपति के विमान में अब नहीं ले जाया जाएगा। यह मामला तब और चर्चा में आया जब पत्रकार एमिली गुडिन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया। उन्होंने लिखा कि अमेरिकी स्टाफ ने चीनी अधिकारियों की ओर से दिए गए सभी सामान जैसे क्रेडेंशियल्स, डेलिगेशन पिन, अस्थायी फोन और दूसरे आइटम इकट्ठा किए और एयरफोर्स वन में चढ़ने से पहले सीढ़ियों के नीचे रखे डस्टबिन में फेंक दिए गए।

सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरें

पोस्ट के अनुसार, चीन से मिला कोई भी सामान विमान में लाने की अनुमति नहीं थी। इसके बाद सोशल मीडिया पर इस घटना की वीडियो और तस्वीरें भी वायरल हुई हैं। रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल को चीन यात्रा के दौरान अपने निजी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस इस्तेमाल करने से भी बचने को कहा गया था। इसके बजाय डेलिगेशन के सदस्यों को अस्थायी बर्नर फोन दिए गए थे ताकि किसी भी संभावित साइबर निगरानी से बचा जा सके।

इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को रोकने में होंगे इस्तेमाल

सिर्फ इतना ही नहीं प्रतिनिधियों के निजी फोन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को एयर फोर्स वन में खास फैराडे बैग में रखा गया था। ये ऐसे बैग होते हैं जो इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सिग्नल को ब्लॉक करते हैं और किसी भी तरह की ट्रैकिंग या डेटा इंटरसेप्शन को रोकने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं हालांकि अमेरिकी प्रशासन की ओर से इस पूरे मामले पर ऑफिशियल बयान नहीं आया है लेकिन इस घटना ने अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते अविश्वास और टेक्नोलॉजी वॉर को फिर सुर्खियों में ला दिया है। पिछले कुछ सालों में वॉशिंगटन और बीजिंग के बीच में साइबर सुरक्षा, जासूसी, चिप टेक्नोलॉजी और डेटा सुरक्षा को लेकर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिका पहले भी कई बार चीन पर साइबर जासूसी के आरोप लगाता जा रहा है परंतु चीन इन आरोपों को लगातार इंकार कर रहा है।      

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