जारी नए आदेश में ग्राहकों पर सख्ती, एक दिन में मिलेगा सिर्फ इतने लीटर डीजल

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नई दिल्लीः सरकार ने देश में ईंधन की बिक्री और वितरण को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने पेट्रोल-डीजल की कालाबाजारी रोकने और इसके विनियमन के लिए वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत नया आदेश जारी किया है। फिलहाल यह नई व्यवस्था शुरुआती तौर पर 90 दिनों के लिए लागू की गई है। यानी अगले तीन महीनों तक पेट्रोल पंपों पर ईंधन की बिक्री इन्हीं नियमों के तहत होगी। हालांकि सरकार चाहें तो इस अवधि से पहले भी नए आदेश जारी कर इन नियमों में बदलाव या इन्हें वापस ले सकती है। नई गाइडलाइंस में यह भी साफ किया गया है कि खरीदे गए हाई-स्पीड डीजल को किसी भी हालत में दोबारा बेचने (रीसेल) की अनुमति नहीं होगी। नियम तोड़ने पर कार्रवाई की संभावना भी जताई गई है।

इस आदेश में कहा गया है कि किसी भी वाहन या व्यक्ति को एक दिन में पेट्रोल पंप पर 200 लीटर से अधिक डीजल नहीं मिलेगा। नये नियम से लंबी तथा मध्यम दूरी के माल परिवहन वाले ट्रकों पर असर पड़ने की संभावना है। नए नियमों के अनुसार अब कोई भी व्यक्ति या वाहन एक दिन में पेट्रोल पंप से 200 लीटर से अधिक हाई-स्पीड डीजल नहीं खरीद सकेगा। सरकार ने पेट्रोल पंप डीलरों को साफ निर्देश दिए हैं कि इस सीमा का सख्ती से पालन किया जाए। हालांकि सामान्य कार चालकों पर इसका ज्यादा असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि अधिकतर निजी वाहनों के फ्यूल टैंक की क्षमता इस सीमा से काफी कम होती है।

असली असर उन लोगों पर पड़ेगा जो बड़े स्तर पर डीजल का उपयोग करते हैं, जैसे ट्रक ऑपरेटर, जनरेटर उपयोगकर्ता या बड़े ड्रमों में फ्यूल भरवाने वाले ग्राहक। सरकार ने एक और अहम बदलाव किया है। अब कमर्शियल और संस्थागत ग्राहकों को सीधे आम रिटेल पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीदने की अनुमति नहीं होगी। उन्हें अपनी जरूरत का डीजल या पेट्रोल अब केवल अपने अधिकृत कंज्यूमर पंप से ही लेना होगा। इस कदम को फ्यूल सप्लाई सिस्टम को ज्यादा नियंत्रित और पारदर्शी बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

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