जंतर-मंतर पर चल रहे छात्रों के मुद्दे के विरोध में Anna Hazare ने रखा मौन व्रत, PM मोदी को लिखा पत्र

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नई दिल्ली: सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने दिल्ली के जंतर-मंतर में चल रहे प्रदर्शन के समर्थन में आज महाराष्ट्र के अहिल्या नगर स्थित वाडिया पार्क में दो घंटे का मौन प्रदर्शन रखा। इस दौरान उनकी आंखों में आंसू भी आए गए। दिल्ली के छात्रों के समर्थन में अन्ना हजारे का मौन आंदोलन दो घंटे तक चला। उन्होंने सरकार से प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ बातचीत करने की भी अपील की है। आंदोलन के दौरान उन्होंने अपना दर्द बयान किया और उनकी आंखों से आंसू आ गए। उनका मौन व्रत का आंदोलन दो घंटे तक चला।

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भविष्य से जुड़े सवालों पर गंभीरता से होनी चाहिए चर्चा

अन्ना हजारे ने इस दौरान छात्रों की समस्याओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े सवालों पर गंभीरता से चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर रहे छात्रों की मांगें बातचीत के जरिए सुलझाई जानी चाहिए। दिल्ली छात्र आंदोलन के समर्थन में अन्ना हजारे आज अहिल्यानगर के वाडिया पार्क में दो घंटे के लिए मौन आंदोलन पर बैठे थे।

पीएम मोदी को लिखा था पत्र

इंटरव्यू के दौरान उन्होंने छात्रों के मुद्दे को लेकर पीएम मोदी को लिखे पत्र को लेकर भी बात की है। उन्होंने कहा कि हिंसा से कभी भी समाधान नहीं निकलता है। नरेंद्र मोदी देश के एक बड़े सम्मानित नेता है। उन्हें ये समझना चाहिए कि हिंसा कोई रास्ता नहीं है। वो सर्वोच्च पद पर हैं इसलिए मैंने उन्हें पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि मैंने अपने जीवन में 22 आंदोलन किए हैं परंतु उसमें कभी भी हिंसा नहीं हुई। इस आंदोलन में जो हुआ है वो गलत हुआ है। आंदोलन हमेशा अहिंसा के मार्ग पर होना चाहिए। बता दें कि बीते दिन पीएम मोदी को उन्होंने एक पत्र लिखा था कि – दिल्ली में छात्रों के चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा और पुलिस की कार्रवाई बहुत दुखद थी। उन्होंने जोर देकर करहा है कि लोकतंत्र में टकराव के बजाय बातचीत हमेशा अच्छी होती है। लोकतंत्र में टकराव की जगह बात करने का रास्ता ढूंढना चाहिए। देश के लाखों युवा ऐसे हैं जो बेरोजगारी और पेपर लीक से परेशान हैं। इसे सिर्फ कानून व्यवस्था की समस्या मानने के जगह जनता के आक्रोश के तौर पर देखा जाना चाहिए।

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग

अन्ना हजारे की ओर से केंद्रीय मंत्री अन्ना हजारे के इस्तीफे की मांग को लेकर भी समर्थन किया है। उन्होंने लिखा कि – किसी मंत्री का इस्तीफा लेने से सरकार सत्ता नहीं खोती है। इससे बल्कि अन्य मंत्रियों के बीच में एक कड़ा और साफ संदेश जाता है कि जिम्मेदारी न निभाने पर पद छोड़ना होगा।

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