बड़े हमले की साजिश हुई नाकाम, पुलिस ने 1.5 किलो RDX किया बरामद

कैथल: हरियाणा पुलिस ने एक बार फिर आतंकी साजिश को नाकाम कर दिया है। सोमवार को कैथल में डेढ़ किलो आरडीएक्स बरामद हुआ जिसे बम निरोधक दस्ते ने समय रहते इसे निष्क्रिय कर गया। विस्फोटक सामग्री कैथल-जींद रोज पर गांव देवबन के कैंची चौक पर साइन बोर्ड के नीचे झाड़ियों में एक पैकेट में छिपाकर रखा गया था। पैकेट में इलेक्ट्रिक डेटोनेटर, मैकेनिज्म, नौ बोल्ट की बैटरी, मेगनेट लगा एक आयरन बॉक्स भी था। हरियाणा में पिछले चार महीने में तीसरी बार बड़ी मात्रा में विस्फोटक बरामद हुआ है।

इससे पहले करनालल और शाहबाद में विस्फोटक मिला था। करनाल में गैंगस्टर हरविंदर सिंह रिंडा का नाम आया था। करनाल स्थित मधुबन की बम निरोधक टीम ने मौके पर पहुंचकर डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद आरडीएक्स को निष्क्रिय कर दिया। इसी के साथ हरियाणा में एक बार फिर आतंकी साजिश नाकाम हुई। इसी के साथ शक की सुई एक बार फिर पाकिस्तान पर जा रही है। कहा जा रहा है कि ड्रोन के जरिए विस्फोटक पदार्थ भारत भेजे जा रहे हैं। इसके लिए पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई पंजाब के गैंगस्टर्स का सहारा ले रही है।

हरियाणा के अलावा पंजाब में भी ऐसे विस्फोटक लगातार मिल रहे हैं। कभी टिफिन बम के जरिए साजिश को अंजाम देने की कोशिश हो रही है तो कभी आईईडी के जरिए दहशत फैलाने का प्रयास हो रहा है। यह चार महीने में तीसरा बड़ी मात्रा में विस्फोटक मिलने का मामला है। इससे पहले करनाल और शाहबाद में विस्फोटक मिला था। करनाल वाले मामले में हरविंदर सिंह रिंडा का नाम आया था जो कि पहले गैंगस्टर था अब आईएसआई के साथ मिलकर भारत के खिलाफ साजिश रच रहा है। करनाल में मई महीने में साजिश का पर्दाफाश हुआ था। जब जांच एजेंसी ने चार आतंकियों को गिरफ्तार किया था। उनके पास से भारी मात्रा में आईईडी और दूसरे हथियार मिले थे।

जांच एजेसियों के मुताबिक, अब कैथल वाले मामले में भी ऐसा ही ट्रेंड देखा जा सकता है जहां पर मास्टरमाइंड पाकिस्तान में बैठा कोई आतंकी सरगना हो। सबसे ज्यादा चिंताजनक यह है कि इन विस्फोटकों को देश के दूसरे राज्यों में ले जाने की तैयारी रहती है। सूत्रों के अनुसार, अभी कैथल वाले मामले में यह पता नहीं चल सका है कि विस्फोटक को कहां ले जाया जा रहा था। दरअसल, आईएसआई हैंडलर या फिर मॉड्यूल एक जगह पर आरडीएक्स छोड़ देते हैं और फिर आगे किसको उठाना है ये नहीं बताते हैं। फिर किसी की ड्यूटी लगाते हैं कि आप फलां जगह पर जाइए और वहां पर बॉक्स मिलेगा उसमें यह चीज रखी है आपको उसे दिल्ली या किसी और जगह छोड़ देनी है। खालिस्तान के समय से पंजाब में यह ट्रेंड चल रहा है। ऐसे में जांच एजेंसियों को विस्फोटक को असली सोर्स पता करने में मुश्किल आती है।

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