ऊना/सुशील पंडित: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू का स्पष्ट दृष्टिकोण है कि हिमाचल प्रदेश का कोई भी विद्यार्थी केवल आर्थिक अभाव के कारण उच्च शिक्षा से वंचित न रहे। इसी सोच को साकार करने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार द्वारा डॉ. यशवंत सिंह परमार विद्यार्थी ऋण योजना आरंभ की गई है, जो युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रख रही है।
वर्ष 2023 में शुरू की गई यह योजना उन मेधावी विद्यार्थियों के लिए एक भरोसेमंद सहारा है, जो उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हैं, लेकिन आर्थिक संसाधनों की कमी उनके मार्ग में बाधा बनती रही है। योजना के अंतर्गत हिमाचल सरकार द्वारा 20 लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण मात्र 1 प्रतिशत ब्याज दर पर प्रदान किया जा रहा है। इस ऋण राशि का उपयोग ट्यूशन फीस, आवास, भोजन तथा अन्य शैक्षणिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए किया जा सकता है।
आय सीमा बढ़ाकर अधिक विद्यार्थियों को मिला अवसर
ऊना जिला के उप निदेशक उच्चतर शिक्षा अनिल कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि योजना के आरंभ में लाभार्थी परिवार की वार्षिक आय सीमा 4 लाख रुपये निर्धारित थी, जिसे अब बढ़ाकर 12 लाख रुपये कर दिया गया है। इस निर्णय से प्रदेश के कहीं अधिक विद्यार्थी योजना के दायरे में आए हैं और उच्च शिक्षा के अवसर प्राप्त कर सकेंगे।
उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार का उद्देश्य है कि हिमाचल के विद्यार्थी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर ज्ञान, कौशल और अनुसंधान के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करें। इस दिशा में डॉ. यशवंत सिंह परमार विद्यार्थी ऋण योजना एक प्रभावी और दूरदर्शी पहल सिद्ध हो रही है। वर्तमान में ऊना जिला से तीन विद्यार्थी इस योजना के अंतर्गत उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
पात्रता एवं आवेदन प्रक्रिया
उपनिदेशक ने बताया कि योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक का हिमाचल प्रदेश का स्थायी निवासी होना अनिवार्य है। साथ ही पिछली कक्षा में कम से कम 60 प्रतिशत अंक होना आवश्यक है। योजना के अंतर्गत मेडिकल, फार्मेसी, नर्सिंग, मैनेजमेंट, इंजीनियरिंग सहित विभिन्न व्यावसायिक पाठ्यक्रम शामिल हैं। आवेदन के लिए आयु सीमा 28 वर्ष निर्धारित की गई है।
आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी है। इच्छुक विद्यार्थी उप निदेशक उच्चतर शिक्षा ऊना की वेबसाइट www.ddheuna.in अथवा डायरेक्टर स्कूल शिक्षा शिमला की वेबसाइट से प्रपत्र-2 डाउनलोड कर सकते हैं। भरे हुए प्रपत्र को किसी भी कार्यदिवस में उप निदेशक उच्चतर शिक्षा कार्यालय, ऊना में जमा करवाया जा सकता है।
योजना का लाभ उठाने की अपील
अनिल कुमार ने जिले के अधिक से अधिक विद्यार्थियों से इस योजना का लाभ उठाने की अपील करते हुए कहा कि यह योजना बच्चों के उच्च शिक्षा के सपनों को साकार करने का सशक्त माध्यम है और भविष्य निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


उन्होंने कहा कि स्टार्टअप एक विचार है, जिसे मूर्त रूप देना होता है। यह एक छोटा बीज है, जिसे सही सहयोग मिलने पर विशाल वृक्ष बनाया जा सकता है। इस अवसर पर हरियाणा के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह, युवा सशक्तिकरण एवं उद्यमिता राज्य मंत्री गौरव गौतम तथा गुरुग्राम विधायक मुकेश शर्मा उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2047 तक देश को विकसित बनाने के संकल्प के साथ सरकार निरंतर तेज़ गति से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि आज देश में बड़े और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। चाहे सड़क और परिवहन अवसंरचना (इन्फ्रास्ट्रक्चर) का क्षेत्र हो या अन्य विकासात्मक परियोजनाएं, भारत अभूतपूर्व गति से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने विकास की नई दिशा पकड़ी है और हर क्षेत्र में प्रगति स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले 10 वर्षों में देश में स्टार्टअप्स की संख्या 500 से बढ़कर 2 लाख से अधिक हो गई है। इसमें हरियाणा का योगदान अग्रणी रहा है, विशेषकर गुरुग्राम और मानेसर का। हरियाणा में अब 9,500 से अधिक स्टार्टअप्स हैं और राज्य इस मामले में देश में सातवें स्थान पर है। साथ ही, हरियाणा से 19 यूनिकॉर्न्स भी सामने आए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करने के लिए HSIIDC के माध्यम से प्रति स्टार्टअप 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता तथा ‘मुख्यमंत्री कौशल सम्मान योजना’ शुरू की गई है। हरियाणा में ‘हरियाणा राज्य स्टार्टअप नीति-2022’ लागू है और हाल ही में 22 स्टार्टअप्स को 1 करोड़ 14 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब स्टार्टअप संस्कृति केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहेगी। आगामी शैक्षणिक सत्र से हर जिले में ‘उद्यमिता प्रतियोगिताएं’ आयोजित की जाएंगी, जिनमें चयनित टीमों को अपने आइडिया को ‘बिजनेस मॉडल’ में बदलने के लिए सरकार द्वारा एक लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मानेसर के औद्योगिक हब होने को देखते हुए HSIIDC के सभी औद्योगिक एस्टेट्स में ‘इन्क्यूबेशन सेंटर्स’ स्थापित किए जाएंगे, ताकि स्टार्टअप्स को सस्ती दरों पर कार्यस्थल उपलब्ध कराया जा सके। HSIIDC द्वारा इसके लिए तीन IMT क्षेत्रों में भूमि भी चिन्हित कर ली गई है।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के विचार को दोहराते हुए कहा कि “रिस्क टेकिंग” अब मेनस्ट्रीम बन गई है। पहले लोग जोखिम लेने से डरते थे, लेकिन आज जोखिम न लेना ही सबसे बड़ा जोखिम माना जाता है।”
मुख्यमंत्री ने गर्व व्यक्त किया कि हरियाणा में 50 प्रतिशत से अधिक स्टार्टअप्स में कम से कम एक महिला डायरेक्टर है और सरकार महिला उद्यमियों को हर कदम पर सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रहे स्टार्टअप्स और युवा इनोवेटर्स नए भारत की पहचान हैं। चाहे स्पेस सेक्टर हो या डिफेंस सेक्टर, हरियाणा के युवा हर क्षेत्र में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने सभी से अनुरोध किया कि अगले 8 से 10 दिनों के भीतर अपने सुझाव चैटबॉट के माध्यम से भेजें और जब विधानसभा में बजट 2026-27 प्रस्तुत किया जाएगा, तो उसे अवश्य सुनें।
उन्होंने कहा कि जिनके सुझाव बजट में शामिल किए जाएंगे, उन्हें विधानसभा की कार्यवाही देखने के लिए विशेष निमंत्रण भेजा जाएगा, ताकि वे स्वयं साक्षी बन सकें कि सरकार ने उनके सुझावों को सम्मान दिया है।
इस अवसर पर उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विनीत गर्ग, नागरिक संसाधन सूचना विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव जी. अनुपमा, युवा सशक्तिकरण एवं उद्यमिता विभाग के प्रधान सचिव राजीव रंजन, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के महानिदेशक यश गर्ग तथा मुख्यमंत्री के ओएसडी डॉ. राज नेहरू भी उपस्थित रहे।










