Category: Spiritual
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फाल्गुन अमावस्या पर लगेगा साल का पहला सूर्य ग्रहण, इस विधि के साथ करें पूजा
धर्म: इस साल फाल्गुन अमावस्या 17 फरवरी को मनाई जाएगी। इस दिन मंगलवार है तो ऐसे में भौमवती अमावस्या भी होगी। इस दिन सूर्यग्रहण भी लगने वाला है। अमावस्या पर की गई प्रक्रिया के पालन से ग्रहों की शांति और दोषों का निवारण दोनों हो सकता है। तन मन की शुद्धि के लिए अमावस्या पर गंगा स्नान बहुत ही फलदायी माना जाता है। इस दिन पवित्र नदी का जल अमृत के सामान होता है। अमावस्या वाले दिन दान करने से कई जन्मों के पाप भी धुल जाते हैं और व्यक्ति को अपने जीवन में तमाम सुख मिलते हैं। -

Premanand Maharaj से मिलने पहुंचे महाभारत के युद्धिष्ठिर, कही ये बात, देखें वीडियो
धर्म: महाभारत सीरियल में धर्मराज युद्धिष्ठिर का किरदार निभाने वाले मशहूर एक्टर गजेंद्र चौहान ने हाल में ही संत प्रेमानंद महाराज के साथ मुलाकात की। यह मुलाकात गहरी भावनाओं और आध्यात्मिक संवाद से भरी हुई थी। इस दौरान महाभारत, धर्म-कर्म और जीवन के मूल्यों पर संवाद हुआ। इसने दोनों की मुलाकात को और भी खास बना दिया। प्रेमानंद महाराज ने एक्टर गजेंद्र चौहान ने कहा कि युद्धिष्ठिर हम सबकी प्रेरणा थे। वो धर्म के अंश से जन्मे थे इसलिए उनका किरदार निभाना भी अपने आप में एक बड़ी जिम्मेदारी है।गजेंद्र चौहान ने महाराज को सुनाया प्रसंग
इसके बाद गजेंद्र चौहान ने प्रेमानंद महाराज से इजाजत लेकर महाभारत का उन्हें एक संवाद सुनाया। उन्होने कहा कि यह वो समय था जब पांडवों को वनवास जाना था और पांचाली जाने से रोक नहीं थी तब युद्धिष्ठिर ने उनको समझाते हुए कहा कि जो होने वाला है वह हमारे कर्मों का फल है।
युद्धिष्ठिर ने कहा कि – ‘भगवान राम जानते थे कि सोने का मृग असली नहीं होता फिर भी वे सीता की इच्छा का सम्मान करते हुए उसके पीछे गए। यह कोई लोभ नहीं था बल्कि कर्तव्य और मर्यादा का पालन था। युद्धिष्ठिर यह भी कहते हैं कि जो होना है उसे कोई रोक नहीं सकता न भीम की गदा और न ही अर्जुन का बाण इसलिए हमें वनवास जाना ही होगा क्योंकि ज्येष्ठ पिता श्री को प्रतीक्षा करवाना मर्यादा का उल्लंघन है’।View this post on Instagramसुनाया अटल बिहारी वाजपेयी का संवाद
इसके बाद गजेंद्र चौहान ने एक और संवाद सुनाया। उन्होंने कहा कि महाभारत का यह संवाद अटल बिहारी वाजपेयी जी को बहुत पसंद था। वो जब भी उनसे मिलते थे यही संवाद सुनने की इच्छा रखते थे जो कुछ इस तरह है कोई भी व्यक्ति, परिवार, परंपरा या प्रतिज्ञा राष्ट्र से ऊपर नहीं हो सकती। अंत में गजेंद्र चौहान ने भी भीष्म पितामाह का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि भीष्म ने कठिन प्रतिज्ञा ली थी लेकिन जब धर्म और श्रीकृष्ण की बात आती है तो प्रतिज्ञा को तोड़ना भी धर्म बन जाता है। -

Basant Panchami पर पीले रंग माना जाता है बेहद खास, जानें क्यों?
धर्म : बसंत पंचमी हिंदू धर्म का मुख्य त्यौहार माना जाता है। यह त्यौहार हर साल माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि वाले दिन मनाया जाता है। इस दिन मां सरस्वती की पूजा की जाती है। मां सरस्वती विद्या, बुद्धि, कला, संगीत और वाणी की देवी है। बसंत पंचमी पर पीले कपड़े पहनना, पीले फुल चढ़ाना और पीले प्रसाद के साथ पूजा करने से बुद्धि तेज होती है। इसके साथ परीक्षा में सफलता मिलती है और जीवन में ज्ञान की प्राप्ति होती है। इस बार बसंत पंचमी की तिथि को लेकर लोगों में थोड़ी असमंजस है।शुभ मुहूर्त
पंचागों के अनुसार, माघ शुक्ल पंचमी तिथि 23 जनवरी 2026 को रात 2:28 बजे शुरु होगी और 24 जनवरी को रात में 1:46 बजे खत्म होगी। उद्यातिथि के अनुसार, बसंत पंचमी 23 जनवरी को मनाई जाएगी। इस दिन सूर्योदय सुबह 7:15 बजे के आस-पास होगा वहीं पंचमी तिथि ही रहेगी। 24 जनवरी को सूर्योदय पर षष्ठी शुरु हो जाएगी इसलिए मुख्य तिथि 23 जनवरी को शुक्रवार है। पूजा का शुभ मूहूर्त अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:50 से 12:40 बजे और अमृत काल में पूजा करने सर्वोत्तम है।बसंत का धार्मिक महत्व
बसंत पंचमी को वसंत ऋतु की शुरुआत और सरस्वती जयंती के तौर पर मनाया जाता है। इस दिन मां सरस्वती का जन्म हुआ था। पीला रंग बसंत का प्रतीक है इसलिए पीले वस्त्र, पीले फूल और पीला प्रसाद चढ़ाया जाता है। यह पर्व विद्या, बुद्धि, कला और संगीत की देवी मां सरस्वती की पूजा का दिन है। छात्र-छात्राएं इस दिन किताबें, वाद्ययंत्र और कलम की पूजा करते हैं। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पूजा करने से बुद्धि तेज होती है। परीक्षा में सफलता मिलती है और वाणी में मधुरता आती है।पीले रंग का महत्व
इस दौरान प्रकृति में चारों ओर पीली चादर बिछ जाती है। सरसों के खेत भी पूरी तरह से पीले फूलों के साथ ढक जाते हैं। पीला रंग पॉजिटिविटी और शुभता का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक दृष्टि से पीला रंग शुद्धता, सादगी और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। मां सरस्वती को ये रंग बहुत प्रिय माना जाता है। यह रंग सूर्य की किरणों जैसा होता है जो अज्ञानता के अंधकार को दूर कर ज्ञान का संचार करता है। यह दिमाग को एक्टिव करता है और मन का प्रसन्न बनाता है। -

Mauni Amavsya की शाम करें ये उपाय, पितरों का मिलेगा आशीर्वाद
धर्म: मौनी अमावस्या आज मनाई जा रही है। हिंदू धर्म में यह बहुत ही पवित्र मानी जाती है। ऐसा माना जाता है कि आज के दिन यदि इंसान मौन रखकर स्नान-दान और पूजा पाठ करता है तो उसका फल कई गुना बढ़ जाता है। खासतौर पर जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष हो उनके लिए मौनी अमावस्या बहुत ही शुभ मानी जाती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, आज की शाम कुछ उपाय करने से पितरों की कृपा मिलती है और जीवन में सुख-शांति आती है। आइए जानते हैं।दीपक जलाएं
शाम के समय किसी भी पास के मंदिर में दीपक जरुर जलाएं। इससे नेगेटिव एनर्जी दूर होती है मन को शांति मिलती है।चींटियों को आटा
शाम के समय चींटियों को आटा या चीनी डालें। यह छोटा सा उपाय बहुत ही पुण्य देने वाला माना जाता है। इससे आपको पितरों की कृपा मिलेगी।दान करें
यदि संभव हो तो शाम के समय किसी जरुरतमंद को खाना खिलाएं या फिर भोजन का दान करें। इस दिन शाम को किया हुआ दान बहुत ही शुभ माना जाता है।जरुरतमंदों को खिलाएं खाना
यदि संभव तो शाम के समय किसी भी जरुरतमंद को खाना खिलाएं। आप भोजन का दान भी कर सकते हैं। इस शाम को किया गया दान बहुत ही शुभ माना जाता है।पीपल के नीचे जलाएं दीपक
शाम को सूर्यास्त के बाद में पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। ऐसा माना जाता है कि इससे पितर खुश होंगे और घर में सुख शांति बनी रहेगी।पितरों का करें ध्यान
इस दिन शाम के समय अपने पितरो का ध्यान करें। उनका नाम याद करते हुए भगवान से प्रार्थना करें। मान्यताओं के अनुसार, ऐसा माना जाता है कि इस समय की गई प्रार्थना सीधे पितरों तक पहुंच जाती है।घर में जलाएं धूप
शाम के समय अपने घर में पूजा स्थान पर धूप या फिर अगरबत्ती जरुर जलाएं। इससे घर का माहौल पॉजिटिव रहेगा। इस उपाय से मानसिक शांति भी मिलेगी। -

नई नवेली दुल्हन के लिए आखिर क्यों खास होता है Lohri का त्योहार? जानें
धर्म: कल पूरे भारत में लोहड़ी का त्योहार धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। यह त्योहार हर साल 13 जनवरी को ही मनाया जाता है। लोहड़ी से सर्दियां खत्म होती है और रबी फसल की कटाई शुरु होती है। ऐसे में सभी इसको बहुत ही धूमधाम के साथ मनाते हैं। यह त्योहार मकर संक्रांति के पहले दिन मनाया जाता है। मकर संक्रांति को सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं। ऐसे में नई फसल और दिन का उजाला भी बढ़ जाता है। इसके साथ नई नवेली दुल्हनों के लिए भी यह त्योहार बहुत ही जरुरी माना जाता है।शुभ मुहूर्त
लोहड़ी वाले दिन प्रदोष काल में अग्नि प्रज्वलित करना बहुत ही शुभ माना जाता है। इस दिन सूर्यास्त का समय शाम को 5:44 मिनट का है। ऐसे में सूर्यास्त से 2 घंटे की अवधि लोहड़ी और अग्नि की पूजा के लिए सबसे शुभ मानी जा रही है। यह त्योहार भगवान सूर्य और अग्नि को भी समर्पित होता है। सूर्य और अग्नि को ऊर्जा का सबसे स्त्रोत माना जाता है। यह त्योहार सर्दियों के जाने और बसंत ऋतु के आने का संकेत भी है। लोहड़ी की रात सबसे ठंडी होती है। इस त्योहार पर पवित्र अग्नि में फसलों का अंश भी अर्पित किया जाता है। मान्यताओं के अनुसार, ऐसे अग्नि में फसल अर्पित करने से यह देवताओं तक पहुंचती है।नई दुल्हन के लिए खास होती है लोहड़ी
ऐसा माना जाता है कि जिस घर में नई शादी हो, शादी की पहली एनिवर्सरी हो या फिर बच्चा हुआ तो वहां पर लोहड़ी बहुत ही शानदार तरीके के साथ मनाई जाती है। इस दिन को नई शुरुआत, सौभाग्य, स्वास्थ्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। नियमों के अनुसार, नई दुल्हनों को इस त्योहार पर काले रंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए। इसके अलावा इस दिन घर के किसी भी सदस्य से लड़ाई-झगड़े से भी बचना चाहिए। लोहड़ी वाले दिन कुंवारी लड़कियां भी रंग-बिरंगे नए-नए कपड़े पहनती है। इसके बाद वह घर-घर में जाकर लोहड़ी मांगती है। ऐसा माना जाता है कि माघ के महीने में सर्दी से बचने के लिए लोग आग जलाकर सुकून पाते हैं। लोहड़ी के गाने भी गाते हैं। इसमें बच्चे, बूढ़े सभी नाचते हैं। इसके अलावा ढोल की धुन पर गिद्दा और भांगड़ा भी करते हैं। -

इस दिन मकर राशि में प्रवेश करेंगे सूर्य, मनाई जाएगी Makar Sankranti, जानें शुभ मुहूर्त
धर्म: सूर्य जब किसी भी राशि में प्रवेश करते हैं तो इसको संक्रांति कहते हैं। सूर्य जब मकर राशि में प्रवेश करें तो मकर संक्रांति मनाई जाती है। इस बार मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जाएगी। इस दिन सूर्य मकर राशि में दोपहर को 3:13 पर प्रवेश करेंगे। इस दिन सुबह उठकर स्नान-दान और ध्यान का खास महत्व बताया गया है। भारत के अलग-अलग हिस्सों में यह त्योहार अलग-अलग नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है। तमिलनाडु में पोंगल, पंजाब में लोहड़ी, गुजरात में उत्तरायण और उत्तर भारत में खिचड़ी या मकर संक्रांति के तौर पर इसे मनाया जाता है।शुभ मुहूर्त
इस बार मकर संक्रांति पर पुण्य काल 14 जनवरी को दोपहर 3 बजकर 13 मिनट से शुरु होगा। वहीं महापुण्य काल भी दोपहर में 3 बजकर 13 मिनट से शुरु होकर शाम 4 बजकर 58 मिनट तक रहेगा। इस दिन गंगा स्नान सुबह 9 बजकर 3 मिनट से लेकर 10 बजकर 48 मिनट तक होगा।पूजा विधि
इस दिन सूर्य उदय से पहले गंगा या फिर किसी पवित्र नदी में स्नान करें। यदि पवित्र नदी में स्नान नहीं कर सकते हैं तो स्नान के जल में ही गंगाजल मिला लें। सूर्यदेव की पूजा करके उन्हें अर्घ्य दें। अर्घ्य के जल में रोली, चावल और लाल फूल डालें। इस दिन गुड़ चावल, वस्त्र और कंबल का दान करें। तिल गुड़ के लड्डू, खिचड़ी और मौसमी व्यंजन बनाकर भगवान को अर्पित करें। इसके साथ ही गीता और भगवान सूर्य की उपासना से जुड़े ग्रंथों का पाठ भी जरुर करें।खास महत्व
हिंदू धर्म में मकर संक्रांति वाले दिन गंगा नदी के साथ-साथ पवित्र नदियों, कुओं, तीर्थों और सरोवरों में स्नान करना बहुत ही शुभ माना जाता है। ऊनी कपड़े, कंबल, जूते, धार्मिक ग्रंथों और पंचाग का दान करना बहुत ही पुण्यदायी माना जाता है। मकर संक्रांति का पर्व सूर्य की उपासना का पर्व होता है। माना जाता है कि इस दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र शनिदेव से मिलने के लिए मकर राशि में जाते हैं। ऐसे में यह पर्व फसल की कटाई के साथ भी जुड़ा हुआ है। खासतौर पर भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में इसका खास महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु ने पृथ्वी पर असुरों का संहार करने के लिए धर्म की स्थापना की थी। ऐसे में यह माना जाता है कि गंगा भागीरथ के पीछे-पीछे स्वर्ग से पृथ्वी पर भी आई थी। इसी दिन के बाद से उन्हें पतित पावन कहा जाने लगा था। -

क्या टीचर के पैर छूना छात्रों के लिए सही है? Premanand Maharaj से जानें जवाब
धर्म: हिंदू धर्म में गुरु को सबसे ऊंचा स्थान दिया गया है। गुरुओं का सम्मान भगवान के रुप में माना जाता है। इसलिए बच्चों को भी हमेशा यही सिखाया जाता है कि उनका हमेशा सम्मान और आदर करना चाहिए। छोटे बच्चों को भी यही शिक्षा दी जाती है कि अपने शिक्षक के प्रति श्रद्दा और विनम्रता रखें। इसी श्रद्धा के कारण छात्र अपने शिक्षकों को पैर छूकर उनका आशीर्वाद लेते हैं परंतु समय-समय पर यह भी प्रश्न उठता है कि क्या किसी के पैर छने से उनका पुण्य पर कोई असर पड़ता है।टीचर ने किया प्रेमानंद महाराज से सवाल
एक महिला टीचर ने प्रेमानंद महाराज से इसी मुद्दे पर सवाल किया। उन्होंने बताया कि कई बार उनके छात्र आदर दिखाने के लिए उनके पैरों को छूते हैं। उन्होंने कई बार मना भी किया है परंतु बच्चे बिल्कुल भी नहीं मानते। इस बात को लेकर उन्हें चिंता भी थी कि कहीं उनके पुण्य पर इसका उलट असर तो नहीं होगा। इस पर प्रेमानंद महाराज ने कहा कि – आमतौर पर बिना ध्यान के किसी के पैर छूने से पुण्य पर असर हो सकता है परंतु इसका आसान और आध्यात्मिक तरीका भी है। उनका कहना है कि यदि टीचर अपने मन में भगवान को याद करते हुए बच्चे को प्रणाम कर ले तो पुण्य सुरक्षित रहता है। हर व्यक्ति में भगवान का अंश होता है इसलिए किसी से अपने पैरों का संपर्क बिना सोचे-समझे नहीं होना चाहिए।श्रद्धा और सम्मान दोनों रखना संभव है
महाराज ने यह भी बताया कि श्रद्धा और सम्मान दोनों की ही बनाकर रखना बिल्कुल संभव है। यदि कोई व्यक्ति आपके मना करने के बाद आपको आदर के साथ प्रणाम करता है और आपके पैर छूता है तो आप अपने मन में भगवान को याद करते हुए उसे प्रणाम कर दें। इससे आपका पु्ण्य सुरक्षित रहेगा और सामने वाले को भी सम्मान मिलेगा। वहीं आध्यात्मिक तौर पर श्रद्धा और पुण्य दोनों एक साथ बनाकर रखे जा सकते हैं। गुरु को हमेशा आदर ही देना चाहिए लेकिन साथ ही अपने मन को शांति और पुण्य की सुरक्षा भी जरुरी है। हर इंसान में भगवान रहते हैं ऐसे में हमेशा विनम्र और सजग होकर ही व्यवहार करना चाहिए। -

सपने में भगवान का दिखना कैसा संकेत है? Premanand Maharaj से जानें जवाब
धर्म: सोते समय सभी को सपने आना एक आम बात है। ज्यादातर सभी के साथ यह होता है लेकिन कई बार कुछ ऐसे सपने भी आते हैं जिनके बारे में जानने के लिए उत्सुकता आ जाती है। इसी तरह के कुछ सपने होते हैं जिसमें भगवान के दर्शन हो या भगवान की छवि जैसा कुछ सपने में दिख रहा हो परंतु सपने में भगवान के आने का क्या मतलब है और ऐसा क्यों होता है इस पर वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज ने जवाब दिया है।तीन तरह के होते हैं सपने
प्रेमानंद महाराज ने बताया कि सपने तीन तरह के होते हैं एक सात्विक जिसमें भगवान या महान पुरुष दिखे, दूसरे राजसिक जिसमें आप सुख भोगते हुए दिखें, तीसरा तामसिक जिसमें आप लड़ाई झगड़ा करते दिखे और एक सपने ऐसे होते हैं जिनका कोई मतलब ही नहीं होता है। यह सपने व्यर्थ के होते हैं। महाराज के अनुसार, इन तीनों गुणों में से आए हुए सपनों में यदि कोई महात्मा आता है या फिर कोई भगवान नजर आए तो उसको भगवान की कृपा समझना चाहिए।सपने का मतलब सोचना व्यर्थ
महाराज ने आगे कहा कि आप उसे कृपा समझें लेकिन उसका चिंतन करना या फिर सपने का मतलब क्या होता है या सोचना कि भगवान आपसे क्या कहना चाहते हैं यह व्यर्थ है। प्रेमानंद महाराज के अनुसार, इस तरह के सपनों का कोई भी अर्थ नहीं होता है। वो कहते हैं कि आप लोग समझ लें कि यह सिर्फ एक सपना है जिसका कोई भी अर्थ नहीं होता है।कलयुग में सिर्फ नाम जप सत्य है
आगे महाराज ने सभी को नाम जप करने की सलाह दी। उनका कहना है कि इस कलयुग में सिर्फ और सिर्फ नाम जप ही सत्य है। उनके अनुसार, संत, महात्मा या भगवान यदि आपके सपने में आए और उन्होंने आपको दर्शन दिए तो यह आपके सात्विक कर्मों का फल है। इसका कोई पॉजिटिव या फिर नेगेटिव अर्थ नहीं है। -

कल मनाई जाएगी साल की आखिरी एकादशी, भगवान विष्णु की मिलेगी कृपा, करें ये काम
धर्म: पौष पुत्रदा एकादशी को सभी पुराणों और खास महत्व दिया गया है। यह एकादशी बहुत ही पवित्र बताई गई है। भगवान विष्णु को भी एकादशी की तिथि बहुत ही प्रिय है। पुराणों के अनुसार, इस दिन श्रद्धा संयम और नियमपूर्वक व्रत रखने वाले भक्तों को संतान सुख की प्राप्ति होती है। परिवार में सुख-शांति और समृद्धि भी आती है। एकादशी का व्रत रखने से भगवान विष्णु की कृपा जीवन पर बनती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत संतान से संबंधित परेशानियों और बाधाओं को दूर करने का सबसे श्रेष्ठ उपाय है। ऐसा करने से संतान सुख मिलता है और घर में सौभाग्य और समृद्धि भी आती है। इस दिन व्रत का पालन करने वाले भक्त भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की खास तौर पर आराधना करते हैं। विष्णु सहस्रनाम का पाठ करते हैं और रात में जागरण भी करते हैं।कल रखा जाएगा एकादशी का व्रत
इस बार यह एकादशी कल मनाई जाएगी। यह साल 2025 की आखिरी एकादशी होगी। एकादशी की तिथि कल सुबह 7:50 पर शुरु होगी। इस दिन दशमी तिथि भी रहेगी। एकादशी का यह व्रत 31 दिसंबर 2025 को सुबह 5 बजे खत्म होगा। ऐसे में कुछ लोग 30 दिसंबर को व्रत रखेंगे। वहीं कुछ लोग 31 दिसंबर को भी व्रत रखेंगे। जो लोग 30 दिसंबर को व्रत रखेंगे वह 31 दिसंबर को भी व्रत रखेंगे। ऐसे लोग 31 दिसंबर को 1:29 बजे से लेकर 3:33 बजे तक व्रत का पालन कर सकते हैं। इसके अलावा 31 दिसंबर को भी कुछ लोग एकादशी का व्रत रखने वाले हैं।मिलेगी भगवान विष्णु की कृपा
पौष पुत्रदा एकादशी पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विधि-विधान के साथ पूजा करनी चाहिए। इस दिन जो लोग व्रत रखते हैं वह पूरा दिन खाना नहीं खाते। जल को छोड़कर, फल और हल्का भोजन करते हैं। शास्त्रों में इस दिन खास तौर पर पीले कपड़े, केसर, चने की दाल, गुड़ और पीले फूल दान करने की सलाह दी गई है। मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करने से ग्रहों की स्थिति मजबूत होती है और जीवन में पॉजिटिव एनर्जी आती है।एकादशी वाले दिन न करें यह काम
इस दिन लोहे, काले तिल, काले कपड़े, तेल और नमक का दान न करें। इन चीजों का दान करने से भगवान विष्णु नाराज हो सकते हैं और आने वाले साल में बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसके अलावा फल, अनाज या धार्मिक पुस्तकों का दान भी इस दिन बहुत शुभ माना जाता है। -

क्या पहले से तय होती है अकाल मृत्यु? Premanand Maharaj ने दिया जवाब
धर्म: भगवद गीता में बताया गया है कि मृत्यु एक कड़वा सच है। इसको कोई भी नहीं बदल सकता परंतु गीता में यह भी बोला गया है कि मृत्यु सिर्फ शरीर का अंत करती है आत्मा का नहीं। मृत्यु के बाद सिर्फ शरीर नष्ट नहीं होता परंतु आत्मा जीवित रहती है। धरती पर जीव, जन्तु या मानव जिसका भी जन्म हुआ है उसकी मृत्यु निश्चित है लेकिन सभी की मृत्यु एक जैसी नहीं होती। अब हाल ही में एक व्यक्ति ने प्रेमानंद महाराज ने अकाल मृत्यु को लेकर सवाल किया है।महाराज ने अकाल मृत्यु पर दिया जवाब
एक व्यक्ति ने प्रेमानंद महाराज से पूछा कि जैसे मृत्यु पहले से तय होती है तो क्या अकाल मृत्यु भी पहले से तय होती है। महाराज ने पर जवाब दिया कि – ‘नहीं अकाल मृत्यु पहले से तय नहीं होती। मृत्यु तय होती है। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति पूर्व जन्म या फिर इस जन्म में कोई महापाप करता है तो दंड के रुप में उसकी उम्र क्षीण हो जाती है और उसे अकाल मृत्यु मिलता है’।View this post on Instagramइस वजह से होती है अकाल मृत्यु
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अकाल मृत्यु को पुराने बुरे कर्मों या अशुभ ग्रहों की स्थिति के साथ जोड़कर देखा जाता है। यह भी माना जाता है कि पितृ दोष या काल सर्प दोष भी अकाल मृत्यु कारण बनते हैं। प्रेमानंद महाराज के अनुसार, व्यक्ति की कुछ गलत आदतें भी महापाप की श्रेणी में आती हैं। इससे कि उसकी आयु कम हो जाती है। अकाल मृत्यु का योग बनता है जैसे कि पराई स्त्री के साथ संबंध बनाना महापाप माना जाता है। यह गलत काम भी अकाल मृत्यु का कारण बनता है। यदि व्यक्ति की अकाल मृत्यु न हो तो व्यक्ति जीवनभर मृत्यु तुल्य कष्ट पाता है। साधु संतों का अपमान, गर्भवती महिला का अपमान और बुजुर्ग, गरीब या असहायों का अपमान करना भी गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है और ऐसे लोगों को अकाल मृत्यु का दंड मिलता है।