Category: Spiritual

  • Premanand Maharaj की बात सुन इमोशनल हुई Anushka, सोशल मीडिया पर किया React

    Premanand Maharaj की बात सुन इमोशनल हुई Anushka, सोशल मीडिया पर किया React

    धर्म: अनुष्का शर्मा और विराट कोहली प्रेमानंद महाराज के बहुत बड़े भक्त हैं। दोनों जब भी भारत में आते हैं तो महाराज से मिलने के लिए वृंदावन में जरुर जाते हैं। वहीं अनुष्का शर्मा खुद भी प्रेमानंद महाराज के वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर करती रहती हैं। एक बार फिर उन्होंने अपने गुरु के सामने हाथ जोड़े हैं। अभी हाल ही में प्रेमानंद महाराज ने एक वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में वह इतिहास में महापुरुषों के द्वारा झेले कष्टों का जिक्र कर रहे हैं।

    महापुरुषों ने कितना कष्ट सहा है

    प्रेमानंद महाराज को जब बताया गया कि ये महीना गुरु गोबिंद सिंह की शहादत का चल रहा है। गुरु गोबिंद सिंह की शहादत की कहानी सुनकर प्रेमानंद महाराज उनकी तस्वीर को माथे से लगाकर प्रणाम करते हैं। महाराज ने कहा कि- ‘कितना कष्ट सहा महापुरुषों ने धर्म के लिए अब जिंदगी दीवार में चुनवा देना कितनी बड़ी बात है। गर्दन उतार देना, शरीर की चमड़ी उतार लेना। ये सब गुरुजनों ने कष्ट सहा है। धर्म के लिए तो आज हम सुख चैन से भगवान का गान कर रहे हैं। इनकी शहादत पर इनके बलिदान पर आज हम सूखपूर्वक जी पा रहे हैं धर्म से। अगर इन महापुरुषों की ऐसी कृपा न होती तो हम गुलाम होते’।

    भगवान का कीर्तन कर रहे हैं

    प्रेमानंद महाराज आगे कहते हैं कि- ‘महापुरुषों की कृपा से आजाद होकर हम लोग भगवान का कीर्तन कर रहे हैं। अनुष्का शर्मा ने वीडियो शेयर करते हुए हाथ जोड़ने वाली इमोजी भी बनाई है’।

    क्या पहले से तय होती है अकाल मृत्यु?

    एक व्यक्ति ने प्रेमानंद महाराज से पूछा कि क्या अकाल मृत्यु पहले से तय होती है? इस पर प्रेमानंद महाराज ने जवाब दिया कि – ‘जब कोई व्यक्ति बहुत ज्यादा पाप या महापाप करता है। तभी उसे अकाल मृत्यु दंड मिलता है। उन्होंने साफ किया है कि अकाल मृत्यु पहले से तय नहीं होती। प्रेमानंद महाराज के अनुसार, जब किसी से बहुत बड़ा अपराध हो जाता है तभी अकाल मृत्यु दंड के रुप में मिलती है। चाहे व्यक्ति को इसका पता हो या न हो लेकिन अगर उससे कोई गंभीर अपराध हो गया तो उसकी आयु कम हो जाती है’।
  • कल मनाया जाएगा तुलसी पूजन दिवस, जानें पूजा की सही विधि और मुहूर्त

    कल मनाया जाएगा तुलसी पूजन दिवस, जानें पूजा की सही विधि और मुहूर्त

    धर्म: हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे को खास महत्व दिया गया है। यह पौधा घर में लगाने से सुख-समृद्धि बढ़ती है। सनातन धर्म में भी इस पौधे को मां लक्ष्मी का स्वरुप माना जाता है। हर साल 25 दिसंबर को तुलसी पूजन दिवस मनाया जाता है। ये दिन तुलसी के धार्मिक और औषधीय महत्व को दर्शाता है। इस त्यौहार को मनाने की शुरुआत 2014 में हुई थी। देश के कई साधु-संतों ने 25 दिसंबर को तुलसी पूजन के तौर पर मनाने का फैसला लिया था। तभी से लेकर हर साल इसी दिन तुलसी पूजन दिवस मनाया जाता है।

    पूजा का शुभ मुहूर्त

    25 दिसंबर को तुलसी पूजन मनाया जाएगा। ऐसे में इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 8 बजे से लेकर 10 बजे तक होगा। शाम में पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 5:30 बजे से 7 बजे तक रहेगा। इस दौरान पूजा करना शुभ रहेगा।

    ऐसे करें पूजा

    इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। इसके बाद साफ कपड़े पहनें। पूजा की थाली बना लें। थाली में रोली, चंदन, कुमकुम, चावल, फूल, हल्दी और लाल चुनरी रखें। एक लौटे में शुद्ध जल भरें। इसके बाद सबसे पहले मां तुलसी को जल चढ़ाएं और हाथ जोड़कर नमन करें। इसके बाद तुलसी माता को चुनरी ओढ़ा दें। फिर सिंदूर, चावल, कुमकुम, हल्दी और फूल चढ़ाएं। धूप, बाती और दीपक जलाएं। तुलसी मां के मंत्रों को जाप करें।

    पूजा का महत्व

    मान्यताओं के अनुसार, तुलसी मां की पूजा करने से घर में पॉजिटिविटी आती है। सुख-समृद्धि बढ़ती है और जीवन में शांति आथी है। इसके अलावा तुलसी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती है। तुलसी पूजन दिवस पर श्रद्धा और विश्वास के साथ पूजा करके आप मां तुलसी का आशीर्वाद पा सकते हैं।

    इस बात का भी रखें ध्यान

    तुलसी के पौधे को हमेशा साफ और स्वस्थ रखें। पूजा के दौरान पूरे मन से श्रद्धा और भक्ति के साथ मंत्रों का उच्चारण करें। तुलसी मां को प्रसन्न करने के लिए भोग और दीपक नियमित रुप से अर्पित करें। ऐसा करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होगी।    
  • Christmas पर हरा-सफेद और लाल रंग क्यों माना जाता है खास? जानें पौराणिक मान्यता

    Christmas पर हरा-सफेद और लाल रंग क्यों माना जाता है खास? जानें पौराणिक मान्यता

    धर्म: ईसाई समुदाय के लोगों के द्वारा क्रिसमस का पर्व बहुत धूमधाम के साथ मनाया जाता है। हर साल 25 दिसंबर को दुनियाभर में यह त्योहार मनाया जाता है। इस दिन ईसाई लोग साज-सजावट करते हैं। एक-दूसरे को तोहफे देते हैं। सिर्फ ईसाई ही नहीं अन्य धर्म के लोग भी यह प्रथा फॉलो करते हैं। क्रिसमस के पहले बाजारों में रंग-बिरंगी लाइटें, क्रिसमस ट्री, सजावट के लिए स्टार, कलरफुल जुराब, लाल टोपी जैसी चीजें भी बाजार की रौनक बढ़ा देती हैं। क्रिसमस के मौके पर सिर्फ घर ही नहीं बल्कि चर्च, बाजार, दुकान, होटल, रेस्टोरेंट जैसी जगहों पर अलग-अलग रंगों के साथ सजावट की जाती है। क्रिसमस से सुनहरा, गुलाबी, लाल, हरा, नीला और सफेद रंग जुड़े होते हैं परंतु हरा, लाल और सफेद रंग क्रिसमस के लिए पारंपरिक माना जाता है।

    हरा रंग

    क्रिसमस पर हरे रंग का पारंपरिक महत्व सदाबहार पौधों के साथ जुड़ा हुआ है। इसको हम क्रिसमस ट्री के तौर पर सजाते हैं। सदाबहार के पौधे का रंग कभी नहीं जाता। ऐसा माना जाता है कि सालों पहले क्रिसमस में कड़ाके में रोमन लोगों ने एक-दूसरे को सौभाग्य के प्रतीक के तौर पर सदाबहार पौधा या उसकी शाखाएं दी जाती थी। सर्दियों में यहां ज्यादातर पेड़-पौधे सूख जाते हैं वहीं यह हमेशा हरा रहता है ऐसे में इसके हरे रंग से यह सीख मिलती है कि मुश्किल समय में भी जीवन में आशा रहनी चाहिए। इसी वजह से क्रिसमस ट्री के तौर पर पेड़ को चुना गया है। ईसाई परंपरा के अनुसार, हरा रंग अच्छे जीवन और ईश्वर की कृपा का संकेत देता है। यह रंग उम्मीद और पुनर्जन्म का भी प्रतीक माना जाता है।

    सफेद रंग

    पश्चिमी संस्कृति में सफेद रंग को पवित्रता और शांति का प्रतीक माना जाता है। सर्दियों में चारों ओर बर्फ की चादर होती है। 18वीं सदी में पेड़ों के लिए सफेद वेफर्स इस्तेमाल किए जाते थे। सफेद वेफर और लाल सेब ईसा मसीह के शरीर और रक्त के कैथोलिक प्रतीक थे। ईसाई अपने घरों को सफेद रंग से सजाते थे ताकि यीशू के जन्म का स्वागत किया जा पाए। क्रिसमस के मौके पर ज्यादातर चर्चों में भी सजावट के लिए सफेद रंग ही इस्तेमाल होता है ऐसे में इसको क्रिसमस का पारंपरिक रंग माना जाता है।

    लाल रंग

    मध्य युग के दौरान यूरोप के कई हिस्सों में क्रिसमस के पहली शाम स्वर्ग कथाओं पर आधारित कुछ नाटक होते थे। इनमें उन लोगों को बाइबिल की कहानियां सुनाई जाती थी जो कि इसे पढ़ नहीं सकते थे। नाटक में ईडन गार्डन में स्वर्ग का वृक्ष या चीड़ का पेड़ होता था जिस पर लाल रंग के सेब बंधे हुए दिखते थे क्योंकि इस महीने में सेब और होली बेरी आसानी से उपलब्ध हो जाते थे ऐसे में सजावट के लिए इसका इस्तेमाल होता था इसलिए क्रिसमस में लाल रंग के इस्तेमाल की परंपरा शुरु हो गई।    
  • भविष्य को लेकर चिंतित हुए महाभारत फेम एक्टर, Premanand Maharaj से पूछे सवाल, देखें वीडियो

    भविष्य को लेकर चिंतित हुए महाभारत फेम एक्टर, Premanand Maharaj से पूछे सवाल, देखें वीडियो

    धर्म: वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज से आए दिन लोगों मिलने के लिए जाते हैं। उनके अनमोल विचार हर किसी की जिंदगी बदल देते हैं। अब हाल ही में उनके प्रवचनों को सुनने के लिए महाभारत के दुर्योधन के एक्टर अर्पित रांका पहुंचे। उन्होंने महाराज को प्रणाम किया और उनसे आशीर्वाद भी लिया। सोशल मीडिया पर एक्टर अर्पित रांका का प्रेमानंद महाराज से हुई मुलाकात का एक वीडियो भी वायरल हुआ है।
     
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    भविष्य को लेकर चिंतित हैं एक्टर

    एक्टर अर्पित रांका ने प्रेमानंद महाराज से मुलाकात के दौरान अपनी दुविधा बताई। एक्टर ने कहा कि – ‘इतने खलनायकों के रोल किए हैं। कभी दुर्योधन, कभी कंस तो कभी रावण बना हूं। मेरा सवाल ये है कि काम के बीच मिलने की यात्रा होती है कि नया रोल मिले वो बड़ा कठिन हो जाता है। उसमें मन विचलित भी हो जाता है और भविष्य की चिंता होने लगती है। बच्चों की चिंता से मन में नेगेटिव विचार आने लगते हैं’। इसका जवाब देते हुए प्रेमानंद महाराज ने कहा कि – ‘नाम जप करो यदि खाली समय में नाम जप करोगे तो उससे आपको बहुत ही बल मिलेगा। भगवान विश्वात्मा ने बिना किसी की मदद के पूरी सृष्टि प्रकट की है। वही इसका पालन-पोषण भी कर रहे हैं। जो भगवान अनगिनत ब्रह्मांडों को संभाल सकते हैं उनके लिए हमारी छोटी सी परेशानी कोई बड़ी बात नहीं है। अगर हमारा मन भगवान से जुड़ा रहेगा तो जीवन की कई मुश्किलें अपने आप आसान होने लग जाएगी’।

    मैं आपसे मिलना चाहता था

    एक्टर ने आगे कहा कि – ‘मैं कहीं पर भी होता हूं तो सुंदरकांड का पाठ करता हूं और मैंने जीवन में कभी मांसाहार या नशे का सेवन नहीं किया है। यदि आप स्वस्थ रहें मेरी बस यही इच्छा है क्योंकि आप अपने शब्दों से पूरे संसार में बदलाव लाए हैं। गुरुदेव मैं आपसे काफी समय से मिलना चाहता था और आज मुझे साक्षात दर्शन हो गए। मैं बहुत ही सौभाग्यशाली हूं’। इसका जवाब देते हुए प्रेमानंद ने कहा कि – ‘आपके ऊपर भगवान की बड़ी कृपा है। जीवन में उन्नतिशील बनने के लिए नाम-जप कीजिए। व्यायाम जरुर करते रहिए क्योंकि व्यायाम शरीर को हष्ट-पुष्ट बनाता है। नाम जप से मन स्वस्थ रहेगा और व्यायाम से शरीर स्वस्थ रहेगा। विश्व का भरण पोषण करने वाले भगवान अपने जनों की रक्षा करते हैं। वो सब व्यवस्था करते हैं। चिंता करने आप कमजोर हो जाएंगे और भगवत चिंतन करके आनंदित रहेंगे इसलिए हमेशा नाम-जप करते ही रहिए’।
  • क्या सच में हाथों में अंगूठी पहनने से बदलती है किस्मत? Premanand Maharaj से जानें जवाब

    क्या सच में हाथों में अंगूठी पहनने से बदलती है किस्मत? Premanand Maharaj से जानें जवाब

    धर्म: मथुरा-वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज की सीख से लोगों के जीवन में कई तरह के बदलाव होते हैं। देश-विदेश से श्रद्धालु उनके दर्शन करने के लिए आते हैं। अपनी जिंदगी से जुड़े सवाल पूछकर परेशानियों का हल निकलवाते हैं। अब हाल ही में एक भक्त ने महाराज से सवाल किया कि आजकल काफी लोग अपना नाम बदल देते हैं या नाम के आगे-पीछे नंबर, अक्षर या स्पेलिंग जोड़ रहे हैं और हाथों में अंगूठियां पहन रहे हैं क्या सच में इससे किस्मत बदलती है?

    कोई बदलाव नहीं आता

    इस प्रश्न का प्रेमानंद महाराज ने बहुत ही आसान जवाब दिया। उन्होंने कहा कि यदि नाम बदलने या उसमें जोड़ घटाव करने से किस्मत बदलती तो आज हर कोई व्यक्ति ऐसा ही कर रहा होता। उन्होंने भक्तों से यह कहा कि खुद ही आप ऐसा करके देख लें और फिर अपना अनुभव बताएं। महाराज ने साफ शब्दों में कहा कि ऐसे उपाय करने वाले लोग भ्रम में रहते है और वो बेवकूफी कर रहे होते हैं। सिर्फ अंगूठी पहन लेने, छल्ला करने या जंतर-मंतर करने से जीवन में कोई बदलाव नहीं आता है।

    सिर्फ एक संयोग है

    महाराज ने समझाया कि यदि सच में किस्मत बदलनी है तो उसका सिर्फ एक ही उपाय है और वो है ईश्वर का नाम जपना और कड़ी मेहनत। नाम जप से ही मन शुद्ध होता है, पॉजिटिव विचार आते हैं और कर्म सही दिशा में बढ़ते हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि कई बार लोगों को लगता है कि किसी उपाय से उन्हें अचानक फायदा हो रहा है परंतु वास्तव में वह पहले किए गए पुण्य कर्मों का फल होता है। यदि ऐसा हो तो यह सिर्फ एक तुक्का या संयोग हो सकता है।

    नाम जप से मिलेगा फायदा

    महाराज ने आगे कहा कि नाम बदलने या उसके स्पेलिंग बदल लेने से न ही सपने पूरे होते हैं और न ही जिंदगी की परेशानियां खत्म होती है। सपनों को सच करने के लिए अच्छी मेहनत, ईमानदारी और निरंतर प्रयास की जरुरत होती है। इसके अलावा भगवान का नाम जपने से शक्ति मिलती है और कठिन समय में ताकत बढ़ती है।      
  • इस दिन मनाई जाएगी साल 2026 की पहली एकादशी, जानें शुभ-मुहूर्त और पूजा विधि

    इस दिन मनाई जाएगी साल 2026 की पहली एकादशी, जानें शुभ-मुहूर्त और पूजा विधि

    धर्म: एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। मान्यताओं के अनुसार, जो सालभर की 24 एकादशी का व्रत करता है उसे मोक्ष मिलता है। यह दिन व्रत, पूजा और किसी भी धार्मिक अनुष्ठान के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है। विशेष मनोकामना पूरी करने के लिए भी एकादशी व्रत का कास महत्व बताया गया है। साल 2026 में पहली एकादशी माघ महीने की कृष्ण पक्ष की एकादशी होगी। इसको षटतिला नाम की एकादशी से भी जाना जाता है। यह व्रत 14 जनवरी 2026 को रखा जाएगा। इसी दिन मकर संक्रांति भी मनाई जाएगी।

    एकादशी का शुभ मुहूर्त

    माघ महीने की कृष्ण पक्ष की एकादशी 13 जनवरी 2026 को दोपहर 3:17 पर शुरु होगी। यह अगले दिन जनवरी को शाम 5:52 पर खत्म होगी। इस दिन सुबह घर में सत्यनारायण भगवान की पूजा करना शुभ माना जाता है। षटतिला एकादशी पर मुहूर्त सुबह 7:15 से लेकर 9:53 तक रहेगा।

    व्रत पारण का समय

    षटतिला एकादशी में व्रत के पारण का समय 15 जनवरी सुबह 7:15 से लेकर सुबह 9:21 तक रहेगा। पारण तिथि के दिन द्वादशी भी खत्म हो जाएगी जिसका समय रात 8:16 का होगा।

    एकादशी में इस्तेमाल होते हैं तिल

    माघ महीने में आने वाले हर व्रत त्योहार में तिल का इस्तेमाल किया जाता है। तिल की उत्पत्ति विष्णु भगवान से हुई है। ऐसे में माघ महीने की एकादशी पर 6 तरह के तिल इस्तेमाल करने से श्री हरि की कृपा बरसती है। षट का अर्थ है छह और तिला का अर्थ है तिल। इसी कारण से इस एकादशी को षटतिला एकादशी कहते हैं। इस दिन तिल से स्नान करना, तिल के साथ हवन करना, तिल का दान करना. तिल से बना खाना खाना, पानी में तिल डालकर पीना और तिल भगवान को अर्पित करने चाहिए। व्रत के दौरान रखें ध्यान यदि आप एकादशी का व्रत रख रहे हैं तो अन्न-चावल का सेवन न करें। . इसके अलावा तुलसी के पत्ते न तोड़ें। . किसी भी तरह का कोई लड़ाई-झगड़ा न करें। . घर और मंदिर की साफ-सफाई का ध्यान रखें क्योंकि साफ-सफाई वाली जगहों पर ही मां लक्ष्मी का निवास होता है।
  • सफला एकादशी पर मिलेगी भगवान विष्णु की कृपा, इस विधि के साथ करें पूजा

    सफला एकादशी पर मिलेगी भगवान विष्णु की कृपा, इस विधि के साथ करें पूजा

    धर्म: हिंदू धर्म में एकादशी की तिथि का बहुत खास महत्व बताया गया है। महीने में 2 एकादशी आती है और साल में कुल 24 एकादशी तिथि होती है। दिसंबर महीने में पड़ने वाली एकादशी को सफला एकादशी के तौर पर जाना जाता है। करियर-कारोबार से लेकर शिक्षा और हर क्षेत्र में सफलता हासिल करने के लिए यह एकादशी बहुत ही श्रेष्ठ मानी जाती है। पंचागों के अनुसार, हर साल सफला एकादशी पौष महीने की कृष्ण पक्ष की एकादशी मनाई जाती है परंतु इसकी तिथि को लेकर लोग थोड़े कंफ्यूज है।

    कल मनाई जाएगी सफला एकादशी

    पौष महीने की सफला एकादशी का व्रत सोमवार को रखा जाएगा। ज्योतिषाचार्य के अनुसार, कृष्ण पक्ष की एकादशी 14 दिसंबर की रात 8:46 पर शुरु होगी और 15 दिसंबर की रात 9:20 तक रहेगी। पंचागों के अनुसार, 15 दिसंबर को सफला एकादशी का व्रत और पूजा किया जाएगा।

    पूजा विधि

    इस दिन भगवान विष्णु की पूजा विधि-विधान के साथ की जाती है। सुबह स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनें। फिर पूजा स्थान की साफ-सफाई करें। एक चौकी पर लाल रंग का कपड़ा बिछाएं और भगवान विष्णु की प्रतिमा रखें। भगवान को गंगाजल छिड़कें और फिर साफ वस्त्र पहनाएं। इसके बाद श्री हरि का श्रृंगार करें और चंदन का तिलक लगाएं। इसके बाद फल, फूल, मिठाई भोग और तुलसी दल अर्पि करें। इसके बाद व्रत कथा का पाठ करें। अंत में भगवान विष्णु की आरती करने के बाद पूजा समाप्त कर दें। पूजा के बाद भगवान विष्णु के सामने कोई भी यदि गलती हुई तो हाथ जोड़कर माफी मांग लें।

    एकादशी का महत्व

    शास्त्रों में सफला एकादशी के व्रत का बहुत ज्यादा महत्व बताया गया है। पौष कृष्ण की इस एकादशी पर जो भी भक्त पूरे श्रद्धा के साथ व्रत रखकर सभी नियमों का पालन करता है उसके सभी पाप दूर हो जाते है। व्रत के प्रभाव से काम में आने वाली बाधाएं भी दूर होती है और व्यक्ति को जीवन में सभी क्षेत्र में सफलता मिलती है। इस व्रत को करने से जीवन में आ रही बाधाएं
  • इस दिन मनाई जाएगी साल की आखिरी अमावस्या, पितरों की मिलेगी कृपा, करें ये उपाय

    इस दिन मनाई जाएगी साल की आखिरी अमावस्या, पितरों की मिलेगी कृपा, करें ये उपाय

    धर्म: हिंदू धर्म में पौष अमावस्या को बहुत ही पवित्र माना जाता है। यह दिन खासतौर पर पितरों को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पितृ लोक से पितर धरती पर आते हैं और अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं। वैदिक पंचागों के अनुसार, इस साल पौष अमावस्या 19 दिसंबर को मनाई जाएगी। इस दिन कई शुभ योग भी बन रहे हैं जिससे इसका धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। अमावस्या वाले दिन कुछ खास उपाय करने से पितरों की कृपा मिलने के साथ-साथ बल्कि जीवन में सुख-स्मृद्धि और शांति भी आती है। इस दिन पितरों को तर्पण, पिंडदान करना बहुत शुभ माना जाता है।

    अमावस्या पर बनेंगे ये तीन शुभ योग

    पौष अमावस्या वाले दिन ब्रह्मा मुहूर्त सुबह 5:19 से लेकर 6:14 तक रहेगा। वहीं अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:58 से शुरु होकर 12:39 तक रहेगा। इस दिन लाभ उन्नति का शुभ मुहूर्त सुबह 8:26 से लेकर रात 9:43 तक रहेगा। वहीं अमृत सर्वोत्तम मुहूर्त 9:43 से 11:01 तक रहेगा।

    पितर होंगे प्रसन्न

    इस दिन सुबह पवित्र नदी में स्नान करना भी बहुत शुभ माना जाता है। यदि आप नदी में नहाने नहीं जा सकते तो घर में ही पानी में गंगाजल डालकर स्नान कर सकते हैं। स्नान के बाद पितरों को तर्पण करें। तर्पण करते समय दक्षिण दिशा की ओर मुख रखना जरुरी माना जाता है क्योंकि यह दिशा पितरों की मानी जाती है। ऐसा करने से पितर खुश होंगे और उनका आशीर्वाद आपको मिलेगा।

    दीपदान करें जरुर

    इस दिन दीपदान का भी खास महत्व होता है। पीपल के पेड़ के नीचे इस दिन दीया जलाना बहुत शुभ होता है। ऐसा माना जाता है कि पीपल के वृक्ष में देवताओं के साथ-साथ पितरों का भी वास होता है। दीपदान करने से पितृ दोष शांत होगा और घर में पॉजिटिव एनर्जी का संचार होगा। इसके अलावा पितरों के नाम से पूजा और प्रार्थना करने से भी शुभ फल मिलेगा।    
  • 75 साल बाद माघ महीने में बन रहा खास संयोग, जानें स्नान का महत्व

    75 साल बाद माघ महीने में बन रहा खास संयोग, जानें स्नान का महत्व

    धर्म: हिंदू कैलेंडर के अनुसार, पौष महीने के बाद माघ महीना शुरु हो जाता है। शास्त्रों में यह महीना दान-स्नान के लिए बहुत खास बताया गया है। माघ महीने के मेले का आयोजन उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में होता है। मान्यताओं के अनुसार, इस महीने में जो भी लोग गंगा स्नान करते हैं वो पापों से मुक्त हो जाते हैं। जीवन में हमेशा सुख-समृद्धि बनी रहती है और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

    इस महीने होता है साधु-संतों का मिलन

    मान्यताओं के अनुसार, इस महीने में जो भी लोग गंगा स्नान करते हैं वो पाप से मुक्त हो जाते हैं। उनको जीवन में हमेशा सुख-स्मृद्धि मिलती है और मोक्ष प्राप्त होता है। माघ का मेला एक धार्मिक उत्सव होता है। इसमें साधु-संतों, गृहस्थों और आम-श्रद्धालुओं के आध्यात्मिक मिलन का मौका होता है। इस समय भक्त पूरी आस्था के साथ संगम तट पर पहुंचकर पवित्र स्नान करते हैं और भगवान के प्रति अपने भाव को प्रकट करते हैं।

    इस दिन शुरु होगा माघ मेला

    इस बार माघ महीना 3 जनवरी को पौष पूर्णिमा के साथ पौष महीने खत्म हो जाएगा। उसी दिन से माघ महीना शुरु हो जाएगा। माघ मेले की शुरुआत 3 जनवरी से हो जाएगी। यह मेला महाशिवरात्रि तक चलेगा। हिंदू पंचाग के अनुसार, इस बार महाशिवरात्रि 15 फरवरी को होगी ऐसे में माघ मेले का समापन भी 15 फरवरी को ही होगा।

    बन रहे शुभ योग

    ज्योति शास्त्रों की मानें तो माघ मेले की शुरुआत नए साल में 4 जनवरी को होगी। इस दिन त्रिपुष्कर जैसे अद्भूत योग बन रहे हैं। इसके बाद मेला खत्म रविवार को होगा। 75 साल के बाद रविवार वाले दिन सूर्य मकर राशि में जाने वाले हैं ऐसे में रविवार सूर्य का अपना दिन होता है इसलिए यह योग बहुत ही शुभ होगा।

    इस मेले का महत्व

    माघ महीना दान और पवित्र स्नान के लिए बहुत शुभ माना जाता है। शास्त्रों में यह बताया भी गया है कि इस महीने पवित्र नदियों में स्नान करने से व्यक्ति के पाप नष्ट होते हैं और अक्षय पुण्य मिलता है। इसी कारण मकर संक्रांति से लेकर पूरे माघ महीने तक बड़ी संख्या में श्रद्धालु संगम में पहुंचकर स्नान पूजा और साधना करते हैं। जो लोग महाकुंभ में शामिल नहीं हो पाए वो माघ महीने के इस पावन समय में संगम में डुबकी लगा सकते हैं।    
  • इस दिन से शुरु होगा खरमास, शादी विवाह जैसे शुभ कामों पर लग जाएगी रोक

    इस दिन से शुरु होगा खरमास, शादी विवाह जैसे शुभ कामों पर लग जाएगी रोक

    धर्म: शादी जैसे मांगलिक कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त बेहद जरुरी होता है क्योंकि ये शुभ काम जीवन में खुशियां लेकर आते हैं। देवी-देवता और ग्रहों की कृपा से ये काम खत्म हो पाते हैं। 16 दिसंबर से खरमास लग जाएगा इसके बाद शादी, मुंडन जैसे सभी कामों पर रोक लग जाती है परंतु इससे पहले 11 दिसंबर को शुक्र अस्त हो रहे हैं। शुक्र के अस्त होने पर भी शादियां नहीं होती।

    शादियों पर लगेगी रोक

    11 दिसंबर को सुबह ठीक 6:35 मिनट पर धन, यश और वैभव के दाता शुक्र वृश्चिक राशि में रहते हुए सूर्य के बहुत करीब अस्त होंगे। शुक्र प्रेम, वैवाहिक जीवन के कारक हैं। अस्त होने पर इन क्षेत्रों में अच्छे परिणाम नहीं आते क्योंकि जो ग्रह अस्त होता है उसकी शक्ति कम होजाती है और कुंडली में उसका शुभ प्रभाव नहीं रहता।

    फरवरी से शुरु होंगे मांगलिक काम

    15 जनवरी को खरमास खत्म हो जाएगा। खरमास के खत्म होने के बाद शुभ काम शुरु हो जाएंगे परंतु शुक्र 53 दिनों के लिए अस्त होगा ऐसे में शुक्र 1 फरवरी 2026 को उदित होगा ऐसे में इसके बाद ही शादियां शुरु होंगी और सभी मांगलिक काम फिर से शुरु हो जाएंगे।

    2026 में रहेंगे शादियों के मुहूर्त

    फरवरी 2026 में शादी-विवाह के लिए 12 शुभ मुहूर्त होंगे। इसमें 5,6,8,10,12,14,19, 20,21, 24,25, 26 फरवरी की तारीख शामिल होगी। वहीं बसंत पंचमी शादी के लिए सबसे अच्छा दिन माना जाता है क्योंकि ये सिद्ध मुहूर्त होता है परंतु साल 2026 में बसंत पंचमी पर शादी के लिए मुहूर्त नहीं होगा क्योंकि बसंत पंचमी 23 जनवरी को उस समय शुक्र अस्त होंगे इसलिए इस दौरान शादियां नहीं हो पाएंगी।

    न करें ये काम

    खरमास के दौरान गृह प्रवेश करना भी अशुभ माना जाता है। ऐसा करने से दोष लगने की संभावना रहती है। इसके अलावा इस दौरान कोई नया व्यापार नहीं शुरु करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस दौरान शुरु किए गए कामों में रुकावटें और परेशानियां आ सकती हैं और सफलता नहीं मिलती।