कोबरा से भी खतरनाक! ये शख्स 650 बार पी चुका है सांप का ज़हर

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नई दिल्लीः जहां किंग कोबरा का एक डंक इंसान की जान लेने के लिए काफी होता है, वहीं अमेरिका का एक व्यक्ति ऐसा भी है जो अब खुद जहर से भी खतरनाक बन चुका है। लेकिन लोगों की जान बचाने के लिए।

हम बात कर रहे हैं टिम फ्रीदी (Tim Friede) की, जिसने पिछले दो दशकों में 650 बार सांप का ज़हर खुद में इंजेक्ट किया और खुद को 200 से ज्यादा बार खतरनाक सांपों से कटवाया। अब वैज्ञानिक टिम के खून से नई पीढ़ी की एंटी वेनम बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।

टिम फ्रीदी की कहानी किसी फिल्मी किरदार से कम नहीं है। कभी ट्रक मैकेनिक रहे फ्रीदी को पहली बार 5 साल की उम्र में सांप ने काटा था। फिर धीरे-धीरे उनका सांपों और उनके जहर से एक अजीब सा रिश्ता बनता चला गया।

2001 में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर हमले के बाद हुए मानसिक सदमे ने उन्हें इतना तोड़ दिया कि उन्होंने खुद को दो घातक सांपों से कटवा लिया। वो चार दिन तक कोमा में रहे और फिर एक नए मिशन के साथ लौटे: जहर के खिलाफ इम्यूनिटी बनाना।

लंबे समय तक वैज्ञानिकों ने उनके दावों को नजरअंदाज किया, लेकिन हाल ही में प्रकाशित Cell जर्नल की एक स्टडी ने पुष्टि की है कि टिम के खून में दो ऐसी एंटीबॉडीज़ पाई गई हैं, जो घातक सांपों के जहर को निष्क्रिय करने में सक्षम हैं। यही नहीं, उनके शरीर की प्रतिरोधक प्रणाली अब सांपों के कई किस्मों के जहर को पहचानकर उसे बेअसर कर सकती है।

इंसान से बनेगी दवा, होगा बड़ा बदलाव

अब तक घोड़ों और अन्य जानवरों में जहर इंजेक्ट कर बनती थी एंटी वेनम दवा, लेकिन उनमें सीमाएं थीं, ये दवाएं सभी सांपों के जहर पर असर नहीं करतीं और कुछ मामलों में शरीर के साथ रिएक्शन भी कर जाती हैं।

टिम फ्रीदी इंसानी इम्यूनिटी से बनी दवा के लिए आदर्श केस हैं। उनके खून से तैयार की जा रही एंटीबॉडीज़ संभावित रूप से ज्यादा असरदार और सुरक्षित होंगी।

दवा Varespladib से मिली नई उम्मीद

शोध में एक और नई दवा का जिक्र हुआ है, varespladib, जो 19 में से 13 खतरनाक सांप प्रजातियों के जहर को निष्क्रिय करने में सक्षम पाई गई है। ये दवा भी भविष्य में यूनिवर्सल एंटी वेनम की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है।

WHO के अनुसार, हर साल दुनिया भर में 1.38 लाख से ज्यादा लोग सांप के काटने से मर जाते हैं, और कई लाख स्थायी विकलांगता का शिकार हो जाते हैं। ऐसे में टिम फ्रीदी की रिसर्च और उनके शरीर से तैयार हो रही दवा इंसानियत के लिए एक वरदान साबित हो सकती है।

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