बठिंडाः जिले में इंफ्लुएंसर कमल कौर भाभी के कत्ल मामले में गिरफ्तार किए दोनों आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चलान पेश किए गए थे। वहीं चालान होने के बाद अब जसप्रीत सिंह और निमरतजीत सिंह के खिलाफ अदालत ने आज दोनों को दोषी ठहराते हुए केस चलाने की प्रक्रिया शुरू की है। हालांकि दोनों आरोपियों ने अदालत में दोषों से इनकार करते हुए अपने बचाव में ट्रायल चलाने की अपील की है। वहीं इस मामले में अभी भी अमृतपाल सिंह मेहरो और रणजीत सिंह फरार चल रहे है। बताया जा रहा है कि अमृतपाल सिंह भारत से UAE में छिपा हुआ है। जबकि रणजीत सिंह की लोकेशन का अब तक कोई पता नहीं चल सका है।
बता दें कि घटना को लेकर एसएसपी अमनीत कौंडल ने बताया था कि जांच के दौरान पता चला कि अमृतपाल सिंह मेहरू जोकि 8 जून, 2025 को कमल कौर के घर गया था, लेकिन कमल घर पर नहीं थी, इस कारण वापस चला गया। वहीं, 9 जून 2025 को कार की प्रमोशन करवाने के बहाने आरोपी जसप्रीत सिंह निवासी धुरकोट टाहली वाला चौक, गांव मेहरों, जिला मोगा और निमरतजीत सिंह निवासी पेटी रोड, हरिके पतन जिला तरनतारन कमल कौर को लेकर बठिंडा लेकर आए। जिसके बाद आरोपियों ने कमल कौर का गला दबाकर हत्या कर दी और खुद फरार हो गए।
दूसरी ओर जांच एजेंसियों के अनुसार, इस हत्याकांड में एक अज्ञात व्यक्ति की पहचान अभी बाकी है, जिसकी भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। पुलिस टीम इस दिशा में जांच तेज कर चुकी है। गौरतलब है कि कमल कौर भाभी की हत्या ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी थी। पुलिस ने लंबी जांच के बाद 4 मुख्य आरोपियों के खिलाफ चालान अदालत में दाखिल किया था। अब मामले की सुनवाई अगले चरण में पहुंचेगी, जिसमें अदालत गवाहों और सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करेगी।







बता दें कि संजय अरोड़ा यूटी एडमिनिस्ट्रेशन ज्वाइन करेंगे, वह वहां सुपरिटेंडेंट इंजीनियर थे और नगर निगम में चीफ इंजीनियर के लिए डेपुटेशन पर लगाए गए थे। इन्हें 24 सितंबर 2024 को यहां तैनात किया गया था और डेढ़ साल के कार्यकाल के बाद उन्हें यहां से हटा दिया गया है। वह पहले ऐसे अधिकारी हैं, जो तीन साल का कार्यकाल भी पूरा नहीं कर सके हैं। संजय अरोड़ा पहले चीफ इंजीनियर थे, जो यूटी प्रशासन से नगर निगम में लगाए गए थे। इससे पहले पंजाब या हरियाणा के अधिकारियों की पोस्टिंग यहां होती थी।
इस समय नगर निगम के सभी छोटे बड़े अफसरों के संजय अरोड़ा चहेते रहे हैं। भले ही नगर निगम मेयर हरप्रीत कौर बबला का कार्यकाल डेढ़ माह का ही रह गया हो, मगर भाजपा के पार्षदों की वजह से यह कार्रवाई हो पाई है। सजंय को हटाने के मुख्य कारण है, जिनमें बड़े टेंडर सिरे नहीं चढ़ पा रहे थे, जिसमें कचरा निपटारा प्लांट डडूमाजरा में बनना है, एनजीटी और हाईकोर्ट ने जुर्माना लगाया हुआ है। पार्षदों और ठेकेदारों के साथ लगातार टकराव की स्थिति बन रही थी। मनीमाजरा हाउसिंग प्रोजेक्ट के सभी कागजात विरोधी पार्षदों के पास जा रहे थे और इससे वह मेयर को घेरने में कामयाब हो रहे थे। आर्किटेक्ट विभाग से भी इस संबंधी शिकायत ऊपर जा रही थीं।


