सिरसाः हरियाणा के सिरसा में ट्रैफिक पुलिस के साथ पंजाब की महिला का हाईवोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। दरअसल, पुलिस ने महिला की गाड़ी का 9 हजार रुपए का चालान काट दिया। जिसके बाद गुस्से में आई महिला हाई वोल्टेज ड्रामा करते हुए सड़क पर ट्रैफिक पुलिस कर्मचारियों से भिड़ गई। महिला के ट्रैफिक पुलिस से भिड़ने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। आरोप है कि पुलिस की पीसीआर गाड़ी की चाबी भी निकाल ली। इस दौरान पुलिस कर्मी उससे चाबी मांगते रहे लेकिन उसने उनकी एक ना सुनी। करीब एक घंटे तक चली बहस के बाद आखिर में महिला ने चाबी पीसीआर गाड़ी के बोनट पर फेंक दी। इस पर ट्रैफिक पुलिस पास के ही शहर थाने में पहुंच गई, जहां महिला और उसके परिवार को बुलाया गया। यहां महिला और उसके परिवार ने माफी मांगी।
बताया जा रहा है कि पंजाब से एक परिवार के 20 से 25 लोग पिकअप गाड़ी में राजस्थान के गोगामेड़ी में धोक लगाने जा रहे थे जा रहे थे। इन्होंने गाड़ी में 2 स्टोरी बना रखी थीं। जब ये सिरसा शहर में सुभाष चौक पर पहुंचे तो ट्रैफिक पुलिस ने नियमों की अवहेलना पर उन्हें रोका और साढ़े 9 हजार रुपए का चालान काट दिया। चालान काटने पर ड्राइवर और परिवार के लोग नाराज हो गए। उनकी पुलिस के साथ काफी कहासुनी हुई। इस बीच एक महिला ने पुलिस पीसीआर की चाबी निकाल ली और चालान वापस लेने की बात कहने लगी। ट्रैफिक पुलिस ने महिला से कई बार चाबी वापस देने की गुजारिश की, लेकिन महिला ने चाबी नहीं लौटाई। उनके बीच करीब एक घंटे तक यह ड्रामा चला।
बाद में महिला ने चाबी पुलिस को देने के बजाय गाड़ी के बोनट पर फेंक दी। इसके बाद ट्रैफिक पुलिस ने इसकी शिकायत शहर थाना पुलिस को दी। थाने में पहुंचने पर महिला और उसके परिजनों ने पुलिस से माफी मांगते हुए कहा कि ऐसा दोबारा नहीं होगा। शहर थाना पुलिस से एसआई राजेंद्र सिंह ने बताया कि रूटीन में गाड़ी चेकिंग की थी। उसी अनुसार चालान किया है। यह गाड़ी लोडिंग की थी और इसमें सवारी नहीं बैठा सकते। इसमें डबल स्टोरी बनाकर सवारी बैठाई हुई थी। इसलिए चालान किया गया। महिला ने काफी ड्रामा किया।





कार्यशाला का उद्देश्य जिला के समस्त अभियंताओं, तकनीकी कर्मचारियों, सरकारी एवं निजी क्षेत्र के ठेकेदारों, आर्किटेक्ट्स और निर्माण कार्यों में शामिल कामगारों को सुरक्षित निर्माण अभ्यास के बारे में जानकारी और प्रशिक्षण प्रदान करना था। इसके अलावा कार्यशाला का मुख्य मकसद भूकंप सुरक्षा और निर्माण कार्यों के दौरान अनिवार्य सुरक्षा उपायों पर ध्यान केंद्रित करना है जिससे लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यशालाएं समाज में जागरूकता फैलाने और सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू करने में मदद करती हैं।
राजन शर्मा ने बताया कि इस दौरान उपस्थित व्यक्तियों को अपने आसपास के समुदायों को आपदाओं के प्रति जागरूक और उन्हें प्रशिक्षित करने पर बल दिया गया ताकि किसी भी प्राकृतिक या मानव निर्मित आपदा के दौरान वे सही तरीके से प्रतिक्रिया कर सकें। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन जिला प्रशासन के प्रयासों का हिस्सा हैं, जो जिले के लोगों को अधिक सुरक्षित और सक्षम बनाने के लिए किए जा रहे हैं।
भूकंप सुरक्षा और भवन निर्माण पर चर्चा
कार्यशाला में डॉ. हेमंत कुमार विनायक, एसोसिएट प्रोफेसर, एन.आई.टी. हमीरपुर ने अपने पहले सत्र में 4 अप्रैल 1905 के कांगड़ा भूकंप के दौरान भवनों को हुए भारी नुकसान के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि भूकंप जानलेवा नहीं होते, बल्कि असुरक्षित और कमजोर निर्माण जानलेवा साबित होते हैं। उन्होंने उपस्थित सभी तकनीकी विशेषज्ञों से अपील की कि वे राष्ट्रीय भवन कोड-2016 का पालन करते हुए भूकंपरोधी भवन निर्माण पर जोर दें। साथ ही, उन्होंने म्यांमार में हाल ही में आए 7.7 तीव्रता के भूकंप का उदाहरण देते हुए कहा कि भूकंप की तीव्रता अधिक होने पर भी सही निर्माण पद्धतियों से बड़े पैमाने पर जान-माल की हानि को रोका जा सकता है।
दूसरे सत्र में आपदा प्रबंधन पर चर्चा
दूसरे सत्र में हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल कांगड़ा के मुख्य आरक्षी अजय ने भूकंप के बाद खोज और बचाव कार्य, प्राथमिक उपचार और आपदा प्रबंधन के अन्य पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि एक प्रभावी प्रतिक्रिया कार्यबल और स्थानीय समुदाय का सही प्रशिक्षण और तैयारियों से आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भवन निर्माण में प्रयोग की गई सामग्री की गुणवत्ता और मात्रा की सही निगरानी जरूरी है ताकि निर्माण कार्यों में कोई कमी न हो। इस मौके पर प्रभारी, जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र ऊना धीरज कुमार, कन्वीनर जिला अंतर एजेंसी समूह कांगड़ा डॉ हरजीत भुल्लर, सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी भी उपस्थित रहे।





