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  • श्री राम सेवा समिति ने 11 जोड़ो का रचाया सामुहिक विवाह, समिति की ओर से सभी जोड़ों को दिया जरूरी घरेलू सामान

    श्री राम सेवा समिति ने 11 जोड़ो का रचाया सामुहिक विवाह, समिति की ओर से सभी जोड़ों को दिया जरूरी घरेलू सामान

    विधायक राम कुमार ने भी दिया जोड़ों को आर्शिवाद 

    बद्दी/सचिन बैंसल: बद्दी के दशहरा ग्राउंड  में श्री राम सेवा समिति की ओर से  आयोजित 11 जोड़ों के सामूहिक विवाह कार्यक्रम कराया।  यह सभी जोड़े आर्थिक दृष्टि से कमजोर थे। इनके माता पिता इनका विवाह करने में असमर्थ थे। समिति के प्रधान रोशनलाल तायल, सचिव रमन गुप्ता, निशांत कुंडलस, रवि गर्ग, मोहित गोयल, राजेश जिंदल, गुरपाल लुबाना के नेतृत्व में कमेटी ने इस जोड़ों का चयन किया और सोमवार को दशहरा मैदान में इस सभी जोड़ों का विधिवत रूप से विवाह कराया गया।

    समिति के अध्यक्ष रोशनलाल तायल ने बताया कि उनकी कमेटी को बने हुए एक साल हुआ है। यह पहला मौका है जब उन्होंने सामुहिक विवाह कराया है। इस सामुहिक विवाह पर26 लाख रुपये व्यय हुए है। जिसमें सभी जोड़ों को 75 प्रकार का घरेलू जरूरत का सामान दिया गया है। पिछले एक साल से समिति की ओर से बिग बाजार कंपलेक्स में भंडारे का आयोजन हर माह किया जाता रहा। वह अगले वर्ष इसी तरह से यह कार्यक्रम जारी रखेंगे। और कही पर भी प्राकृतिक आपदा के दौरान उनके सहयोग की जरूरत पड़ती है तो वह अवश्य ही कराएंगे।

    इस मौके पर दून के विधायक राम कुमार चौधरी, पूर्व नप अध्यक्ष चौधरी मदन लाल, सुरजीत चौधरी, भाजपा के जिला उपाध्यक्ष गुरमैल चौधरी ने इन सामुहिक विवाह में पहुंच कर नव दंपत्तियों को आर्शिवाद दिया।

    दून के विधायक राम कुमार ने श्री राम सेवा समिति की ओर से  किए जा रहे जनकल्याणकारी कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में सामाजिक समरसता, सेवा और सहयोग की भावना को मजबूत करते हैं और जरूरतमंद वर्ग को सम्मानजनक जीवन की दिशा में प्रेरित करते हैं।

  • कांग्रेस पर CM पद बेचने का आरोप, मान सरकार ने पंजाब में खड़ा किया ₹500 करोड़ का निवेश

    कांग्रेस पर CM पद बेचने का आरोप, मान सरकार ने पंजाब में खड़ा किया ₹500 करोड़ का निवेश

    चंड़ीगढ़: हाल ही में पंजाब की राजनीति में एक चौंकाने वाला बयान आया है। कांग्रेस पार्टी के एक बड़े नेता की पत्नी ने खुलेआम यह कहकर हंगामा खड़ा कर दिया कि पंजाब में मुख्यमंत्री (CM) बनने के लिए ₹500 करोड़ या उससे अधिक का “सूटकेस” देना पड़ता है। यह बात सुनकर हर पंजाबी के मन में एक ही दर्द भरा सवाल उठता है| जो ₹500 करोड़ देकर CM बनेगा, क्या वह पंजाब के बारे में सोचेगा? एक व्यक्ति इतना बड़ा पैसा क्यों खर्च करेगा? सीधा-सा जवाब है – वसूलने के लिए! जब कोई नेता हजारों करोड़ रुपए खर्च करके कुर्सी हासिल करेगा, तो उसकी प्राथमिकता पंजाब के लोगों की सेवा नहीं, बल्कि अपने लगाए हुए पैसों को कई गुना बढ़ाकर वापस पाना होगी। ऐसे समय में मान सरकार की सादगी, पारदर्शिता और ईमानदार छवि एक आशा की किरण बनकर उभरती है। ना बड़े-बड़े खर्चे, ना भ्रष्टाचार के आरोपों का बोझ—बस सीधा-सादा संदेश, “राजनीति को महलों से निकालकर आम लोगों तक लाना है।”मान सरकार की यह कोशिश कि सत्ता का मतलब शाही ठाठ नहीं बल्कि जनता की सेवा है, आज के माहौल में और भी क़ीमती लगती है। पंजाब को ऐसे ही नेतृत्व की ज़रूरत है—जिसके दिल में जनता हो, जेब में सौदे नहीं। जब कुर्सी खरीदकर नहीं, बल्कि जनता के विश्वास से मिलती है| तभी सत्ता सच में सेवा बनती है।

    गरीबों का क्या होगा? क्या ऐसे नेता को आम आदमी की टूटी सड़क, फटे हाल किसान या बेरोजगार युवा की परवाह होगी? नहीं! उनका ध्यान केवल बड़े ठेकों, घोटालों और अपने ‘मालिकों’ की तिजोरियां भरने पर होगा। यह आरोप केवल एक पार्टी पर नहीं, बल्कि पूरी राजनीतिक व्यवस्था पर एक काला धब्बा है। यह दिखाता है कि राजनीति अब ‘सेवा’ नहीं, बल्कि ‘सबसे बड़ा निवेश’ बन गई है। यह संस्थागत भ्रष्टाचार का शिखर है। यह सोचकर ही दिल दहल जाता है कि जिस कुर्सी पर बैठकर पंजाब के गुरुओं की धरती के विकास, शिक्षा और कानून-व्यवस्था की शपथ ली जाती है, क्या उस कुर्सी की कीमत अब ₹500 करोड़ हो गई है? पंजाब की जनता को अब सोचना होगा! हमें ऐसी राजनीति नहीं चाहिए, जहाँ मुख्यमंत्री पद नीलामी में बिकता हो। हमें ऐसा नेता चाहिए जो पैसे से नहीं, बल्कि सेवाभाव, ईमानदारी और कर्मठता से CM बने।

    ऐसे में, जब इस तरह के गंभीर आरोप सामने आते हैं, तो पंजाब में मौजूदा ‘आम आदमी पार्टी’ की भगवंत मान सरकार की ईमानदारी और लोक-कल्याण के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करना और भी ज़रूरी हो जाता है। एक तरफ ₹500 करोड़ के “सूटकेस” की बात है, वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री भगवंत मान का फोकस जापान जैसे देशों से ₹500 करोड़ का निवेश पंजाब में लाने पर है। ₹500 करोड़ का निवेश पंजाब के युवाओं के लिए रोजगार और राज्य के लिए विकास लाता है। जबकि ₹500 करोड़ का सूटकेस केवल भ्रष्टाचार और जनता की लूट को बढ़ावा देता है। मान सरकार ने लोगों को एक ईमानदार विकल्प दिया है, जिस पर अभी भी लोगों का भरोसा कायम है। यह सरकार ‘सेवा’ की भावना से काम कर रही है, न कि ‘वसूली’ की भावना से।

    अगर राजनीति को स्वच्छ और जन-केंद्रित बनाना है, तो हमें ईमानदार और आम आदमी के लिए काम करने वाली मान सरकार को ही समर्थन देना होगा। ₹500 करोड़ की राजनीति पंजाब को बर्बादी की ओर ले जाएगी, जबकि जनसेवा की राजनीति ही इसे ‘गोल्डन स्टेट’ बना सकती है। ऐसे माहौल में, जहाँ राजनीति को ‘काला धंधा’ बना दिया गया है, हमें मौजूदा भगवंत मान सरकार (AAP) के उस ईमानदार विकल्प की सराहना करनी चाहिए, जो पंजाब की जनता के सामने है। मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार ने बार-बार यह साबित किया है कि सत्ता जनता की सेवा के लिए है, किसी के निजी स्वार्थ के लिए नहीं। वे नशा-मुक्त पंजाब, शिक्षा में सुधार और किसानों के हकों के लिए आवाज़ उठा रहे हैं। यह सरकार 500 करोड़ का निवेश पंजाब में ला रही है, जिससे युवाओं को रोजगार मिले—न कि 500 करोड़ का सूटकेस भरकर जनता को लूटा जाए!

    जहां एक तरफ ₹500 करोड़ की राजनीति पंजाब को धोखा दे रही है, वहीं दूसरी तरफ मान सरकार की नीतियां यह साबित कर रही हैं कि मुख्यमंत्री की कुर्सी खरीदी नहीं जा सकती, बल्कि यह जनता के विश्वास से जीती जाती है। यह केवल बेहतर होने की बात नहीं है, यह नैतिकता, पारदर्शिता और जनता के प्रति जवाबदेही को वापस लाने की बात है। पंजाब ने उस ‘म्यूजिकल चेयर’ वाली राजनीति को नकार दिया है, जहाँ पांच साल एक पार्टी और पाँच साल दूसरी पार्टी आती थी और दोनों मिलकर राज्य को लूटती थीं। यही सोच नई राजनीति की नींव है—और यही वजह है कि आज कई लोग कह रहे हैं: “मान सरकार—पंजाब की उम्मीद।”

  • Jalandhar News: डिवाइडर में फंसी सवारियों से भरी बस, यात्रियों में मची चीख पुकार, देखें वीडियो

    Jalandhar News: डिवाइडर में फंसी सवारियों से भरी बस, यात्रियों में मची चीख पुकार, देखें वीडियो

    जालंधर, ENS: फिल्लौर के मुख्य मार्ग पर लुधियाना जा रही सवारियों भरी बस सड़क हादसे का शिकार हो गई। घटना को लेकर बस में बैठी सवारियों में चीख पुकार मच गई।मिली जानकारी के अनुसार बस चालक अचानक संतुलन खो बैठा और बस सड़क के बीच लगे लोहे के बैरिगेड तोड़ते हुए पहले जालंधर को जाने वाले मार्ग पर आ गई और उसके बाद दोनों सड़क के बीच बने डिवाइडर में फंस गई। गनीमत यह रही कि एक बड़ा हादसा होने से टल गया।

    इस घटना के दौरान बस में सवार सभी सवारियों का बचाव रहा। मौके पर मौजूद बस ड्राइवर कुलदीप सिंह ने बताया कि वह लिबरा ट्रांसपोर्ट कंपनी की बस का ड्राइवर है और होशियारपुर से सवारियों से भरी बस लुधियाना की ओर ले जा रहा था कि अचानक रामगढ़ बाईपास के पास बस में कोई तकनीकी खराबी आ गई, जिस कारण यह हादसा हो गया।

    घटना की खबर मिलते ही सड़क सुरक्षा फोर्स के इंचार्ज सरबजीत सिंह ने मौके पर पहुंचे और उन्होंने क्रेन की मदद से बस को एक तरफ करवा कर ट्रैफिक को चालू करवाया। उन्होंने कहा कि आजकल सड़क पर कोई ना कोई बस हादसे का शिकार हो रही है।

    सड़क पर रोज दौड़ने वाली हजारों बसों में से ज्यादातर पुराने मॉडल की हैं, जिनकी लिमिट भी निकल चुकी होती है, फिर भी वह सड़क पर चल कर खून-खराबे का खेल खेल रही हैं। ट्रांसपोर्ट विभाग को चाहिए कि सड़क पर दौड़ने वाली बसों की जाँच करनी चाहिए और जिन बसों की मंज़िल निकल चुकी हो, उन्हें इपाउंड कर देना चाहिए।

  • लोकसभा में बोले राजनाथ सिंह, वंदे मातरम् दुनियाभर में भारत का गौरव है

    लोकसभा में बोले राजनाथ सिंह, वंदे मातरम् दुनियाभर में भारत का गौरव है

    नई दिल्ली। लोकसभा में आज वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने पर विशेष चर्चा हो रही है। चर्चा की शुरुआत दोपहर 12 बजे पीएम मोदी ने की। लोकसभा में वंदे मातरम पर चर्चा के लिए 10 घंटे का वक्त तय किया गया है। इसके बाद सत्ता पक्ष की तरफ से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अनुराग ठाकुर सरकार की तरफ से वंदे मातरम पर पक्ष रखेंगे। विपक्ष की तरफ से इन लोगों ने रखा अपना पक्ष विपक्ष की ओर से गौरव गोगोई, प्रियंका वाड्रा, दीपेंद्र हुड्डा, विमल अकोइजम, प्रणिती शिंदे, प्रशांत पडोले, चमाला रेड्डी और ज्योत्सना महंत पक्ष रखेंगे। 937 में गीत से प्रमुख छंदों को हटाने के आरोपों को लेकर हुआ हंगामा चर्चा के दौरान पीएम मोदी के उस बयान पर हंगामा होने के आसार हैं जिसमें पीएम मोदी ने कांग्रेस पर 1937 में इस गीत से प्रमुख छंदों को हटाने और विभाजन के बीज बोने का आरोप लगाया था। यही वजह है कि चर्चा से पहले ही कांग्रेस और बीजेपी वंदे मातरम् के मुद्दे पर आमने-सामने आ गई है। राजनाथ सिंह बोले, वंदे मातरम् किसी धर्म से नहीं जुड़ा वंदे मातरम् पर चर्चा के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा में कहा कि राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत का बराबर सम्मान है। जन-गण-मन और वंदे मातरम् भारत माता की दो आंखें हैं। वंदे मातरम् राजनीतिक नहीं है। इसके बाद कहा कि वंदे मातरम् पर पुरानी गलतियों का सुधारना होगा। वंदे मातरम् किसी धर्म से नहीं जुड़ा हुआ है। कट्टरपंथियों ने इसे सांप्रदायिक रंग दिया।   राजनाथ सिंह ने अपने भाषण के दौरान पंडित नेहरू से जुड़ी एक घटना का जिक्र किया। उन्होंने एक किताब के हवाले से इतिहास की घटना का जिक्र करते हुए कहा, पंडित नेहरू की मौजूदगी में विदेश मंत्रालय की उच्चस्तरीय बैठक में उनसे पूछा गया कि अगर कल को कम्युनिस्ट केंद्र की सत्ता में आ जाएं तो सरकारी तंत्र का क्या होगा? नेहरू जी ने झुंझलाकर जवाब दिया। कम्युनिस्ट-कम्युनिस्ट भारत के लिए खतरा कम्युनिज्म नहीं है। खतरा हिंदू दक्षिणपंथी कम्युनलिज्म है। सिंह ने दावा किया कि अगर किसी को प्रमाण चाहिए तो वे इस किताब का ब्योरा और प्रमाण देने के लिए तैयार हैं। राजनाथ सिंह ने कहा, राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत का बराबर सम्मान वंदे मातरम् पर चर्चा के दौरान सिंह ने लोकसभा में कहा कि राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत का बराबर सम्मान है। जन-गण-मन और वंदे मातरम् भारत माता की दो आंखें हैं। वंदे मातरम् राजनीतिक नहीं है। वंदे मातरम् पर पुरानी गलतियों को सुधारना होगा राजनाथ सिंह ने कहा कि वंदे मातरम् स्वराज का मंत्र है। इसे सम्मान दिलाना हमारा प्रण है। जो संस्कृति नहीं समझते वो वंदे मातरम् को क्या समझेंगे। सिंह ने भी लोकसभा में वंदे मातरम् पर चर्चा में हिस्सा लिया। इसके बाद कहा कि वंदे मातरम् इतिहास और वर्तमान से जुड़ा हुआ है। वंदे मातरम् ने देश को जगाया है। ये सिर्फ बंगाल के चुनाव से नहीं जुड़ा है। वंदे मातरम् ने ब्रिटिश साम्राज्य को झुकाया है।
  • Punjab News: बहुचर्चित गुरविंदर कत्ल मामले में पत्नी सहित तीनों आरोपियों को लेकर कोर्ट का आया फैसला

    Punjab News: बहुचर्चित गुरविंदर कत्ल मामले में पत्नी सहित तीनों आरोपियों को लेकर कोर्ट का आया फैसला

    फरीदकोटः गांव सुखणवाला में 28–29 की रात बहुत चर्चित गुरविंदर हत्याकांड में पत्नी रुपिंदर कौर ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति की गला घोंटकर हत्या करने के मामले में आज रिमांड खत्म होने के बाद फिर आरोपी महिला को सिविल जज जुगराज सिंह की अदालत में पेश किया गया, जहां पुलिस ने अदालत से 3दिन के और पुलिस रिमांड की मांग की। माननीय अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पुलिस की अर्जी को खारिज करते हुए तीनों आरोपीयों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में फरीदकोट की जेल भेज दिया है।

    मामले की जानकारी देते हुए एडवोकेट गुरजंगपाल ने बताया कि आज तीनों आरोपियों को रिमांड खत्म होने पर अदालत में पेश किया गया था, जहां पुलिस ने यह तर्क दिया कि आरोपियों के मोबाइल बरामद कराए जाने हैं, इसलिए 3 दिन का अतिरिक्त रिमांड मांगा गया था। लेकिन माननीय अदालत ने टिप्पणी की कि गुरविंदर सिंह की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सनसनीखेज खुलासे हुए हैं। रिपोर्ट में पाया गया है कि युवक को जहर भी दिया गया था और गला घोंटकर उसकी हत्या की गई थी।

    जांच में यह भी सामने आया है कि उसकी पत्नी रुपिंदर कौर ने गुरविंदर सिंह की बाहें पकड़ी हुई थीं और उसके प्रेमी हरकंवलप्रीत सिंह ने उसका गला घोंटकर हत्या कर दी थी। प्रारम्भिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गुरविंदर सिंह की मौत गला घोंटकर हुई होने की पुष्टि हुई है और उसके शरीर पर 10 से 12 चोटों के निशान पाए गए हैं। बता दें कि रुपिंदर कौर ने इस हत्या की वारदात को लूट दिखाने का प्रयास किया था। इसके लिए उसने घर में रखे सोने के ज्वेलरी अपने प्रेमी हरकंवलप्रीत को दिए थे। रिमांड के दौरान पुलिस ने प्रेमी के पास से बरामद कर ली है।

     

  • काबी ब्लास्टर ने जीता फार्मा फ्रेंडशिप कप,रवि बने मैन ऑफ दी सीरीज

    काबी ब्लास्टर ने जीता फार्मा फ्रेंडशिप कप,रवि बने मैन ऑफ दी सीरीज

    फाइनल मैच में राइजिंग स्टार को 8 विकेट से हराया

    बद्दी/सचिन बैंसल: रविवार को फार्मा फ्रेंडशिप कप का फाइनल मैच अमन क्रिकेट अकादमी में खेला गया। जिसमें राइजिंग स्टार और काबी ब्लास्टर दोनों टीम में आमने-सामने थी। मैच में मुख्य अतिथि के रूप में बलदेव चौधरी ने शिरकत की।राइजिंग स्टार ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया । लेकिन उन्हें  ये फैसला रास नहीं आया और राइजिंग स्टार  15.4 ओवर में मात्र 103 रन पर ऑल आउट हो गई।

    जिसमें राइजिंग स्टार के बल्लेबाज शालू केवल दहाई का आंकड़ा पार कर सके। शालू ने 31 रन बनाए जबकि अन्य कोई भी बल्लेबाज दहाई का आंकड़ा न पार कर सका। काबी ब्लास्टर की ओर से रवि ने चार , अजय दो विकेट लिए ।जवाब में 103 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी कभी की शुरुआत अच्छी रही और उन्होंने मात्र 13 ओवर में दो विकेट खोकर यह लक्ष्य हासिल कर लिया ।जिसमें विनय ने 47 और तिलक ने 39 रन की नाबाद पारी खेली। राइजिंग स्टार की ओर से संदीप और अशोक ने एक-एक विकेट लिया ।

    चार विकेट लेने वाले गेंदबाज रवि को मैन ऑफ द मैच चुना गया। वहीं बेस्ट बैट्समैन राजेश व बेस्ट बॉलर अजय रहे। मैन ऑफ द सीरीज का खिताब भी रवि को दिया गया ।मुख्य अतिथि बलदेव चौधरी ने कहा कि इस प्रकार के टूर्नामेंट  से आपस में प्रेम व खेल भावना को बढ़ावा देते हैं और उन्होंने विजेता टीम को बधाई दी और ट्रॉफी देकर सम्मानित किया।

  • पंजाब की फ्री बस योजना का दायरा बढ़ा: 7,698 नई छात्राओं को भी मिली विशेष सुविधा

    पंजाब की फ्री बस योजना का दायरा बढ़ा: 7,698 नई छात्राओं को भी मिली विशेष सुविधा

    चंडीगढ़: मुख्यमंत्री भगवंत मान के दूरदर्शी नेतृत्व में पंजाब सरकार ने राज्य की सभी महिलाओं के लिए निःशुल्क बस सेवा की शुरुआत करके महिला सशक्तिकरण और सामाजिक समावेशन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। यह व्यापक जनकल्याणकारी योजना केवल किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि पंजाब की प्रत्येक महिला – चाहे वह छात्रा हो, कामकाजी महिला हो, गृहिणी हो या वरिष्ठ नागरिक – सभी को पंजाब रोडवेज और पेप्सू रोडवेज की बसों में बिना किसी शुल्क के यात्रा करने का अधिकार देती है। इस महत्वाकांक्षी पहल से रोजाना लाखों महिलाएं लाभान्वित हो रही हैं और सार्वजनिक परिवहन में महिला यात्रियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। परिवहन विभाग के अनुसार, इस योजना ने महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता और गतिशीलता प्रदान करने में क्रांतिकारी भूमिका निभाई है।

    इस व्यापक योजना के तहत एक विशेष घटक के रूप में सरकारी स्कूलों की छात्राओं के लिए समर्पित बस सेवा भी शुरू की गई है। प्रदेश के लगभग 200 सरकारी स्कूलों में अब छात्राओं को विशेष निःशुल्क बस सेवा मिल रही है, जो उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करती है और परिवारों पर आर्थिक बोझ कम करती है। शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने बताया कि स्कूल परिवहन सुविधा से कुल 10,448 विद्यार्थी लाभान्वित हो रहे हैं, जिनमें 7,698 बालिकाएं और 2,740 बालक शामिल हैं। विशेष रूप से 118 स्कूल ऑफ एमिनेंस सहित विभिन्न सरकारी विद्यालयों में यह सेवा संचालित है। हालांकि, कुछ लोगों ने इस पहल को केवल स्कूली छात्राओं तक सीमित समझने की भूल की है, जबकि वास्तविकता यह है कि यह पंजाब सरकार की उस बड़ी दृष्टि का एक हिस्सा है जिसमें हर महिला को मुफ्त बस सेवा का अधिकार है।

    पंजाब सरकार की मुफ्त बस योजना का दायरा बेहद व्यापक है और यह राज्य भर में संचालित सभी सरकारी बसों में लागू है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को आवागमन में आने वाली आर्थिक बाधाओं से मुक्त करना और उन्हें शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक गतिविधियों तक बेहतर पहुंच प्रदान करना है। चाहे कोई महिला नौकरी के लिए यात्रा कर रही हो, अस्पताल जा रही हो, रिश्तेदारों से मिलने जा रही हो या बाजार जाना हो – हर स्थिति में उसे मुफ्त परिवहन की सुविधा मिलती है। यह योजना विशेष रूप से निम्न और मध्यम वर्ग की महिलाओं के लिए वरदान साबित हो रही है, जिनके लिए प्रतिदिन का परिवहन खर्च एक बड़ा बोझ होता था। अब वे इस बचत को अपने परिवार की अन्य जरूरतों में लगा सकती हैं।

    स्कूली छात्राओं के लिए समर्पित बस सेवा इस व्यापक योजना का एक महत्वपूर्ण लेकिन छोटा हिस्सा है। आंकड़े बताते हैं कि 4,304 बालिकाएं 10 से 20 किलोमीटर की दूरी और 1,002 बालिकाएं 20 किलोमीटर से अधिक दूरी तय करके रोजाना विद्यालय पहुंच रही हैं। पहले इतनी दूरी तय करना न केवल असुरक्षित था बल्कि कई परिवारों के लिए आर्थिक रूप से असंभव भी था, जिससे बालिकाओं की शिक्षा बीच में ही छूट जाती थी। योजना के तहत प्रति छात्र परिवहन लागत 1,200 रुपये है, जिसमें से 80 प्रतिशत यानी 960 रुपये पंजाब सरकार वहन करती है और मात्र 20 प्रतिशत यानी 240 रुपये अभिभावक देते हैं। यह राशि प्राइवेट स्कूलों के परिवहन शुल्क की तुलना में नगण्य है। बसों की व्यवस्था स्कूल मैनेजमेंट कमेटियों के माध्यम से की जाती है, जिससे पारदर्शिता और स्थानीय भागीदारी दोनों सुनिश्चित होती है।

    मुख्यमंत्री भगवंत मान ने स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता राज्य की सभी महिलाओं को समान अवसर और सुविधाएं प्रदान करना है। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार ने पंजाब की हर महिला के लिए मुफ्त बस सेवा शुरू की है क्योंकि हम मानते हैं कि महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता और गतिशीलता समाज की प्रगति के लिए आवश्यक है। स्कूली छात्राओं के लिए विशेष बस व्यवस्था इसी बड़ी योजना का एक हिस्सा है, न कि पूरी योजना। हम चाहते हैं कि पंजाब की हर महिला – चाहे वह किसी भी उम्र या पृष्ठभूमि की हो – बिना किसी चिंता के अपने गंतव्य तक पहुंच सके।” उन्होंने यह भी कहा कि यह योजना केवल आर्थिक राहत नहीं देती बल्कि महिलाओं को समाज में बराबरी का दर्जा दिलाने की दिशा में एक सशक्त कदम है।

    फिरोजपुर जिले के जीरा स्थित SGRM गर्ल्स स्कूल में सबसे अधिक 712 बालिकाएं स्कूल बस सेवा का लाभ ले रही हैं। इसके अलावा बठिंडा के माल रोड गवर्नमेंट स्कूल में 645, जालंधर के नेहरू गार्डन गर्ल्स स्कूल में 466, कोटकपूरा में 399, आनंदपुर साहिब गर्ल्स स्कूल में 300 और फतेहगढ़ साहिब के गोविंदगढ़ गर्ल्स स्कूल में 200 बालिकाएं इस सुविधा का उपयोग कर रही हैं। इन सभी क्षेत्रों में स्कूल छोड़ने की दर में उल्लेखनीय कमी आई है। वहीं, व्यापक मुफ्त बस योजना से हजारों कामकाजी महिलाएं, नर्सें, शिक्षिकाएं, कॉलेज छात्राएं और घरेलू महिलाएं भी लाभान्वित हो रही हैं। लुधियाना की एक कामकाजी महिला सिमरनजीत कौर ने बताया, “पहले मुझे रोजाना ऑफिस जाने में 100-150 रुपये खर्च होते थे। अब मुफ्त बस से जाती हूं और महीने के 3,000-4,000 रुपये बच जाते हैं जो मैं अपने बच्चों की शिक्षा में लगाती हूं।”

    यह स्कूल बस पहल स्कूल ऑफ एमिनेंस कार्यक्रम का भी एक हिस्सा है, जो मान सरकार का प्रमुख शिक्षा मिशन है। इन स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम, आधुनिक विज्ञान प्रयोगशालाएं, व्यापक खेल सुविधाएं और NIFT द्वारा डिजाइन की गई निःशुल्क वर्दी प्रदान की जाती है। इन स्कूलों में नामांकन 82,000 से बढ़कर 2 लाख से अधिक हो गया है और 158 छात्रों ने JEE में सफलता हासिल की है। यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि जब सरकारी स्कूलों को समुचित संसाधन और सुविधाएं मिलती हैं तो वे प्राइवेट स्कूलों से किसी भी तरह कम नहीं होते। एक अभिभावक ने कहा, “पहले हम सोचते थे कि बेटी को आठवीं के बाद स्कूल भेजना मुश्किल होगा क्योंकि स्कूल दूर है। अब यह चिंता खत्म हो गई है और हमारी बेटी अपने सपनों को पूरा कर सकती है।”

    समाज के विभिन्न वर्गों से इस व्यापक पहल को जबरदस्त सराहना मिल रही है। शिक्षाविद डॉ. अमरजीत कौर कहती हैं, “पंजाब सरकार की मुफ्त बस योजना केवल परिवहन की सुविधा नहीं है, यह एक सामाजिक और आर्थिक क्रांति का माध्यम है। जब सभी महिलाओं को समान रूप से यात्रा की सुविधा मिलती है तो समाज में समानता का वास्तविक अर्थ सामने आता है। यह पूरे देश के लिए एक मॉडल है।” महिला अधिकार कार्यकर्ता जसप्रीत कौर ने कहा, “यह योजना साबित करती है कि जब सरकार महिलाओं की वास्तविक जरूरतों को समझती है और उन पर कार्य करती है तो असली बदलाव संभव है। पंजाब की हर महिला आज इस योजना की वजह से ज्यादा स्वतंत्र और आत्मनिर्भर महसूस कर रही है।”

    पंजाब सरकार की यह मुफ्त बस योजना महिला सशक्तिकरण, आर्थिक समावेशन और शैक्षिक न्याय की दिशा में एक ठोस कदम है। यह योजना केवल कागजों पर नहीं बल्कि जमीनी स्तर पर लाखों महिलाओं के जीवन में वास्तविक बदलाव ला रही है। हर वह महिला जो रोजाना मुफ्त बस में यात्रा करती है, हर वह छात्रा जो सुरक्षित रूप से स्कूल पहुंचती है, और हर वह परिवार जो परिवहन खर्च में बचत कर पाता है – सभी इस बात के गवाह हैं कि जब सरकार जनता की समस्याओं को समझती है और उनके समाधान के लिए प्रतिबद्ध होती है तो वास्तविक विकास संभव है। मान सरकार की यह पहल निश्चित रूप से आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी और पंजाब को महिला सशक्तिकरण में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करेगी।

  • Punjab News: पैलेस के बंद कमरे से महिला और व्यक्ति का शव बरामद

    Punjab News: पैलेस के बंद कमरे से महिला और व्यक्ति का शव बरामद

    संगरूरः भवानीगढ़ के एक मिनी पैलेस के बंद कमरे में अंगीठी जला कर सोने से एक युवक और एक महिला की मौत होने की खबर मिली। लोगों द्वारा घटना की सूचना पुलिस को दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस द्वारा मामले की जांच की गई। थाना मुखी मालविंदर सिंह ने बताया कि मनजीत सिंह मायूसी (मामू) फ़ग्गूवाला और गांव रायसिंह वाला की निवासी 40 वर्षीय महिला मनजीत कौर हनी क्लासिक मिनी पैलेस में विवाह समारोहों पर मजदूरी का काम करते थे। कल विवाह समारोह के बाद कमरे में ठंड लगने के कारण अंगीठी जला कर सो गए थे।

    पैलेस के मालिक के घर में भी विवाह समारोह चलने के कारण अन्य काम करने वाले कर्मचारियों ने भी उनकी ओर ध्यान नहीं दिया। इसी दौरान जब पैलेस का मालिक उस कमरे की तरफ गया तो वे कमरे में मृतअवस्था में पड़े थे, जिसके बाद उसने पुलिस को सूचित किया तो देखा कि दोनों की मौत हो चुकी थी, उनके बिस्तर के पास रखी हुई अंगीठी पड़ी हुई थी।

    उन्होंने बताया कि पुलिस ने उनकी लाशों को कब्जे में लेकर अगली कार्रवाई शुरू कर दी है। थाना मुखी ने कहा कि उनकी मौत अंगीठी चलाने से दम घुटने के कारण हुई है, क्योंकि कमरे का दरवाजा और खिड़कियां बंद थे। उन्होंने कहा कि मृतकों के परिवारिक सदस्यों के बयान लेकर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

  • तरूण ठाकुर ने भाजपा युवा मोर्चा का महामंत्री बनने पर शीर्ष नेतृत्व का जताया आभार

    तरूण ठाकुर ने भाजपा युवा मोर्चा का महामंत्री बनने पर शीर्ष नेतृत्व का जताया आभार

    ऊना/ सुशील पंडित: ऊना मंडल के नवनियुक्त महामंत्री तरूण ठाकुर ने अपनी इस नियुक्ति पर शीर्ष नेतृत्व का आभार व्यक्त किया है। तरूण ने राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ राजीव बिंदल , नेता प्रतिपक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, पूर्व मुख्यमंत्री प्रोफसर प्रेम कुमार धूमल और शांता कुमार , हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर , ऊना सदर विधायक सतपाल सिंह सत्ती ,भाजपा ज़िलाध्यक्ष श्याम मिन्हास का आभार व्यक्त किया है।

    आपको बताते चलें कि तरूण ठाकुर पूर्व अ.भा.वि.प. ऊना के तहसील संयोजक , ऊना इकाई अध्यक्ष जैसे दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। तरूण ने कहा कि संगठन में जो उन्हें ज़िम्मेदारी सौंपी गई है उसकी वह पूरी निष्ठा से निर्वहन करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए एक संकल्प के साथ मंडल स्तर पर कार्य किये जाएँगे।

  • तीन सरकारें हुई मौन, अब मान सरकार की सख्ती—‘328 पावन स्वरूपों’ की गुमशुदगी में दर्ज हुई FIR, बड़े नामों की बढ़ी मुश्किलें

    तीन सरकारें हुई मौन, अब मान सरकार की सख्ती—‘328 पावन स्वरूपों’ की गुमशुदगी में दर्ज हुई FIR, बड़े नामों की बढ़ी मुश्किलें

    चंडीगढ़: पंजाब की राजनीति में एक ऐसा मामला जो करीब साढ़े नौ वर्षों से ठंडे बस्ते में पड़ा था। अब मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार ने उसे फिर से खोल दिया है। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के 328 पावन स्वरूपों की रहस्यमयी गुमशुदगी का यह मामला 2016 में पहली बार उजागर हुआ था, लेकिन तीन मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में एक भी एफआईआर दर्ज नहीं हुई। प्रकाश सिंह बादल, कैप्टन अमरिंदर सिंह और चरणजीत सिंह चन्नी—तीनों के शासनकाल में यह मामला केवल फाइलों में सिमटा रहा। अब चौथे मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पहली बार कानूनी कार्रवाई करते हुए 16 एसजीपीसी कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। यह कदम न केवल धार्मिक भावनाओं का सम्मान है, बल्कि पंजाब की न्याय व्यवस्था में जनता के विश्वास को बहाल करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल भी है। यह मामला महज एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि करोड़ों सिखों की आस्था से जुड़ा एक संवेदनशील मुद्दा है। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के 328 पावन स्वरूपों का बिना रिकॉर्ड के गायब होना या अनियमित तरीके से वितरित होना सिख समुदाय के लिए गहरी पीड़ा का विषय रहा है। 2016 में जब यह मामला सामने आया, तब एसजीपीसी के प्रकाशन विभाग के एक वरिष्ठ कर्मचारी की सेवानिवृत्ति के बाद रिकॉर्ड की जांच में यह खुलासा हुआ कि दर्जनों स्वरूप बिना उचित प्रविष्टि के विभाग से बाहर गए है। शुरुआत में 267 स्वरूप गायब बताए गए, लेकिन 2020 में अकाल तख्त की विशेष जांच समिति ने इस संख्या को बढ़ाकर 328 कर दिया। इसमें से कम-से-कम 186 स्वरूप बिना किसी आधिकारिक अनुमति के जारी किए गए थे, जो एक गंभीर धार्मिक और प्रशासनिक उल्लंघन है।

    बादल सरकार का मौन और कैप्टन सरकार की अनदेखी

    2016 में जब यह मामला सामने आया, तब पंजाब में प्रकाश सिंह बादल की सरकार थी। एसजीपीसी, जो सिख धर्म के सबसे बड़े धार्मिक संस्थान के रूप में जानी जाती है, पर आरोप लगे कि वह मामले को दबाने की कोशिश कर रही है। हालांकि आंतरिक जांच की बात कही गई, लेकिन न तो पुलिस को मामला सौंपा गया और न ही किसी ज़िम्मेदार के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई। 2017 में जब कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार सत्ता में आई, तो सिख संगठनों ने उम्मीद जताई कि अब न्याय मिलेगा। धार्मिक संगठनों ने पुलिस जांच की मांग उठाई, अमृतसर में धरने-प्रदर्शन हुए, लेकिन कैप्टन सरकार ने भी मामले को आगे नहीं बढ़ाया। कुछ समीक्षा कमेटियां बनाईं, बैठकें हुईं, लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं हुई। एसजीपीसी ने स्वीकार किया कि गड़बड़ी हुई है, लेकिन कानूनी कार्रवाई से बचा गया। यह वह दौर था जब राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी साफ दिख रही थी।

    चन्नी सरकार का छोटा कार्यकाल, बड़ा सवाल

    2021 में जब चरणजीत सिंह चन्नी मुख्यमंत्री बने, तो फिर से आशा की किरण जगी। लेकिन चुनावी माहौल, छोटे कार्यकाल और राजनीतिक अस्थिरता के कारण इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। धार्मिक संगठनों ने एसजीपीसी पर “दोषियों को बचाने” का आरोप लगाया, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कोई जवाबदेही तय नहीं हुई। तीन मुख्यमंत्रियों के शासनकाल में यह मामला केवल राजनीतिक बयानों और वादों तक सीमित रहा, जबकि जनता और सिख समुदाय न्याय की प्रतीक्षा करता रहा। यह साफ था कि पिछली सरकारों ने या तो इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया, या फिर किन्हीं राजनीतिक दबावों के कारण इसे दबाए रखा।

    मान सरकार का साहसिक निर्णय: पहली एफआईआर

    2022 में जब आम आदमी पार्टी की सरकार सत्ता में आई और भगवंत मान मुख्यमंत्री बने, तो सिख संगठनों ने फिर से सरकार को ज्ञापन सौंपे और न्याय की मांग की। मान सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया और पुरानी फाइलों, दस्तावेज़ों और रिपोर्टों को दोबारा खोला। पहली बार पुलिस से कानूनी राय ली गई कि मामला दर्ज किया जा सकता है। साढ़े तीन साल की कड़ी मेहनत और जांच के बाद, 2025 में मान सरकार ने पहली बार 16 एसजीपीसी कर्मचारियों को नामजद करते हुए एफआईआर दर्ज कराई है। इस एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि इन कर्मचारियों ने रिकॉर्ड से बाहर पावन स्वरूपों का वितरण किया, अनुचित ढंग से स्वरूप जारी किए और आधिकारिक पुस्तकों में छेड़छाड़ की। यह नौ साल में पहली कानूनी कार्रवाई है, जो मान सरकार की पारदर्शिता और जवाबदेही के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

    जांच की तह में जाने का समय

    अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस 16 नामजद कर्मचारियों को कब तलब करती है और पूछताछ किस दिशा में आगे बढ़ती है। धार्मिक और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब इन कर्मचारियों से पूछताछ शुरू होगी, तो यह सामने आ सकता है कि स्वरूपों का वितरण किनके निर्देश पर हुआ। यदि यह किसी संगठित ढांचे या उच्च स्तर के निर्देशों के तहत हुआ है, तो जांच एसजीपीसी के वरिष्ठ पदाधिकारियों, कुछ पूर्व नेताओं और संभवतः 2016-17 के दौरान प्रभावशाली रहे राजनीतिक चेहरों तक भी पहुंच सकती है। यदि पूछताछ में धन लेन-देन, दबाव या साठगांठ के सबूत मिलते हैं, तो यह मामला सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि पंजाब की राजनीति को भी गहराई से हिला सकता है। मान सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस जांच में किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना भी बड़ा क्यों न हो।

    धार्मिक संगठनों और जनता की प्रतिक्रिया

    सिख धार्मिक संगठनों ने मान सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। अमृतसर स्थित एक धार्मिक संगठन के प्रवक्ता ने कहा, “साढ़े नौ साल बाद आखिरकार न्याय की दिशा में पहला कदम उठा है। यह भगवंत मान सरकार का साहसिक और ऐतिहासिक निर्णय है, जो दिखाता है कि वे किसी दबाव में नहीं है और सिख समुदाय की आस्था का सम्मान करते हैं।” सोशल मीडिया पर भी इस कदम को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया आ रही है। लोग पिछली सरकारों की निष्क्रियता पर सवाल उठा रहे हैं और मान सरकार की पारदर्शिता की सराहना कर रहे हैं। एक ट्वीट में लिखा गया, “तीन सीएम बदले, कोई एफआईआर नहीं। भगवंत मान ने साबित किया कि इच्छाशक्ति हो तो न्याय मिल सकता है।” यह जनभावना साफ दर्शाती है कि पंजाब की जनता अब सच्चाई और जवाबदेही की उम्मीद कर रही है।

    पंजाब सरकार की प्रतिबद्धता: पारदर्शिता और न्याय

    मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा, “हमारी सरकार का मानना है कि धर्म और आस्था के मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही या गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जा सकती। पिछली सरकारों ने इस मामले को नजरअंदाज किया, लेकिन हमने पहले दिन से ही इसे प्राथमिकता दी है। जांच निष्पक्ष होगी और दोषी चाहे कोई भी हो, उसे सजा मिलेगी।” पंजाब सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जांच में पूर्ण पारदर्शिता बरती जाएगी और हर स्तर पर जवाबदेही तय की जाएगी। यह कदम न केवल इस मामले में न्याय दिलाने की दिशा में है, बल्कि यह भी संदेश देता है कि आम आदमी पार्टी की सरकार किसी भी तरह के भ्रष्टाचार या अनियमितता के खिलाफ सख्त है। पंजाब की जनता ने इस सरकार को ईमानदार और पारदर्शी प्रशासन की उम्मीद के साथ चुना था, और मान सरकार अपने वादों को पूरा करने में लगी हुई है।

    एक नई शुरुआत, एक मज़बूत संदेश

    साढ़े नौ साल बाद दर्ज हुई यह पहली एफआईआर पंजाब के इतिहास में एक महत्वपूर्ण पल है। यह न केवल सिख समुदाय की आस्था का सम्मान है, बल्कि यह भी साबित करता है कि भगवंत मान की सरकार किसी भी राजनीतिक या संस्थागत दबाव से ऊपर उठकर सच्चाई और न्याय के लिए प्रतिबद्ध है। तीन मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में जो मामला केवल फाइलों में सिमटा रहा, उसे मान सरकार ने कानूनी दायरे में लाकर एक नई दिशा दी है। आने वाले दिनों में जांच के नतीजे और भी दिलचस्प हो सकते हैं, क्योंकि यह मामला अब केवल 16 कर्मचारियों तक सीमित नहीं रह सकता। यदि जांच सही दिशा में आगे बढ़ती है, तो पंजाब की राजनीति और एसजीपीसी के कई बड़े नाम भी सामने आ सकते हैं। भगवंत मान सरकार ने यह साबित कर दिया है कि जब इच्छाशक्ति हो, तो कोई भी मामला कितना भी पुराना या जटिल क्यों न हो, उसे हल किया जा सकता है। यह कदम पंजाब की जनता के विश्वास को मजबूत करने और न्याय व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है।