पंजाब के होशियारपुर में बच्चे के साथ जो कृत्य किया गया, वह दिल दहलाने वाला है, ह्दयविदारक है, घिनौना है। सभ्य समाज में ऐसे कृत्य बिल्कुल अक्षम्य हैं। पांच साल के बच्चे के साथ गलत काम करके उसकी हत्या कर देना, महापाप है। ऐसे व्यक्ति को कठोर से कठोर सजा मिलनी चाहिए। लेकिन किसी एक द्वारा किए गए इस अपराध के लिए उसके पूरे समाज को दोषी ठहराना उचित नहीं है।
होशियारपुर में एक प्रवासी ने जो अपराध किया है, उसे उसकी सजा जरूर मिलनी चाहिए, सजा देने के लिए कानून है-सरकार है, लेकिन इसके लिए पंजाब से प्रवासियों को भगाओ जैसे नारे लगाना और चुन-चुन कर उन्हें प्रताड़ित करना सभ्य समाज के लिए ठीक नहीं है। अपराध करने वाला अपराधी होता है, कानून की नजर में उसका कोई जाति, धर्म या मजहब नहीं होता। चाहे वो प्रवासी है, चाहे स्थानीय व्यक्ति।
भारत एकता और अखंडता के लिए जाना जाता है। हमारा संविधान का मूल भी यही है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1)(e) सभी भारतीय नागरिकों को भारत के किसी भी हिस्से में निवास करने और बसने का अधिकार देता है। यह एक मौलिक अधिकार है जो भारत के नागरिकों को आंतरिक बाधाओं के बिना किसी भी राज्य में रहने और अपना घर बनाने की स्वतंत्रता भी प्रदान करता है। यह अधिकार अनुच्छेद 19(5) के तहत उचित प्रतिबंधों के अधीन है, जो सार्वजनिक व्यवस्था, अनुसूचित जनजातियों की सुरक्षा, या भारत की संप्रभुता और अखंडता के हित में लगाए जा सकते हैं।
यह अधिकार भारत की एकता और अखंडता के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह नागरिकों को एक देश के नागरिक के रूप में महसूस करने और अपनी मर्जी से कहीं भी रहने व बसने का अवसर देता है। ये अधिकार हमें बाबा साहिब डा. भीमराव अंबेडर जी द्वारा लिखित संविधान ने दिया है। बाबा साहिब ने जो संविधान लिखा, उसमें हर व्यक्ति को मौलिक अधिकार दिया गया है।
होशियारपुर में एक व्यक्ति द्वारा जो शर्मनाक करतूत की गई, वह बेहद निंदनीय है। ऐसे व्यक्ति को कानून फांसी की सजा दे। जो भी व्यक्ति क्राइम करेगा, उसे भी संविधान के मुताबिक सजा मिलेगी। संविधान अगर हमें मौलिक अधिकार प्रदान करता है, तो वही संविधान क्राइम करने पर सजा भी तय करता है। अलग अलग क्राइम की अलग अलग सजा का प्रावधान है।
होशियारपुर में प्रवासी लोगों को भगाने की मुहिम शुरू हुई। आखिर ये मुहिम किसने शुरू की? प्रशासन ने, सरकार ने? बिल्कुल नहीं, ये मुहिम चंद लोगों ने शुरू की, इसके पीछे भी बड़ा कारण हो सकता है। पंजाब को अस्थिर करने की साजिश भी हो सकती है? पंजाब को अशांत करने का षड़यंत्र हो सकता है।
साजिश ये भी हो सकती है कि पंजाब में प्रवासियों को मारो-पीटो और भगाओ, यूपी-बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में अपने आप लड़ाई झगड़े खून-खराबे शुरू हो जाएंगे। क्या यूपी-बिहार में पंजाब के लोग नहीं है? क्या पंजाब के लोग कोलकाता में ट्रांसपोर्ट का कारोबार नहीं करते। ये तो अपने देश की बात हो गई? एक रिपोर्ट के मुताबिक कनाडा, अमेरिका, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड में सबसे ज्यादा पंजाबी हैं। यही नहीं, इस ब्राहमांड में जितने भी देश हैं, मुझे लगता है कि पंजाबी वहां जरूर मिल जाएंगे।
आपने देखा होगा, पढ़ा होगा कि अमेरिका में जब डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति बने तो उन्होंने अवैध प्रवासियों को हवाई जहाज में बैठाकर वापस भेज दिया। ये वे अप्रवासी थे, जिनके पास कोई वैलिड कागजात नहीं थे, एक तरह से ये सभी अवैध तरीके से अमेरिका में रह रहे थे। तब अमेरिका की लोगों ने खूब की निंदा की। अगर अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा के मूल निवासी ये कहें कि सभी भारतीयों को बाहर निकालो, तो बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा। पूरी परिस्थिति बिगड़ जाएगी।
क्राइम एक ने किया है, उसे उसके द्वारा किए गए क्राइम के हिसाब से सजा मिलेगी। प्रशासन है, कानून है, सरकार है, संविधान है, फिर लोग अपने हाथ में कानून क्यों लेते हैं? पंजाब की फैक्ट्रियों में यूपी-बिहार, बंगाल और पता नहीं किन राज्यों के लोग काम करते मिलेंगे। पंजाब के खेतों में भी यही लोग पसीना बहाते हैं। अगर इनको भगा दिया तो फैक्ट्रियों और खेतों में काम कौन करेगा?
एक और बात लोग कहते हैं कि सरकार के पास नौकरी नहीं है? मैं आपको बता दूं कि अभी हाल में पंजाब पावर कारपोरेशन जिसे हम बिजली विभाग कहते हैं, उसमें लाइनमैन की भर्तियां निकली थी। हैरानी की बात यह है कि उसमें पंजाब का एक भी बच्चा नौकरी के लिए अप्लाई नहीं किया, सभी हरियाणा, यूपी और दिल्ली के बच्चों ने अप्लाई किया।
अकेले जालंधर में हरियाणा, दिल्ली और यूपी के 250 लड़के लड़कियों ने फार्म भरा, उन्हें नौकरी मिली। ये मैं नहीं कहता कि ये बिजली विभाग की रिपोर्ट है। हैरानी तो इस बात की है कि लाइनमैन भर्ती के लिए जो नियम व शर्तें हैं, उसमें पंजाब के बच्चे कंपलीट ही नहीं करते। यहां के बच्चे 10वीं पास करने के बाद ट्रेवल एजैंटों के दफ्तरों का चक्कर काटते हैं। कई ठगे जाते हैं, कई डंकी लगाकर विदेश पहुंचता है तो कई अपने खेत और घर को गिरवी रखकर विदेश जाकर काम करता है।
अभी पुर्तगाल में 4 लाख प्रवासियों को देश से निकालने का हुक्म जारी किया गया है। इसमें अधिकांश लोग पंजाब से हैं। वे पुर्तगाल में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे लोग टैक्स देते हैं, नियम मानते हैं, तो देश से क्यों निकले?
हां, सवाल सुरक्षा और कायदा कानून का है? किराएदारों का वेरीफिकेशन जरूर होना चाहिए, वो चाहे जिस भी राज्य या शहर को हो। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान का भी यही कहना है कि किसी बाहरी राज्य के व्यक्ति को हम राज्य से नहीं निकाल सकते हैं, हमारे लोग यानी पंजाब के लोग भी बाहरी राज्यों में रहते हैं, बिजनेस करते हैं, खेती करते हैं, नौकरी करते हैं। हां, जो क्राइम करेगा, उसे बिल्कुल बख्शा नहीं जाएगा।
