डेली संवाद, जालंधर। Jalandhar News: जालंधर तहसील कार्यालय में ई-रजिस्ट्री प्रक्रिया के दौरान कथित तौर पर नियमों को ताक पर रखकर जबरन फोटो खींचने का विरोध करना एक वकील को भारी पड़ गया। इस मामले में एडवोकेट रविंदर मनूजा ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सब-रजिस्ट्रार कार्यालय के अंदर सक्रिय एक कथित ठेकेदार और उसके साथियों ने उनके साथ बदसलूकी की, गाली-गलौज की और मारपीट करने की कोशिश की। घटना के बाद अब मामला तूल पकड़ता जा रहा है और प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग उठने लगी है।
जालंधर (Jalandhar) के पीड़ित एडवोकेट रविंदर मनूजा के अनुसार, वह बैंक की एमओडीटी (MODT) रजिस्टर करवाने के सिलसिले में तहसील कार्यालय पहुंचे थे। इसी दौरान उन्होंने देखा कि कुछ अज्ञात लोग सब-रजिस्ट्रार के केबिन के अंदर मौजूद लोगों की जबरन ग्रुप फोटो खींच रहे हैं। मनूजा का कहना है कि ई-रजिस्ट्री व्यवस्था लागू होने के बाद से पोर्टल या विभागीय नियमों में ऐसी किसी भी ग्रुप फोटोग्राफी का कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि यह प्रक्रिया अनिवार्य होती तो पोर्टल स्वयं फोटो अपलोड करने की मांग करता।
डीसी ऑफिस से जुड़ा ठेकेदार
एडवोकेट मनूजा ने जब इस प्रक्रिया पर आपत्ति जताई तो उन्होंने सीधे तहसीलदार से संपर्क कर इस संबंध में जानकारी मांगी। उनका कहना है कि तहसीलदार ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विभाग की ओर से ऐसी किसी भी ग्रुप फोटो की कोई आवश्यकता नहीं है। तहसीलदार ने यह भी बताया कि फोटो खींचने वाला व्यक्ति खुद को डीसी ऑफिस से जुड़ा ठेकेदार बताता है, लेकिन विभाग को इस तरह की किसी गतिविधि की जरूरत नहीं है।
एडवोकेट मनूजा के मुताबिक-
तहसीलदार से बातचीत के बाद जब उन्होंने फोटो खिंचवाने से इनकार किया और कार्यालय से बाहर निकले, तो पहले से मौजूद 11-12 लोगों ने उन्हें घेर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन लोगों ने उनके साथ गाली-गलौज शुरू कर दी और माहौल तनावपूर्ण बना दिया। पीड़ित वकील का दावा है कि उक्त लोग लंबे समय से सब-रजिस्ट्रार कार्यालय के आसपास सक्रिय हैं और कार्यालय को अपने प्रभाव में लेकर काम कर रहे हैं।
हमला करने की कोशिश की
वकील रविंदर मनूजा ने आरोप लगाया कि स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब कथित आरोपियों ने उन पर हमला करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि आरोपी उन्हें पीटने और उनके कपड़े फाड़ने तक पर आमादा थे। इसी दौरान वहां मौजूद एक कर्मचारी और कुछ अन्य लोगों ने बीच-बचाव कर स्थिति को नियंत्रित किया। मनूजा का कहना है कि अगर समय रहते हस्तक्षेप न होता तो उनके साथ गंभीर घटना हो सकती थी।
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घटना के समय वहां मौजूद बैंक अधिकारी और कर्मचारी भी पूरे घटनाक्रम के प्रत्यक्षदर्शी बताए जा रहे हैं। पीड़ित पक्ष का कहना है कि तहसील कार्यालय और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों में पूरी घटना रिकॉर्ड हुई है, जिससे सच्चाई सामने आ सकती है।
जातिसूचक शब्द कहने का झूठा आरोप
दूसरी ओर, एडवोकेट रविंदर मनूजा ने आरोप लगाया कि अब कथित आरोपी खुद को बचाने के लिए उन पर जातिसूचक शब्द कहने का झूठा आरोप लगाने की तैयारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब आरोपियों को लगा कि उनका कथित अवैध काम और वसूली प्रभावित हो सकती है, तो उन्होंने मामले को दूसरी दिशा देने की कोशिश शुरू कर दी।
मनूजा ने प्रशासन और पुलिस से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और मौके पर मौजूद लोगों की गवाही से सच्चाई स्पष्ट हो जाएगी। फिलहाल यह मामला तहसील कार्यालय में कथित अवैध गतिविधियों और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
